सूरह 20 · 135 आयतें · मक्की

Taa-Haa

ता-हा

طه
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20:1पृष्ठ 312 · जुज़ 16

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ طه ۝١

ता, हा।

Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari · QuranEnc.com · v1.1.5
मेरा चिंतन
20:2पृष्ठ 312 · जुज़ 16

مَآ أَنزَلْنَا عَلَيْكَ ٱلْقُرْءَانَ لِتَشْقَىٰٓ ۝٢

हमने आपपर यह क़ुरआन इसलिए नहीं अवतरित किया कि आप कष्ट में पड़ जाएँ।[1]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[1] अर्थात विरोधियों के ईमान न लाने पर।
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मेरा चिंतन
20:3पृष्ठ 312 · जुज़ 16

إِلَّا تَذْكِرَةً لِّمَن يَخْشَىٰ ۝٣

परंतु उसकी याददहानी (नसीहत) के लिए, जो डरता[2] है।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[2] अर्थात ईमान न लाने तथा कुकर्मों के दुष्परिणाम से।
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मेरा चिंतन
20:4पृष्ठ 312 · जुज़ 16

تَنزِيلًا مِّمَّنْ خَلَقَ ٱلْأَرْضَ وَٱلسَّمَـٰوَٰتِ ٱلْعُلَى ۝٤

उसकी ओर से उतारा हुआ है, जिसने पृथ्वी और ऊँचे आकाशों को बनाया।।

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मेरा चिंतन
20:5पृष्ठ 312 · जुज़ 16

ٱلرَّحْمَـٰنُ عَلَى ٱلْعَرْشِ ٱسْتَوَىٰ ۝٥

वह रहमान (अत्यंत दयावान् अल्लाह) अर्श (सिंहासन) पर बुलंद हुआ।

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मेरा चिंतन
20:6पृष्ठ 312 · जुज़ 16

لَهُۥ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا وَمَا تَحْتَ ٱلثَّرَىٰ ۝٦

उसी का[3] है, जो कुछ आकाशों में और जो कुछ धरती में है और जो उन दोनों के बीच है तथा जो गीली मिट्टी के नीचे है।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[3] अर्थात उसी के स्वामित्व में तथा उसी के अधीन है।
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मेरा चिंतन
20:7पृष्ठ 312 · जुज़ 16

وَإِن تَجْهَرْ بِٱلْقَوْلِ فَإِنَّهُۥ يَعْلَمُ ٱلسِّرَّ وَأَخْفَى ۝٧

यदि तुम उच्च स्वर में बात करो, तो वह गुप्त और उससे भी अधिक गुप्त बात को जानता है।

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मेरा चिंतन
20:8पृष्ठ 312 · जुज़ 16

ٱللَّهُ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ لَهُ ٱلْأَسْمَآءُ ٱلْحُسْنَىٰ ۝٨

अल्लाह वह है जिसके सिवा कोई पूज्य नहीं, सबसे अच्छे नाम उसी के हैं।

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मेरा चिंतन
20:9पृष्ठ 312 · जुज़ 16

وَهَلْ أَتَىٰكَ حَدِيثُ مُوسَىٰٓ ۝٩

और क्या (ऐ नबी!) आपके पास मूसा की ख़बर पहुँची?

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मेरा चिंतन
20:10पृष्ठ 312 · जुज़ 16

إِذْ رَءَا نَارًا فَقَالَ لِأَهْلِهِ ٱمْكُثُوٓا۟ إِنِّىٓ ءَانَسْتُ نَارًا لَّعَلِّىٓ ءَاتِيكُم مِّنْهَا بِقَبَسٍ أَوْ أَجِدُ عَلَى ٱلنَّارِ هُدًى ۝١٠

जब उसने एक आग देखी, तो अपने घरवालों से कहा : ठहरो, निःसंदेह मैंने एक आग देखी है, शायद मैं तुम्हारे पास उससे कोई अंगार लाे आऊँ, अथवा उस आग पर कोई मार्गदर्शन पा लूँ।[4]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[4] यह उस समय की बात है, जब मूसा अलैहिस्सलाम अपने परिवार के साथ मदयन नगर से मिस्र आ रहे थे और मार्ग भूल गए थे।
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मेरा चिंतन
20:11पृष्ठ 312 · जुज़ 16

فَلَمَّآ أَتَىٰهَا نُودِىَ يَـٰمُوسَىٰٓ ۝١١

फिर जब वह उसके पास आया तो उसे आवाज़ दी गई : ऐ मूसा!

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मेरा चिंतन
20:12पृष्ठ 312 · जुज़ 16

إِنِّىٓ أَنَا۠ رَبُّكَ فَٱخْلَعْ نَعْلَيْكَ ۖ إِنَّكَ بِٱلْوَادِ ٱلْمُقَدَّسِ طُوًى ۝١٢

निःसंदेह मैं ही तेरा पालनहार हूँ, अतः अपने दोनों जूते उतार दे, निःसंदेह तू पवित्र वादी “तुवा” में है।

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मेरा चिंतन
20:13पृष्ठ 313 · जुज़ 16

وَأَنَا ٱخْتَرْتُكَ فَٱسْتَمِعْ لِمَا يُوحَىٰٓ ۝١٣

और मैंने तुझे चुन[5] लिया है। अतः ध्यान से सुन, जो वह़्य की जा रही है।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[5] अर्थात नबी बना दिया।
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मेरा चिंतन
20:14पृष्ठ 313 · जुज़ 16

إِنَّنِىٓ أَنَا ٱللَّهُ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّآ أَنَا۠ فَٱعْبُدْنِى وَأَقِمِ ٱلصَّلَوٰةَ لِذِكْرِىٓ ۝١٤

निःसंदेह मैं ही अल्लाह हूँ, मेरे सिवा कोई पूज्य नहीं, तो मेरी ही इबादत कर तथा मेरे स्मरण (याद) के लिए नमाज़ स्थापित कर।[6]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[6] इबादत में नमाज़ सम्मिलित है, फिर भी उसका महत्त्व दिखाने के लिए उसका विशेष आदेश दिया गया है।
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मेरा चिंतन
20:15पृष्ठ 313 · जुज़ 16

إِنَّ ٱلسَّاعَةَ ءَاتِيَةٌ أَكَادُ أُخْفِيهَا لِتُجْزَىٰ كُلُّ نَفْسٍۭ بِمَا تَسْعَىٰ ۝١٥

निश्चय क़ियामत आने वाली है, मैं क़रीब हूँ कि उसे छिपाकर रखूँ। ताकि प्रत्येक प्राणी को उसका बदला दिया जाए, जो वह प्रयास करता है।

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मेरा चिंतन
20:16पृष्ठ 313 · जुज़ 16

فَلَا يَصُدَّنَّكَ عَنْهَا مَن لَّا يُؤْمِنُ بِهَا وَٱتَّبَعَ هَوَىٰهُ فَتَرْدَىٰ ۝١٦

अतः तुझे उससे वह व्यक्ति कहीं रोक न दे, जो उसपर ईमान (विश्वास) नहीं रखता और अपनी इच्छा के पालन में लगा है, अन्यथा तेरा नाश हो जाएगा।

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मेरा चिंतन
20:17पृष्ठ 313 · जुज़ 16

وَمَا تِلْكَ بِيَمِينِكَ يَـٰمُوسَىٰ ۝١٧

और ऐ मूसा! यह तेरे दाहिने हाथ में क्या है?

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मेरा चिंतन
20:18पृष्ठ 313 · जुज़ 16

قَالَ هِىَ عَصَاىَ أَتَوَكَّؤُا۟ عَلَيْهَا وَأَهُشُّ بِهَا عَلَىٰ غَنَمِى وَلِىَ فِيهَا مَـَٔارِبُ أُخْرَىٰ ۝١٨

उसने कहा : यह मेरी लाठी है। मैं इसपर टेक लगाता हूँ और इससे अपनी बकरियों के लिए पत्ते झाड़ता हूँ और मेरे लिए इसमें और भी कई ज़रूरतें हैं।

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मेरा चिंतन
20:19पृष्ठ 313 · जुज़ 16

قَالَ أَلْقِهَا يَـٰمُوسَىٰ ۝١٩

फरमाया : इसे फेंक दे, ऐ मूसा!

