क़ुरआन में दर्ज है कि नबियों और ईमान वालों ने अल्लाह से किस तरह माफ़ी माँगी। नीचे हर दुआ अपनी पूरी आयत के भीतर, मूल अरबी और एक प्रकाशित अनुवाद के साथ दी गई है, ताकि शब्द अपने संदर्भ से जुड़े रहें।
ऐ हमारे रब, हमने अपने ऊपर ज़ुल्म किया है
अपनी भूल के बाद आदम और उनकी पत्नी के शब्द, जिनमें उन्होंने माफ़ी और रहमत माँगी। (Al-Araf 7:23)
दोनों ने कहा : ऐ हमारे पालनहार! हमने अपने आपपर अत्याचार किया है। और यदि तूने हमें क्षमा न किया तथा हमपर दया न की, तो निश्चय हम अवश्य घाटा उठाने वालों में से हो जाएँगे।[7]
अनुवाद टिप्पणियाँ
[7] अर्थात आदम तथा ह़व्वा ने अपने पाप के लिए अल्लाह से क्षमा माँग ली। शैतान के समान अभिमान नहीं किया।
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मेरा चिंतन
ऐ मेरे रब, मैंने अपने ऊपर ज़ुल्म किया है, तो मुझे माफ़ कर दे
मूसा ने यह कहा, और आयत बताती है कि उन्हें माफ़ कर दिया गया। (Al-Qasas 28:16)
उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! निश्चय ही मैंने अपने ऊपर अत्याचार किया है, अतः मुझे क्षमा कर दे। तो उसने उसे क्षमा कर दिया, निःसंदेह वही बड़ा क्षमाशील, अत्यंत दयावान है।
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मेरा चिंतन
तेरे सिवा कोई माबूद नहीं, तू पाक है
अंधेरों से यूनुस की दुआ, जिसमें वे अपनी ग़लती स्वीकार करते हैं। (Al-Anbiya 21:87)
तथा मछली वाले[34] (की कहानी याद करो), जब वह ग़ुस्से से भरा हुआ चला गया[35] और उसने सोचा कि हम उसे तंगी में नहीं डालेंगे। अंततः उसने अंधेरों में पुकारा कि (ऐ अल्लाह!) तेरे सिवा कोई पूज्य नहीं, तू पवित्र है। निश्चय मैं ही अत्याचारियों में हो गया।[36]
अनुवाद टिप्पणियाँ
[34] इससे अभिप्रेत यूनुस अलैहिस्सलाम हैं। उनको ''ज़ुन्नून'' और "साह़िबुल ह़ूत" कहा गया है। अर्थात मछली वाला। क्योंकि उनको अल्लाह के आदेश से एक मछली ने निगल लिया था। इसका कुछ वर्णन सूरत यूनुस में आ चुका है। और कुछ सूरतुस-साफ़्फ़ात में आ रहा है।
[35] अर्थात अपनी जाति से क्रोधित होकर अल्लाह के अनुमति के बिना अपनी बस्ती से चले गए। इसी पर उन्हें पकड़ लिया गया।
[36] सह़ीह़ ह़दीस में आता है कि जो भी मुसलमान इस शब्द के साथ किसी विषय में दुआ करेगा तो अल्लाह उसकी दुआ को स्वीकार करेगा। (तिर्मिज़ी : 3505)
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मेरा चिंतन
हमारे गुनाह माफ़ कर और हमें जहन्नम की आग से बचा
इन्हें उन लोगों के शब्द बताया गया है जो अल्लाह से डरते हैं। (Ali Imran 3:16)
ऐ हमारे पालनहार! हमने एक पुकारने वाले[117] को ईमान की ओर बुलाते हुए सुना कि अपने पालनहार पर ईमान लाओ, तो हम ईमान ले आए। ऐ हमारे पालनहार! तो अब तू हमारे पापों को क्षमा कर दे तथा हमारी बुराइयों को हमसे दूर कर दे और हमें सदाचारियों के साथ मृत्यु दे।
अनुवाद टिप्पणियाँ
[117] अर्थात अंतिम नबी मुह़म्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को।
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मेरा चिंतन
ऐ मेरे रब, माफ़ कर और रहम कर
एक छोटी दुआ, जिसे कहने का आदेश नबी को दिया गया। (Al-Muminun 23:118)
और (उनके लिए) जो उनके पश्चात् आए, वे कहते हैं : ऐ हमारे पालनहार! हमें और हमारे उन भाइयों को क्षमा कर दे, जो हमसे पहले ईमान लाए और हमारे दिलों में उन लोगों के लिए कोई द्वेष न रख, जो ईमान लाए। ऐ हमारे पालनहार! तू अति करुणामय, अत्यंत दयावान् है।
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मेरा चिंतन
हमारे लिए हमारा नूर पूरा कर दे और हमें माफ़ कर
क़यामत के दिन ईमान वालों के शब्द, उस आयत में जो सच्ची तौबा का आह्वान करती है। (At-Tahrim 66:8)
ऐ ईमान वालो! अल्लाह के आगे सच्ची तौबा[6] करो। निकट है कि तुम्हारा पालनहार तुम्हारी बुराइयाँ तुमसे दूर कर दे तथा तुम्हें ऐसी जन्नतों में दाखिल करे, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं। जिस दिन अल्लाह नबी को तथा उन लोगों को जो उनके साथ ईमान लाए हैं, अपमानित नहीं करेगा। उनका प्रकाश[7] उनके आगे तथा उनके दाएँ दौड़ रहा होगा। वे कह रहे होंगे : ऐ हमारे पालनहार! हमारे लिए हमारे प्रकाश को पूर्ण कर दे तथा हमें क्षमा कर दे। निःसंदेह तू हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।
अनुवाद टिप्पणियाँ
[6] सच्ची तौबा का अर्थ यह है कि पाप को त्याग दे। और उसपर लज्जित हो तथा भविष्य में पाप न करने का संकल्प ले। और यदि किसी का कुछ लिया है तो उसे भरे और अत्याचार किया है तो क्षमा माँग ले।
[7] (देखिए : सूरतुल-ह़दीद, आयत : 12)।
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मेरा चिंतनपाठ स्रोत और सटीकता
मूल अरबी: Tanzil Uthmani v1.1. अर्थों का अनुवाद: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari · QuranEnc.com · v1.1.5.
सभी 6,236 आयत संदर्भों को स्रोत से मिलाकर जाँचा गया है। यह तकनीकी अखंडता जाँच है, स्वतंत्र विद्वत समीक्षा नहीं। आरंभ की बिस्मिल्लाहें उसी रूप में सुरक्षित रखी गई हैं जिस रूप में मिली थीं।
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