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मेरा चिंतन
20:20पृष्ठ 313 · जुज़ 16

فَأَلْقَىٰهَا فَإِذَا هِىَ حَيَّةٌ تَسْعَىٰ ۝٢٠

तो उसने उसे फेंक दिया और सहसा वह एक साँप था, जो दोड़ रहा था।

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मेरा चिंतन
20:21पृष्ठ 313 · जुज़ 16

قَالَ خُذْهَا وَلَا تَخَفْ ۖ سَنُعِيدُهَا سِيرَتَهَا ٱلْأُولَىٰ ۝٢١

फरमाया : इसे पकड़ ले और डर मत, जल्द ही हम इसे इसकी प्रथम स्थिति में लौटा देंगे।

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मेरा चिंतन
20:22पृष्ठ 313 · जुज़ 16

وَٱضْمُمْ يَدَكَ إِلَىٰ جَنَاحِكَ تَخْرُجْ بَيْضَآءَ مِنْ غَيْرِ سُوٓءٍ ءَايَةً أُخْرَىٰ ۝٢٢

और अपना हाथ अपनी कांख (बग़ल) की ओर लगा दे, वह बिना किसी दोष के सफेद (चमकता हुआ) निकलेगा, जबकि यह एक और निशानी है।

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मेरा चिंतन
20:23पृष्ठ 313 · जुज़ 16

لِنُرِيَكَ مِنْ ءَايَـٰتِنَا ٱلْكُبْرَى ۝٢٣

ताकि हम तुझे अपनी कुछ बड़ी निशानियाँ दिखाएँ।

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मेरा चिंतन
20:24पृष्ठ 313 · जुज़ 16

ٱذْهَبْ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ إِنَّهُۥ طَغَىٰ ۝٢٤

फ़िरऔन के पास जा, निश्चय वह सरकश हो गया है।

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मेरा चिंतन
20:25पृष्ठ 313 · जुज़ 16

قَالَ رَبِّ ٱشْرَحْ لِى صَدْرِى ۝٢٥

उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरे लिए मेरा सीना खोल दे।

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मेरा चिंतन
20:26पृष्ठ 313 · जुज़ 16

وَيَسِّرْ لِىٓ أَمْرِى ۝٢٦

तथा मेरे लिए मेरा काम सरल कर दे।

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मेरा चिंतन
20:27पृष्ठ 313 · जुज़ 16

وَٱحْلُلْ عُقْدَةً مِّن لِّسَانِى ۝٢٧

और मेरी ज़बान की गाँठ खोल दे।

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मेरा चिंतन
20:28पृष्ठ 313 · जुज़ 16

يَفْقَهُوا۟ قَوْلِى ۝٢٨

ताकि वे मेरी बात समझ लें।

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मेरा चिंतन
20:29पृष्ठ 313 · जुज़ 16

وَٱجْعَل لِّى وَزِيرًا مِّنْ أَهْلِى ۝٢٩

तथा मेरे लिए मेरे अपने घरवालों में से एक सहायकबना दे।

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मेरा चिंतन
20:30पृष्ठ 313 · जुज़ 16

هَـٰرُونَ أَخِى ۝٣٠

हारून को, जो मेरा भाई है।

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मेरा चिंतन
20:31पृष्ठ 313 · जुज़ 16

ٱشْدُدْ بِهِۦٓ أَزْرِى ۝٣١

उसके साथ मेरी पीठ मज़बूत़ कर दे।

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मेरा चिंतन
20:32पृष्ठ 313 · जुज़ 16

وَأَشْرِكْهُ فِىٓ أَمْرِى ۝٣٢

और उसे मेरे काम में शरीक कर दे।

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मेरा चिंतन
20:33पृष्ठ 313 · जुज़ 16

كَىْ نُسَبِّحَكَ كَثِيرًا ۝٣٣

ताकि हम तेरी बहुत ज़्यादा पवित्रता बयान करें।

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मेरा चिंतन
20:34पृष्ठ 313 · जुज़ 16

وَنَذْكُرَكَ كَثِيرًا ۝٣٤

तथा हम तुझे बहुत ज़्यादा याद करें।

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मेरा चिंतन
20:35पृष्ठ 313 · जुज़ 16

إِنَّكَ كُنتَ بِنَا بَصِيرًا ۝٣٥

निःसंदेह तू हमेशा हमारी स्थिति को भली प्रकार देखने वाला है।

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मेरा चिंतन
20:36पृष्ठ 313 · जुज़ 16

قَالَ قَدْ أُوتِيتَ سُؤْلَكَ يَـٰمُوسَىٰ ۝٣٦

फरमाया : निःसंदेह तुझे दिया गया जो तूने माँगा, ऐ मूसा!

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मेरा चिंतन
20:37पृष्ठ 313 · जुज़ 16

وَلَقَدْ مَنَنَّا عَلَيْكَ مَرَّةً أُخْرَىٰٓ ۝٣٧

और निश्चय ही हमने तुझपर एक और बार भी उपकार किया।[7]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[7] यह उस समय की बात है जब मूसा का जन्म हुआ। उस समय फ़िरऔन का आदेश था कि बनी इसराईल में जो भी शिशु जन्म ले, उसे वध कर दिया जाए।
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मेरा चिंतन
20:38पृष्ठ 314 · जुज़ 16

إِذْ أَوْحَيْنَآ إِلَىٰٓ أُمِّكَ مَا يُوحَىٰٓ ۝٣٨

जब हमने तेरी माँ की ओर वह़्य की, जो वह़्य की जाती थी।

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मेरा चिंतन
20:39पृष्ठ 314 · जुज़ 16

أَنِ ٱقْذِفِيهِ فِى ٱلتَّابُوتِ فَٱقْذِفِيهِ فِى ٱلْيَمِّ فَلْيُلْقِهِ ٱلْيَمُّ بِٱلسَّاحِلِ يَأْخُذْهُ عَدُوٌّ لِّى وَعَدُوٌّ لَّهُۥ ۚ وَأَلْقَيْتُ عَلَيْكَ مَحَبَّةً مِّنِّى وَلِتُصْنَعَ عَلَىٰ عَيْنِىٓ ۝٣٩

यह कि तू इसे ताबूत (संदूक़) में रख दे, फिर उसे नदी में डाल दे, फिर नदी उसे किनारे पर डाल दे, उसे मेरा एक शत्रु और उसका शत्रु उठा लेगा[8] और मैंने तुझपर अपनी ओर से एक प्रेम[9] डाल दिया और ताकि तेरा पालन-पोषण मेरी आँखों के सामने किया जाए।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[8] इस से तात्पर्य मिस्र का राजा फ़िरऔन है। [9] अर्थात तुम्हें सबका प्रिय अथवा फ़िरऔन का भी प्रिय बना दिया।
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मेरा चिंतन
20:40पृष्ठ 314 · जुज़ 16

إِذْ تَمْشِىٓ أُخْتُكَ فَتَقُولُ هَلْ أَدُلُّكُمْ عَلَىٰ مَن يَكْفُلُهُۥ ۖ فَرَجَعْنَـٰكَ إِلَىٰٓ أُمِّكَ كَىْ تَقَرَّ عَيْنُهَا وَلَا تَحْزَنَ ۚ وَقَتَلْتَ نَفْسًا فَنَجَّيْنَـٰكَ مِنَ ٱلْغَمِّ وَفَتَنَّـٰكَ فُتُونًا ۚ فَلَبِثْتَ سِنِينَ فِىٓ أَهْلِ مَدْيَنَ ثُمَّ جِئْتَ عَلَىٰ قَدَرٍ يَـٰمُوسَىٰ ۝٤٠

जब तेरी बहन[10] चल रही थी और कह रही थी : क्या मैं तुम्हें उसका पता बता दूँ, जो इसका पालन-पोषण करे? फिर हमने तुझे तेरी माँ के पास लौटा दिया, ताकि उसकी आँख ठंडी हो और वह शोक न करे। तथा तूने एक आदमी को मार डाला[11], तो हमने तुझे दुःखसे बचा लिया और हमने तुम्हारी अच्छी तरह से परीक्षा ली। फिर तू कई वर्ष मदयन वालों के बीच ठहरा रहा, फिर तू एक निश्चित अनुमान पर आया, ऐ मूसा!

अनुवाद टिप्पणियाँ
[10] अर्थात संदूक़ के पीछे नदी के किनारे। [11] अर्थात एक फ़िरऔनी को मारा और वह मर गया, तो तुम मदयन चले गए, इसका वर्णन सूरतुल-क़स़स़ में आएगा।
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मेरा चिंतन
20:41पृष्ठ 314 · जुज़ 16

وَٱصْطَنَعْتُكَ لِنَفْسِى ۝٤١

और मैंने तुझे विशेष रूप से अपने लिए बनाया है।

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मेरा चिंतन
20:42पृष्ठ 314 · जुज़ 16

ٱذْهَبْ أَنتَ وَأَخُوكَ بِـَٔايَـٰتِى وَلَا تَنِيَا فِى ذِكْرِى ۝٤٢

तू और तेरा भाई मेरी निशानियाँ लेकर जाओ और मुझे याद करने में आलस्य न करो।

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मेरा चिंतन
20:43पृष्ठ 314 · जुज़ 16

ٱذْهَبَآ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ إِنَّهُۥ طَغَىٰ ۝٤٣

तुम दोनों फ़िरऔन के पास जाओ, निःसंदेह वह सरकश हो गया है।

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मेरा चिंतन
20:44पृष्ठ 314 · जुज़ 16

فَقُولَا لَهُۥ قَوْلًا لَّيِّنًا لَّعَلَّهُۥ يَتَذَكَّرُ أَوْ يَخْشَىٰ ۝٤٤

तो उससे कोमल बात करो, आशा है कि वह उपदेश ग्रहण करे, या (अल्लाह से) डर जाए।

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मेरा चिंतन
20:45पृष्ठ 314 · जुज़ 16

قَالَا رَبَّنَآ إِنَّنَا نَخَافُ أَن يَفْرُطَ عَلَيْنَآ أَوْ أَن يَطْغَىٰ ۝٤٥

दोनों ने कहा : ऐ हमारे पालनहार! निश्चय ह डरते हैं कि वह हमपर अत्याचार करेगा, या हद से बढ़ जाएगा।

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मेरा चिंतन
20:46पृष्ठ 314 · जुज़ 16

قَالَ لَا تَخَافَآ ۖ إِنَّنِى مَعَكُمَآ أَسْمَعُ وَأَرَىٰ ۝٤٦

फरमाया : डरो मत, मैं तुम्हारे साथ हूँ, सब कुछ सुन रहा हूँ और सब कुछ देख रहा हूँ।

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मेरा चिंतन
20:47पृष्ठ 314 · जुज़ 16

فَأْتِيَاهُ فَقُولَآ إِنَّا رَسُولَا رَبِّكَ فَأَرْسِلْ مَعَنَا بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ وَلَا تُعَذِّبْهُمْ ۖ قَدْ جِئْنَـٰكَ بِـَٔايَةٍ مِّن رَّبِّكَ ۖ وَٱلسَّلَـٰمُ عَلَىٰ مَنِ ٱتَّبَعَ ٱلْهُدَىٰٓ ۝٤٧

अतः तुम दोनों उसके पास जाओ और कहो : हम तेरे पालनहार के रसूल हैं। अतः तू हमारे साथ बनी इसराईल को भेज दे और उन्हें यातना न दे, निश्चय हम तेरे पास तेरे पालनहार की ओर से एक निशानी लेकर आए हैं और सलामती है उसके लिए, जो मार्गदर्शन का अनुसरण करे।

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मेरा चिंतन
20:48पृष्ठ 314 · जुज़ 16

إِنَّا قَدْ أُوحِىَ إِلَيْنَآ أَنَّ ٱلْعَذَابَ عَلَىٰ مَن كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰ ۝٤٨

निःसंदेह हमारी ओर वह़्य (प्रकाशना) की गई है कि निश्चय ही यातना उसके लिए है, जिसने झुठलाया और मुँह फेरा।

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मेरा चिंतन
20:49पृष्ठ 314 · जुज़ 16

قَالَ فَمَن رَّبُّكُمَا يَـٰمُوسَىٰ ۝٤٩

उसने कहा : तुम दोनों का पालनहार कौन है, ऐ मूसा!?

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मेरा चिंतन
20:50पृष्ठ 314 · जुज़ 16

قَالَ رَبُّنَا ٱلَّذِىٓ أَعْطَىٰ كُلَّ شَىْءٍ خَلْقَهُۥ ثُمَّ هَدَىٰ ۝٥٠

(मूसा ने) कहा : हमारा पालनहार वह है, जिसने हर चीज़ को उसका आकार और रूप दिया, फिर रास्ता दिखाया।[12]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[12] आयत का भावार्थ यह है कि अल्लाह ने प्रत्येक जीव-जंतु के योग्य उसका रूप बनाया। और उसके जीवन की आवश्यकता के अनुसार उसे खाने-पीने तथा निवास की विधि समझा दी है।
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मेरा चिंतन
20:51पृष्ठ 314 · जुज़ 16

قَالَ فَمَا بَالُ ٱلْقُرُونِ ٱلْأُولَىٰ ۝٥١

उसने कहा : अच्छा, तो पहले ज़माने के लोगों का क्या हाल है?

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मेरा चिंतन
20:52पृष्ठ 315 · जुज़ 16

قَالَ عِلْمُهَا عِندَ رَبِّى فِى كِتَـٰبٍ ۖ لَّا يَضِلُّ رَبِّى وَلَا يَنسَى ۝٥٢

(मूसा ने) कहा : उनका ज्ञान मेरे रब के पास एक किताब में है, मेरा रब न भटकता है और न भूलता है।[13]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[13] अर्थात उन्होंने जैसा किया होगा, उनके आगे उनका परिणाम आएगा।
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मेरा चिंतन
20:53पृष्ठ 315 · जुज़ 16

ٱلَّذِى جَعَلَ لَكُمُ ٱلْأَرْضَ مَهْدًا وَسَلَكَ لَكُمْ فِيهَا سُبُلًا وَأَنزَلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءً فَأَخْرَجْنَا بِهِۦٓ أَزْوَٰجًا مِّن نَّبَاتٍ شَتَّىٰ ۝٥٣

वही है जिसने तुम्हारे लिए ज़मीन को बिछौना बनाया और उसमें तुम्हारे लिए रास्ते बनाए और आसमान से कुछ पानी उतारा, फिर हमने उसके द्वारा विभिन्न पौधों की कई क़िस्में निकालीं।

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मेरा चिंतन
20:54पृष्ठ 315 · जुज़ 16

كُلُوا۟ وَٱرْعَوْا۟ أَنْعَـٰمَكُمْ ۗ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَـٰتٍ لِّأُو۟لِى ٱلنُّهَىٰ ۝٥٤

खाओ और अपने चौपायों को चराओ, निःसंदेह इसमें बुद्धि वाले लोगों के लिए निश्चय बहुत-सी निशानियाँ हैं।

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मेरा चिंतन
20:55पृष्ठ 315 · जुज़ 16

۞ مِنْهَا خَلَقْنَـٰكُمْ وَفِيهَا نُعِيدُكُمْ وَمِنْهَا نُخْرِجُكُمْ تَارَةً أُخْرَىٰ ۝٥٥

इसी से हमने तुम्हें पैदा किया और इसी में हम तुम्हें लौटाएँगे और इसी से हम तुम्हें एक बार फिर[14] निकालेंगे।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[14] अर्थात प्रलय के दिन पुनः जीवित निकालेंगे।
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मेरा चिंतन
20:56पृष्ठ 315 · जुज़ 16

وَلَقَدْ أَرَيْنَـٰهُ ءَايَـٰتِنَا كُلَّهَا فَكَذَّبَ وَأَبَىٰ ۝٥٦

और निःसंदेह हमने उसे अपनी सब निशानियाँ दिखाईं, तो उसने झुठलाया और इनकार किया।

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मेरा चिंतन
20:57पृष्ठ 315 · जुज़ 16

قَالَ أَجِئْتَنَا لِتُخْرِجَنَا مِنْ أَرْضِنَا بِسِحْرِكَ يَـٰمُوسَىٰ ۝٥٧

उसने कहा : क्या तू हमारे पास इसलिए आया है कि हमें हमारी धरती से अपने जादू के द्वारा निकाल दे, ऐ मूसा!?

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मेरा चिंतन
20:58पृष्ठ 315 · जुज़ 16

فَلَنَأْتِيَنَّكَ بِسِحْرٍ مِّثْلِهِۦ فَٱجْعَلْ بَيْنَنَا وَبَيْنَكَ مَوْعِدًا لَّا نُخْلِفُهُۥ نَحْنُ وَلَآ أَنتَ مَكَانًا سُوًى ۝٥٨

तो हम भी अवश्य तेरे पास ऐसा ही जादू लाएँगे, अतः तू हमारे और अपने बीच वादे का एक समय निर्धारित कर दे, कि न हम उसके ख़िलाफ़ हों और न तू, ऐसी जगह जो बराबर हो।

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मेरा चिंतन
20:59पृष्ठ 315 · जुज़ 16

قَالَ مَوْعِدُكُمْ يَوْمُ ٱلزِّينَةِ وَأَن يُحْشَرَ ٱلنَّاسُ ضُحًى ۝٥٩

(मूसा ने) कहा : तुम्हारे वादे का समय उत्सव का दिन[15] है तथा यह कि लोग दिन चढ़े इकट्ठे हो जाएँ।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[15] इससे अभिप्राय उनका कोई वार्षिक उत्सव (मेले) का दिन था।
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मेरा चिंतन
20:60पृष्ठ 315 · जुज़ 16

فَتَوَلَّىٰ فِرْعَوْنُ فَجَمَعَ كَيْدَهُۥ ثُمَّ أَتَىٰ ۝٦٠

फिर फ़िरऔन वापस लौटा,[16] उसने अपने सारे हथकंडे जुटाए, फिर आ गया।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[16] मूसा के सत्य को न मान कर, मुक़ाबले की तैयारी में व्यस्त हो गया।
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मेरा चिंतन
20:61पृष्ठ 315 · जुज़ 16

قَالَ لَهُم مُّوسَىٰ وَيْلَكُمْ لَا تَفْتَرُوا۟ عَلَى ٱللَّهِ كَذِبًا فَيُسْحِتَكُم بِعَذَابٍ ۖ وَقَدْ خَابَ مَنِ ٱفْتَرَىٰ ۝٦١

मूसा ने उन (जादूगरों) से कहा : तुम्हारा विनाश हो! अल्लाह पर कोई झूठ मत गढ़ना, नहीं तो वह तुम्हें यातना देकर नष्ट कर देगा और निश्चय विफल हुआ, जिसने झूठ गढ़ा।

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मेरा चिंतन
20:62पृष्ठ 315 · जुज़ 16

فَتَنَـٰزَعُوٓا۟ أَمْرَهُم بَيْنَهُمْ وَأَسَرُّوا۟ ٱلنَّجْوَىٰ ۝٦٢

तो वे अपने मामले में आपस में मतभेद करने लगे[17] और उन्होंने चुपके-चुपके कानाफूसी की।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[17] अर्थात मूसा (अलैहिस्सलाम) की बात सुनकर उनमें मतभेद हो गया। कुछ ने कहा कि यह जादूगर है और कुछ ने कहा कि यह चेहरा जादूगर का नहीं हो सकता।
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मेरा चिंतन
20:63पृष्ठ 315 · जुज़ 16

قَالُوٓا۟ إِنْ هَـٰذَٰنِ لَسَـٰحِرَٰنِ يُرِيدَانِ أَن يُخْرِجَاكُم مِّنْ أَرْضِكُم بِسِحْرِهِمَا وَيَذْهَبَا بِطَرِيقَتِكُمُ ٱلْمُثْلَىٰ ۝٦٣

(कुछ ने) कहा : निःसंदेह ये दोनों जादूगर हैं, वे अपने जादू द्वारा तुम्हें तुम्हारे भूभाग से निकाल देना चाहते हैं और तुम्हारे सबसे अच्छे रास्ते (आदर्श प्रणाली) को समाप्त कर देना चाहते हैं।

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मेरा चिंतन
20:64पृष्ठ 315 · जुज़ 16

فَأَجْمِعُوا۟ كَيْدَكُمْ ثُمَّ ٱئْتُوا۟ صَفًّا ۚ وَقَدْ أَفْلَحَ ٱلْيَوْمَ مَنِ ٱسْتَعْلَىٰ ۝٦٤

अतः तुम अपने उपाय को मज़बूत कर लो, फिर पंक्तिबद्ध होकर आ जाओ और निश्चय आज वही सफल होगा, जो हावी रहेगा।

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मेरा चिंतन
20:65पृष्ठ 316 · जुज़ 16

قَالُوا۟ يَـٰمُوسَىٰٓ إِمَّآ أَن تُلْقِىَ وَإِمَّآ أَن نَّكُونَ أَوَّلَ مَنْ أَلْقَىٰ ۝٦٥

उन्होंने कहा : ऐ मूसा! या तो तुम फेंको या यह कि हम पहले फेंकने वाले हो जाएँ।

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मेरा चिंतन
20:66पृष्ठ 316 · जुज़ 16

قَالَ بَلْ أَلْقُوا۟ ۖ فَإِذَا حِبَالُهُمْ وَعِصِيُّهُمْ يُخَيَّلُ إِلَيْهِ مِن سِحْرِهِمْ أَنَّهَا تَسْعَىٰ ۝٦٦

(मूसा ने) कहा : बल्कि तुम्हीं फेंको। फिर उनकी रस्सियाँ तथा लाठियाँ, उसकी कल्पना में आता था कि उनके जादू के कारण सचमुच दौड़ रही हैं।

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मेरा चिंतन
20:67पृष्ठ 316 · जुज़ 16

فَأَوْجَسَ فِى نَفْسِهِۦ خِيفَةً مُّوسَىٰ ۝٦٧

तो मूसा ने अपने मन में एक डर महसूस किया।[18]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[18] मूसा अलैहिस्सलाम को यह भय हुआ कि लोग जादूगरों के धोखे में न आ जाएँ।
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मेरा चिंतन
20:68पृष्ठ 316 · जुज़ 16

قُلْنَا لَا تَخَفْ إِنَّكَ أَنتَ ٱلْأَعْلَىٰ ۝٦٨

हमने कहा : डरो मत, निश्चित रूप से तू ही प्रबल होगा।

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मेरा चिंतन
20:69पृष्ठ 316 · जुज़ 16

وَأَلْقِ مَا فِى يَمِينِكَ تَلْقَفْ مَا صَنَعُوٓا۟ ۖ إِنَّمَا صَنَعُوا۟ كَيْدُ سَـٰحِرٍ ۖ وَلَا يُفْلِحُ ٱلسَّاحِرُ حَيْثُ أَتَىٰ ۝٦٩

और फेंक दे, जो तेरे दाहिने हाथ में है, वह निगल जाएगा जो कुछ उन्होंने रचा है। निःसंदेह उन्होंने जो कुछ रचा है, वह जादूगर की चाल है और जादूगर जहाँ भी आए, सफल नहीं होता।

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मेरा चिंतन
20:70पृष्ठ 316 · जुज़ 16

فَأُلْقِىَ ٱلسَّحَرَةُ سُجَّدًا قَالُوٓا۟ ءَامَنَّا بِرَبِّ هَـٰرُونَ وَمُوسَىٰ ۝٧٠

फिर जादूगर सजदे में गिर गए, उन्होंने कहा : हम हारून और मूसा के रब पर ईमान लाए।

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मेरा चिंतन
20:71पृष्ठ 316 · जुज़ 16

قَالَ ءَامَنتُمْ لَهُۥ قَبْلَ أَنْ ءَاذَنَ لَكُمْ ۖ إِنَّهُۥ لَكَبِيرُكُمُ ٱلَّذِى عَلَّمَكُمُ ٱلسِّحْرَ ۖ فَلَأُقَطِّعَنَّ أَيْدِيَكُمْ وَأَرْجُلَكُم مِّنْ خِلَـٰفٍ وَلَأُصَلِّبَنَّكُمْ فِى جُذُوعِ ٱلنَّخْلِ وَلَتَعْلَمُنَّ أَيُّنَآ أَشَدُّ عَذَابًا وَأَبْقَىٰ ۝٧١

उसने कहा : तुम उसपर ईमान ले आए इससे पहले कि मैं तुम्हें अनुमति दूँ? निश्चय ही यह तुम्हारा बड़ा है, जिसने तुम्हें जादू सिखाया है। इसलिए निश्चित रूप से मैं तुम्हारे हाथ और तुम्हारे पैर विपरीत दिशा[19] से बुरी तरह काट दूँगा, और अवश्य ही तुम्हें खजूर के तनों पर सूली दूँगा तथा निश्चय ही तुम अवश्य जान लोगे कि हममें से कौन अधिक कठोर एवं स्थायी यातना देने वाला है।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[19] अर्थात दाहिना हाथ और बायाँ पैर अथवा बायाँ हाथ और दाहिना पैर।
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मेरा चिंतन
20:72पृष्ठ 316 · जुज़ 16

قَالُوا۟ لَن نُّؤْثِرَكَ عَلَىٰ مَا جَآءَنَا مِنَ ٱلْبَيِّنَـٰتِ وَٱلَّذِى فَطَرَنَا ۖ فَٱقْضِ مَآ أَنتَ قَاضٍ ۖ إِنَّمَا تَقْضِى هَـٰذِهِ ٱلْحَيَوٰةَ ٱلدُّنْيَآ ۝٧٢

उन्होंने कहा : हम तुझे कदापि तरजीह नहीं देंगे उन स्पष्ट तर्कों पर जो हमारे पास आए हैं और उसपर, जिसने हमें पैदा किया है। अतः फैसला कर, जो तू फ़ैसला करने वाला है। तू केवल इस दुनिया के जीवन का फ़ैसला कर सकता है।

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मेरा चिंतन
20:73पृष्ठ 316 · जुज़ 16

إِنَّآ ءَامَنَّا بِرَبِّنَا لِيَغْفِرَ لَنَا خَطَـٰيَـٰنَا وَمَآ أَكْرَهْتَنَا عَلَيْهِ مِنَ ٱلسِّحْرِ ۗ وَٱللَّهُ خَيْرٌ وَأَبْقَىٰٓ ۝٧٣

निःसंदेह हम अपने पालनहार पर ईमान लाए हैं, ताकि वह हमारे लिए हमारे पापों और जादू के उन कामों को क्षमा कर दे, जो तूने हमें करने के लिए मजबूर किया है और अल्लाह सर्वोत्तम और सदा रहने वाला है।[20]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[20] और तेरा राज्य तथा जीवन तो सामयिक है।
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मेरा चिंतन
20:74पृष्ठ 316 · जुज़ 16

إِنَّهُۥ مَن يَأْتِ رَبَّهُۥ مُجْرِمًا فَإِنَّ لَهُۥ جَهَنَّمَ لَا يَمُوتُ فِيهَا وَلَا يَحْيَىٰ ۝٧٤

निःसंदेह तथ्य यह है कि जो अपने पालनहार के पास अपराधी बनकर आएगा, तो निश्चित रूप से उसी के लिए नरक है, जिसमें न वह मरेगा और न जिएगा।

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मेरा चिंतन
20:75पृष्ठ 316 · जुज़ 16

وَمَن يَأْتِهِۦ مُؤْمِنًا قَدْ عَمِلَ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ فَأُو۟لَـٰٓئِكَ لَهُمُ ٱلدَّرَجَـٰتُ ٱلْعُلَىٰ ۝٧٥

तथा जो उसके पास मोमिन बनकर आएगा कि उसने अच्छे कर्म किए होंगे, तो यही लोग हैं जिनके लिए सर्वोच्च पद हैं।

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मेरा चिंतन
20:76पृष्ठ 316 · जुज़ 16

جَنَّـٰتُ عَدْنٍ تَجْرِى مِن تَحْتِهَا ٱلْأَنْهَـٰرُ خَـٰلِدِينَ فِيهَا ۚ وَذَٰلِكَ جَزَآءُ مَن تَزَكَّىٰ ۝٧٦

स्थायी निवास के बाग़, जिनके नीचे से नहरें बहती हैं, उनमें हमेशा के लिए रहने वाले हैं और यह उसका प्रतिफल है, जो पवित्र हुआ।

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मेरा चिंतन
20:77पृष्ठ 317 · जुज़ 16

وَلَقَدْ أَوْحَيْنَآ إِلَىٰ مُوسَىٰٓ أَنْ أَسْرِ بِعِبَادِى فَٱضْرِبْ لَهُمْ طَرِيقًا فِى ٱلْبَحْرِ يَبَسًا لَّا تَخَـٰفُ دَرَكًا وَلَا تَخْشَىٰ ۝٧٧

और निश्चय ही हमने मूसा की ओर वह़्य की कि मेरे बंदो को रातों-रात ले जा, फिर उनके लिए समुद्र में एक सूखा मार्ग बना,[21] न तू पकड़े जाने से भय खाएगा और न डरेगा।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[21] इसका सविस्तार वर्णन सूरतुश शुअरा : 26 में आ रहा है।
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मेरा चिंतन
20:78पृष्ठ 317 · जुज़ 16

فَأَتْبَعَهُمْ فِرْعَوْنُ بِجُنُودِهِۦ فَغَشِيَهُم مِّنَ ٱلْيَمِّ مَا غَشِيَهُمْ ۝٧٨

फिर फ़िरऔन ने अपनी सेना के साथ उनका पीछा किया, तो उन्हें समुद्र से उस चीज़ ने ढाँप लिया जिसने उन्हें ढाँप लिया।

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मेरा चिंतन
20:79पृष्ठ 317 · जुज़ 16

وَأَضَلَّ فِرْعَوْنُ قَوْمَهُۥ وَمَا هَدَىٰ ۝٧٩

और फ़िरऔन ने अपनी क़ौम को गुमराह किया और उन्हें सीधे रास्ते पर न चलाया।

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मेरा चिंतन
20:80पृष्ठ 317 · जुज़ 16

يَـٰبَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ قَدْ أَنجَيْنَـٰكُم مِّنْ عَدُوِّكُمْ وَوَٰعَدْنَـٰكُمْ جَانِبَ ٱلطُّورِ ٱلْأَيْمَنَ وَنَزَّلْنَا عَلَيْكُمُ ٱلْمَنَّ وَٱلسَّلْوَىٰ ۝٨٠

ऐ बनी इसराईल! निःसंदेह हमने तुम्हें तुम्हारे शत्रुओं से छुड़ाया और तुम्हें पर्वत के दाहिनी ओर[22] का वचन दिया और तुमपर 'मन्न' और 'सल्वा' उतारा।[23]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[22] अर्ताथ तुमपर तौरात उतारने के लिए। [23] मन्न तथा सल्वा के भाष्य के लिये देखिए : सूरतुल-बक़रा, आयत : 57
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मेरा चिंतन
20:81पृष्ठ 317 · जुज़ 16

كُلُوا۟ مِن طَيِّبَـٰتِ مَا رَزَقْنَـٰكُمْ وَلَا تَطْغَوْا۟ فِيهِ فَيَحِلَّ عَلَيْكُمْ غَضَبِى ۖ وَمَن يَحْلِلْ عَلَيْهِ غَضَبِى فَقَدْ هَوَىٰ ۝٨١

खाओ उन पवित्र चीज़ों में से, जो हमने तुम्हें प्रदान की हैं तथा उनमें हद से न बढ़ो। अन्यथा तुमपर मेरा प्रकोप उतरेगा और जिसपर मेरा प्रकोप उतरा, तो निश्चय उसका सर्वनाश हो गया।

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मेरा चिंतन
20:82पृष्ठ 317 · जुज़ 16

وَإِنِّى لَغَفَّارٌ لِّمَن تَابَ وَءَامَنَ وَعَمِلَ صَـٰلِحًا ثُمَّ ٱهْتَدَىٰ ۝٨٢

और निःसंदेह मैं निश्चय उसको बहुत क्षमा करने वाला हूँ, जो तौबा करे और ईमान लाए और अच्छा कर्म करे, फिर सीधे मार्ग पर चले।

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मेरा चिंतन
20:83पृष्ठ 317 · जुज़ 16

۞ وَمَآ أَعْجَلَكَ عَن قَوْمِكَ يَـٰمُوسَىٰ ۝٨٣

और तुझे तेरी जाति से जल्दी क्या चीज़ ले आई ऐ मूसा!?[24]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[24] अर्थात तुम पर्वत की दाहिनी ओर अपनी जाति से पहले क्यों आ गए और उन्हें पीछे क्यों छोड़ दिया?
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मेरा चिंतन
20:84पृष्ठ 317 · जुज़ 16

قَالَ هُمْ أُو۟لَآءِ عَلَىٰٓ أَثَرِى وَعَجِلْتُ إِلَيْكَ رَبِّ لِتَرْضَىٰ ۝٨٤

उसने कहा : वे मेरे पीछे ही हैं और मैं तेरी ओर जल्दी आ गया, ऐ मेरे पालनहार! ताकि तू प्रसन्न हो जाए।

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मेरा चिंतन
20:85पृष्ठ 317 · जुज़ 16

قَالَ فَإِنَّا قَدْ فَتَنَّا قَوْمَكَ مِنۢ بَعْدِكَ وَأَضَلَّهُمُ ٱلسَّامِرِىُّ ۝٨٥

(अल्लाह ने) फरमाया : तो निश्चय हमने तेरे पीछे तेरी जाति के लोगों को परीक्षा में डाल दिया है और सामिरी ने उन्हें पथभ्रष्ट कर दिया है।

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मेरा चिंतन
20:86पृष्ठ 317 · जुज़ 16

فَرَجَعَ مُوسَىٰٓ إِلَىٰ قَوْمِهِۦ غَضْبَـٰنَ أَسِفًا ۚ قَالَ يَـٰقَوْمِ أَلَمْ يَعِدْكُمْ رَبُّكُمْ وَعْدًا حَسَنًا ۚ أَفَطَالَ عَلَيْكُمُ ٱلْعَهْدُ أَمْ أَرَدتُّمْ أَن يَحِلَّ عَلَيْكُمْ غَضَبٌ مِّن رَّبِّكُمْ فَأَخْلَفْتُم مَّوْعِدِى ۝٨٦

फिर मूसा ग़ुस्से से भरा हुआ, खेद में डूबा हुआ अपनी जाति की ओर वापस आया। उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! क्या तुम्हारे रब ने तुम्हें अच्छा वादा नहीं दिया था?[25] तो क्या वह अवधि तुम पर लंबी हो गई,[26] या तुमने चाहा कि तुमपर तुम्हारे रब का कोई प्रकोप उतरे? तो तुमने मेरा वादा[27] तोड़ दिया।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[25] अर्थात धर्म-पुस्तक तौरात देने का वादा। [26] अर्थात वादा की अवधि दीर्घ प्रतीत होने लगी। [27] अर्थात मेरे वापस आने तक, अल्लाह की इबादत पर स्थिर रहने की जो प्रतिज्ञा की थी।
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मेरा चिंतन
20:87पृष्ठ 317 · जुज़ 16

قَالُوا۟ مَآ أَخْلَفْنَا مَوْعِدَكَ بِمَلْكِنَا وَلَـٰكِنَّا حُمِّلْنَآ أَوْزَارًا مِّن زِينَةِ ٱلْقَوْمِ فَقَذَفْنَـٰهَا فَكَذَٰلِكَ أَلْقَى ٱلسَّامِرِىُّ ۝٨٧

उन्होंने कहा : हमने अपने अधिकार से आपके वचन का उल्लंघन नहीं किया, लेकिन लोगों[28] के गहनों का कुछ बोझ हमपर लाद दिया गया था, तो हमने उन्हें फेंक[29] दिया और ऐसे ही सामिरी[30] ने फेंक दिया।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[28] इससे अभिप्रेत फ़िरऔन की जाति है, जिनके आभूषण उन्होंने उधार ले रखे थे। [29] अर्थात अपने पास रखना नहीं चाहा, और एक अग्नि कुंड में फेंक दिया। [30] अर्थात जो कुछ उसके पास था।
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मेरा चिंतन
20:88पृष्ठ 318 · जुज़ 16

فَأَخْرَجَ لَهُمْ عِجْلًا جَسَدًا لَّهُۥ خُوَارٌ فَقَالُوا۟ هَـٰذَآ إِلَـٰهُكُمْ وَإِلَـٰهُ مُوسَىٰ فَنَسِىَ ۝٨٨

फिर उसने[31] उनके लिए एक बछड़ा निकाला, जो मात्र शरीर था, जिसकी गाय की सी आवाज़ थी। तो उन्होंने कहा : यही तुम्हारा पूज्य तथा मूसा का पूज्य है, सो वह भूल गया है।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[31] अर्थात सामिरी ने आभूषणों को पिघला कर बछड़ा बना लिया।
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मेरा चिंतन
20:89पृष्ठ 318 · जुज़ 16

أَفَلَا يَرَوْنَ أَلَّا يَرْجِعُ إِلَيْهِمْ قَوْلًا وَلَا يَمْلِكُ لَهُمْ ضَرًّا وَلَا نَفْعًا ۝٨٩

तो क्या वे देखते नहीं कि वह न उनकी किसी बात का उत्तर देता है और न वह उनके किसी नुक़सान का मालिक है और न किसी लाभ का।[32]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[32] फिर वह पूज्य कैसे हो सकता है?
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मेरा चिंतन
20:90पृष्ठ 318 · जुज़ 16

وَلَقَدْ قَالَ لَهُمْ هَـٰرُونُ مِن قَبْلُ يَـٰقَوْمِ إِنَّمَا فُتِنتُم بِهِۦ ۖ وَإِنَّ رَبَّكُمُ ٱلرَّحْمَـٰنُ فَٱتَّبِعُونِى وَأَطِيعُوٓا۟ أَمْرِى ۝٩٠

और निःसंदेह हारून उनसे पहले ही कह चुका था : ऐ मेरी जाति के लोगो! बात यह है कि इसके द्वारा तुम्हारी परीक्षा की गई है और निश्चय तुम्हारा पालनहार रहमान (अत्यंत दयावान् अल्लाह) ही है। अतः मेरा अनुसरण करो तथा मेरे आदेश का पालन करो।

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मेरा चिंतन
20:91पृष्ठ 318 · जुज़ 16

قَالُوا۟ لَن نَّبْرَحَ عَلَيْهِ عَـٰكِفِينَ حَتَّىٰ يَرْجِعَ إِلَيْنَا مُوسَىٰ ۝٩١

उन्होंने कहा : हम इसी पर जमें बैठे रहेंगे, यहाँ तक कि मूसा हमारे पास वापस आ जाए।

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मेरा चिंतन
20:92पृष्ठ 318 · जुज़ 16

قَالَ يَـٰهَـٰرُونُ مَا مَنَعَكَ إِذْ رَأَيْتَهُمْ ضَلُّوٓا۟ ۝٩٢

(मूसा ने) कहा : ऐ हारून! तुझे किस बात ने रोका, जब तूने उन्हें देखा कि वे पथभ्रष्ट हो गए हैं?

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मेरा चिंतन
20:93पृष्ठ 318 · जुज़ 16

أَلَّا تَتَّبِعَنِ ۖ أَفَعَصَيْتَ أَمْرِى ۝٩٣

कि तू मेरा अनुसरण न करे? तो क्या तूने मेरे आदेश की अवहेलना की?

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मेरा चिंतन
20:94पृष्ठ 318 · जुज़ 16

قَالَ يَبْنَؤُمَّ لَا تَأْخُذْ بِلِحْيَتِى وَلَا بِرَأْسِىٓ ۖ إِنِّى خَشِيتُ أَن تَقُولَ فَرَّقْتَ بَيْنَ بَنِىٓ إِسْرَٰٓءِيلَ وَلَمْ تَرْقُبْ قَوْلِى ۝٩٤

उसने कहा : ऐ मेरी माँ के बेटे! न मेरी दाढ़ी पकड़ और न मेरा सिर। मैं तो इससे डरा कि तू कहेगा : तूने बनी इसराईल में फूट डाल दी और मेरी बात की प्रतीक्षा नहीं की।

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मेरा चिंतन
20:95पृष्ठ 318 · जुज़ 16

قَالَ فَمَا خَطْبُكَ يَـٰسَـٰمِرِىُّ ۝٩٥

(मूसा ने) कहा : तो ऐ सामिरी! तोरा मामला क्या है?

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मेरा चिंतन
20:96पृष्ठ 318 · जुज़ 16

قَالَ بَصُرْتُ بِمَا لَمْ يَبْصُرُوا۟ بِهِۦ فَقَبَضْتُ قَبْضَةً مِّنْ أَثَرِ ٱلرَّسُولِ فَنَبَذْتُهَا وَكَذَٰلِكَ سَوَّلَتْ لِى نَفْسِى ۝٩٦

उसने कहा : मैंने वह चीज़ देखी, जो इन लोगों नहीं देखी, तो मैंने रसूल के पदचिह्न से एक मुट्ठी उठाली, फिर मैंने उसे डाल दिया और मेरे दिल ने इसी तरह करना मेरे लिए सुसज्जित कर दिया।[33]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[33] अधिकांश भाष्यकारों ने रसूल से अभिप्राय जिबरील (फ़रिश्ता) लिया है। अर्थ यह है कि सामिरी ने यह बात बनाई कि जब उसने फ़िरऔन और उसकी सेना के डूबने के समय जिबरील (अलैहिस्सलाम) को घोड़े पर सवार वहाँ देखा, तो उन के घोड़े के पद्चिह्न की मिट्टी रख ली। और जब सोने का बछड़ा बनाकर उस धूल को उसपर फेंक दिया, तो उसके प्रभाव से उसमें से एक प्रकार की आवाज़ निकलने लगी, जो उनके कुपथ होने का कारण बनी।
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मेरा चिंतन
20:97पृष्ठ 318 · जुज़ 16

قَالَ فَٱذْهَبْ فَإِنَّ لَكَ فِى ٱلْحَيَوٰةِ أَن تَقُولَ لَا مِسَاسَ ۖ وَإِنَّ لَكَ مَوْعِدًا لَّن تُخْلَفَهُۥ ۖ وَٱنظُرْ إِلَىٰٓ إِلَـٰهِكَ ٱلَّذِى ظَلْتَ عَلَيْهِ عَاكِفًا ۖ لَّنُحَرِّقَنَّهُۥ ثُمَّ لَنَنسِفَنَّهُۥ فِى ٱلْيَمِّ نَسْفًا ۝٩٧

(मूसा ने) कहा : "बस चला जा, निःसंदेह तेरे लिए जीवन भर यह है कि तू कहता रहे : मुझे स्पर्श न करना।[34] और निःसंदेह तेरे लिए एक और भी वादा[35] है, जो तुझसे कदापि न टलेगा। तथा अपने पूज्य को देख, जिसका तू पुजारी बना रहा, निश्चय हम उसे अवश्य अच्छी तरह जलाएँगे, फिर निश्चय ही उसे समुद्र में अच्छी तरह से उड़ा देंगे।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[34] अर्थात मेरे समीप न आना और न मुझे छूना, मैं अछूत हूँ। [35] अर्थात परलोक की यातना का।
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मेरा चिंतन
20:98पृष्ठ 318 · जुज़ 16

إِنَّمَآ إِلَـٰهُكُمُ ٱللَّهُ ٱلَّذِى لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ ۚ وَسِعَ كُلَّ شَىْءٍ عِلْمًا ۝٩٨

तुम्हारा पूज्य तो अल्लाह ही है, जिसके अलावा कोई पूज्य नहीं, उसने हर चीज को ज्ञान से घेर रखा है।

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मेरा चिंतन
20:99पृष्ठ 319 · जुज़ 16

كَذَٰلِكَ نَقُصُّ عَلَيْكَ مِنْ أَنۢبَآءِ مَا قَدْ سَبَقَ ۚ وَقَدْ ءَاتَيْنَـٰكَ مِن لَّدُنَّا ذِكْرًا ۝٩٩

इसी प्रकार हम आपको कुछ ऐसी ख़बरें सुनाते हैं जो गुज़र चुकी हैं और निःसंदेह हमने आपको अपनी तरफ़ से एक नसीहत प्रदान की है।

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मेरा चिंतन
20:100पृष्ठ 319 · जुज़ 16

مَّنْ أَعْرَضَ عَنْهُ فَإِنَّهُۥ يَحْمِلُ يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ وِزْرًا ۝١٠٠

जो उससे मुँह फेरेगा, तो निश्चय ही वह क़ियामत के दिन एक भारी[36] बोझ उठाएगा।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[36] अर्थात पापों का बोझ।
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मेरा चिंतन
20:101पृष्ठ 319 · जुज़ 16

خَـٰلِدِينَ فِيهِ ۖ وَسَآءَ لَهُمْ يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ حِمْلًا ۝١٠١

वे उसमें हमेशा रहने वाले होंगे और क़ियामत के दिन वह उनके लिए बुरा बोझ होगा।

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मेरा चिंतन
20:102पृष्ठ 319 · जुज़ 16

يَوْمَ يُنفَخُ فِى ٱلصُّورِ ۚ وَنَحْشُرُ ٱلْمُجْرِمِينَ يَوْمَئِذٍ زُرْقًا ۝١٠٢

जिस दिन सूर[37] में फूँका जाएगा और हम अपराधियों को उस दिन इस दशा में इकट्ठा करेंगे कि नीली आँखों वाले होंगे।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[37] "सूर" का अर्थ नरसिंघा है, जिसमें अल्लाह के आदेश से एक फ़रिश्ता इसराफ़ील अलैहिस्सलाम फूँकेगा, और प्रलय आ जाएगी। (मुसनद अह़्मद : 2191) और पुनः फूँकेगा तो सब जीवित होकर हश्र के मैदान में आ जाएँगे।
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मेरा चिंतन
20:103पृष्ठ 319 · जुज़ 16

يَتَخَـٰفَتُونَ بَيْنَهُمْ إِن لَّبِثْتُمْ إِلَّا عَشْرًا ۝١٠٣

वे आपस में चुपके-चुपके कह रहे होंगे, तुम (संसार में) दस दिन के सिवा नहीं ठहरे।

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मेरा चिंतन
20:104पृष्ठ 319 · जुज़ 16

نَّحْنُ أَعْلَمُ بِمَا يَقُولُونَ إِذْ يَقُولُ أَمْثَلُهُمْ طَرِيقَةً إِن لَّبِثْتُمْ إِلَّا يَوْمًا ۝١٠٤

हम अधिक जानने वाले हैं जो कुछ वे कह रहे होंगे, जब उनका सबसे समझदार व्यक्ति कह रहा होगा कि तुम केवल एक दिन ठहरे हो।

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मेरा चिंतन
20:105पृष्ठ 319 · जुज़ 16

وَيَسْـَٔلُونَكَ عَنِ ٱلْجِبَالِ فَقُلْ يَنسِفُهَا رَبِّى نَسْفًا ۝١٠٥

वे आपसे पहाड़ों के विषय में पूछते हैं। आप कह दें कि मेरा पालनहार उन्हें उड़ाकर तितर-बितर कर देगा।

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मेरा चिंतन
20:106पृष्ठ 319 · जुज़ 16

فَيَذَرُهَا قَاعًا صَفْصَفًا ۝١٠٦

फिर धरती को एक समतल मैदान बनाकर छोड़ेगा।

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मेरा चिंतन
20:107पृष्ठ 319 · जुज़ 16

لَّا تَرَىٰ فِيهَا عِوَجًا وَلَآ أَمْتًا ۝١٠٧

तुम उसमें कोई टेढ़ापन और नीच-ऊँच नहीं देखोगे।

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मेरा चिंतन
20:108पृष्ठ 319 · जुज़ 16

يَوْمَئِذٍ يَتَّبِعُونَ ٱلدَّاعِىَ لَا عِوَجَ لَهُۥ ۖ وَخَشَعَتِ ٱلْأَصْوَاتُ لِلرَّحْمَـٰنِ فَلَا تَسْمَعُ إِلَّا هَمْسًا ۝١٠٨

उस दिन वे पुकारने वाले का अनुसरण करेंगे, उसका अनुसरण करने से कोई विमुख नहीं होगा, और सभी आवाजें रहमान के लिए धीमी हो जाएँगी, फिर तुम एक बहुत ही धीमी आवाज के अलावा कुछ भी नहीं सुनोगे।

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मेरा चिंतन
20:109पृष्ठ 319 · जुज़ 16

يَوْمَئِذٍ لَّا تَنفَعُ ٱلشَّفَـٰعَةُ إِلَّا مَنْ أَذِنَ لَهُ ٱلرَّحْمَـٰنُ وَرَضِىَ لَهُۥ قَوْلًا ۝١٠٩

उस दिन सिफ़ारिश लाभ नहीं देगी, परंतु जिसके लिए रहमान अनुज्ञा दे और जिसके लिए वह बात करना पसंद करे।

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मेरा चिंतन
20:110पृष्ठ 319 · जुज़ 16

يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا خَلْفَهُمْ وَلَا يُحِيطُونَ بِهِۦ عِلْمًا ۝١١٠

वह जानता है जो कुछ उनके आगे है और जो कुछ उनके पीछे है और वे उसे अपने ज्ञान के घेरे में नहीं ला सकते।

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मेरा चिंतन
20:111पृष्ठ 319 · जुज़ 16

۞ وَعَنَتِ ٱلْوُجُوهُ لِلْحَىِّ ٱلْقَيُّومِ ۖ وَقَدْ خَابَ مَنْ حَمَلَ ظُلْمًا ۝١١١

तथा सभी चेहरे उस जीवित रहने वाले, क़ायम रखने वाले लिए झुक जाएँगे और निश्चय विफल हो गया, जिसने अत्याचार का बोझ[38] उठाया।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[38] संसार में किसी पर अत्याचार, तथा अल्लाह के साथ शिर्क किया।
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मेरा चिंतन
20:112पृष्ठ 319 · जुज़ 16

وَمَن يَعْمَلْ مِنَ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَلَا يَخَافُ ظُلْمًا وَلَا هَضْمًا ۝١١٢

तथा जो व्यक्ति नेक काम करे और वह मोमिन हो, तो वह न किसी अत्याचार से डरेगा और न अधिकार हनन से।

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मेरा चिंतन
20:113पृष्ठ 319 · जुज़ 16

وَكَذَٰلِكَ أَنزَلْنَـٰهُ قُرْءَانًا عَرَبِيًّا وَصَرَّفْنَا فِيهِ مِنَ ٱلْوَعِيدِ لَعَلَّهُمْ يَتَّقُونَ أَوْ يُحْدِثُ لَهُمْ ذِكْرًا ۝١١٣

और इसी प्रकार हमने इसे अरबी क़ुरआन बनाकर अवतरित किया तथा इसमें चेतावनी की बातें विभिन्न प्रकार से वर्णन कीं, शायद कि वे डर जाएँ, अथवा यह उनके लिए कोई उपदेश पैदा कर दे।

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मेरा चिंतन
20:114पृष्ठ 320 · जुज़ 16

فَتَعَـٰلَى ٱللَّهُ ٱلْمَلِكُ ٱلْحَقُّ ۗ وَلَا تَعْجَلْ بِٱلْقُرْءَانِ مِن قَبْلِ أَن يُقْضَىٰٓ إِلَيْكَ وَحْيُهُۥ ۖ وَقُل رَّبِّ زِدْنِى عِلْمًا ۝١١٤

अतः सर्वोच्च है अल्लाह, जो सच्चा बादशाह है, और क़ुरआन को पढ़ने में जल्दी[39] न करें, इससे पूर्व कि आपकी ओर उसकी वह़्य पूरी की जाए तथा कहें : ऐ मेरे पालनहार! मुझे ज्ञान में बढ़ा दे।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[39] जब जिबरील अलैहिस्सलाम नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास वह़्य (प्रकाशना) लाते, तो आप इस भय से कि कुछ भूल न जाएँ, उनके साथ-साथ ही पढ़ने लगते। अल्लाह ने आपको ऐसा करने से रोक दिया। इसका वर्णन सूरतुल-क़ियामा, आयत : 75 में आ रहा है।
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मेरा चिंतन
20:115पृष्ठ 320 · जुज़ 16

وَلَقَدْ عَهِدْنَآ إِلَىٰٓ ءَادَمَ مِن قَبْلُ فَنَسِىَ وَلَمْ نَجِدْ لَهُۥ عَزْمًا ۝١١٥

और निःसंदेह हमने इससे पहले आदम को ताकीद की, फिर वह भूल गया और हमने उसमें कोई दृढ़ संकल्प नहीं पाया ।

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मेरा चिंतन
20:116पृष्ठ 320 · जुज़ 16

وَإِذْ قُلْنَا لِلْمَلَـٰٓئِكَةِ ٱسْجُدُوا۟ لِـَٔادَمَ فَسَجَدُوٓا۟ إِلَّآ إِبْلِيسَ أَبَىٰ ۝١١٦

तथा जब हमने फ़रिश्तों से कहा : आदम को सजदा करो। तो उन्होंने सजदा किया, सिवाय इबलीस के, उसने इनकार किया।

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मेरा चिंतन
20:117पृष्ठ 320 · जुज़ 16

فَقُلْنَا يَـٰٓـَٔادَمُ إِنَّ هَـٰذَا عَدُوٌّ لَّكَ وَلِزَوْجِكَ فَلَا يُخْرِجَنَّكُمَا مِنَ ٱلْجَنَّةِ فَتَشْقَىٰٓ ۝١١٧

तो हमने कहा : निःसंदेह यह तुम्हारा और तुम्हारी पत्नी का दुश्मन है, इसलिए कहीं तुम दोनों को जन्नत से न निकलवा दे कि तुम मुसीबत में पड़ जाओगे।

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मेरा चिंतन
20:118पृष्ठ 320 · जुज़ 16

إِنَّ لَكَ أَلَّا تَجُوعَ فِيهَا وَلَا تَعْرَىٰ ۝١١٨

निःसंदेह तुम्हारे लिए यह है कि तुम इसमें न भूखे होगे और न नग्न होगे।

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मेरा चिंतन
20:119पृष्ठ 320 · जुज़ 16

وَأَنَّكَ لَا تَظْمَؤُا۟ فِيهَا وَلَا تَضْحَىٰ ۝١١٩

और यह कि निश्चय ही तुम इसमें न प्यासे होगे और न धूप खाओगा।

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मेरा चिंतन
20:120पृष्ठ 320 · जुज़ 16

فَوَسْوَسَ إِلَيْهِ ٱلشَّيْطَـٰنُ قَالَ يَـٰٓـَٔادَمُ هَلْ أَدُلُّكَ عَلَىٰ شَجَرَةِ ٱلْخُلْدِ وَمُلْكٍ لَّا يَبْلَىٰ ۝١٢٠

तो शैतान ने उसके दिल में विचार डाला, कहने लगा : ऐ आदम! क्या मैं तुम्हें अनंत जीवन का वृक्ष और ऐसा राज्य दिखाऊँ जो कभी पुराना न हो?

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मेरा चिंतन
20:121पृष्ठ 320 · जुज़ 16

فَأَكَلَا مِنْهَا فَبَدَتْ لَهُمَا سَوْءَٰتُهُمَا وَطَفِقَا يَخْصِفَانِ عَلَيْهِمَا مِن وَرَقِ ٱلْجَنَّةِ ۚ وَعَصَىٰٓ ءَادَمُ رَبَّهُۥ فَغَوَىٰ ۝١٢١

अंततः उन दोनों ने उसमें से खा लिया, तो उन दोनों के लिए उनके गुप्तांग प्रकट हो गए और वे दोनों अपने ऊपर जन्नत के पत्ते चिपकाने लगे और आदम ने अपने रब की अवज्ञा की, तो वह भटक गया।

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मेरा चिंतन
20:122पृष्ठ 320 · जुज़ 16

ثُمَّ ٱجْتَبَـٰهُ رَبُّهُۥ فَتَابَ عَلَيْهِ وَهَدَىٰ ۝١٢٢

फिर उसके रब ने उसे चुन लिया, तो उसकी तौबा क़बूल कर ली और उसे मार्गदर्शन प्रदान किया।

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मेरा चिंतन
20:123पृष्ठ 320 · जुज़ 16

قَالَ ٱهْبِطَا مِنْهَا جَمِيعًۢا ۖ بَعْضُكُمْ لِبَعْضٍ عَدُوٌّ ۖ فَإِمَّا يَأْتِيَنَّكُم مِّنِّى هُدًى فَمَنِ ٱتَّبَعَ هُدَاىَ فَلَا يَضِلُّ وَلَا يَشْقَىٰ ۝١٢٣

फरमाया : तुम दोनों यहाँ से एक साथ उतर जाओ, तुम एक-दूसरे के शत्रु हो। फिर अगर कभी मेरी ओर से तुम्हारे पास कोई हिदायत आए, तो जो कोई मेरी हिदायत पर चला, तो न वह भटकेगा और न मुसीबत में पड़ेगा।

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मेरा चिंतन
20:124पृष्ठ 320 · जुज़ 16

وَمَنْ أَعْرَضَ عَن ذِكْرِى فَإِنَّ لَهُۥ مَعِيشَةً ضَنكًا وَنَحْشُرُهُۥ يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ أَعْمَىٰ ۝١٢٤

तथा जिसने मेरी नसीहत से मुँह फेरा, तो निःसंदेह उसके लिए तंग[40] जीवन है और हम उसे क़ियामत के दिन अंधा करके उठाएँगे।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[40] अर्थात वह संसार में धनी हो, तब भी उसे संतोष नहीं होगा। और सदा चिंतित और व्याकुल रहेगा।
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मेरा चिंतन
20:125पृष्ठ 320 · जुज़ 16

قَالَ رَبِّ لِمَ حَشَرْتَنِىٓ أَعْمَىٰ وَقَدْ كُنتُ بَصِيرًا ۝١٢٥

वह कहेगा : ऐ मेरे पालनहार! तूने मुझे अंधा करके क्यों उठाया? हालाँकि, मैं तो देखने वाला था।

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मेरा चिंतन
20:126पृष्ठ 321 · जुज़ 16

قَالَ كَذَٰلِكَ أَتَتْكَ ءَايَـٰتُنَا فَنَسِيتَهَا ۖ وَكَذَٰلِكَ ٱلْيَوْمَ تُنسَىٰ ۝١٢٦

(अल्लाह) फरमाएगा : इसी प्रकार तेरे पास हमारी आयतें आईं, तो तू उन्हें भूल गया और इसी प्रकार आज तू भुलाया जाएगा।

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मेरा चिंतन
20:127पृष्ठ 321 · जुज़ 16

وَكَذَٰلِكَ نَجْزِى مَنْ أَسْرَفَ وَلَمْ يُؤْمِنۢ بِـَٔايَـٰتِ رَبِّهِۦ ۚ وَلَعَذَابُ ٱلْـَٔاخِرَةِ أَشَدُّ وَأَبْقَىٰٓ ۝١٢٧

तथा इसी प्रकार हम उस व्यक्ति को बदला देते हैं, जो हद से बढ़ जाए और अपने पालनहार की आयतों पर ईमान न लाए और निश्चय आख़िरत की यातना अधिक कठोर और अधिक स्थायी है।

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मेरा चिंतन
20:128पृष्ठ 321 · जुज़ 16

أَفَلَمْ يَهْدِ لَهُمْ كَمْ أَهْلَكْنَا قَبْلَهُم مِّنَ ٱلْقُرُونِ يَمْشُونَ فِى مَسَـٰكِنِهِمْ ۗ إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَـٰتٍ لِّأُو۟لِى ٱلنُّهَىٰ ۝١٢٨

फिर क्या इस बात ने उन्हें मार्गदर्शन नहीं दिया कि हमने उनसे पहले कितने ही समुदायों को विनष्ट कर दिया, जिनके घरों में वे चलते-फिरते हैं। निःसंदेह इसमें बुद्धियों वालों के लिए निश्चय बहुत-सी निशानियाँ हैं।

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मेरा चिंतन
20:129पृष्ठ 321 · जुज़ 16

وَلَوْلَا كَلِمَةٌ سَبَقَتْ مِن رَّبِّكَ لَكَانَ لِزَامًا وَأَجَلٌ مُّسَمًّى ۝١٢٩

और यदि वह बात न होती जो तुम्हारे पालनहार की ओर से पहले निश्चित हो चुकी और एक नियत समय न होता, तो वही (अगले लोगों का अज़ाब) आवश्यक हो जाता।[41]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[41] आयत का भावार्थ यह है कि अल्लाह का यह निर्णय है कि वह किसी जाति का उसके विरुद्ध तर्क तथा उसकी निश्चित अवधि पूरी होने पर ही विनाश करता है, यदि यह बात न होती तो इन मक्का के मिश्रणवादियों पर यातना आ चुकी होती।
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मेरा चिंतन
20:130पृष्ठ 321 · जुज़ 16

فَٱصْبِرْ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَ وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ قَبْلَ طُلُوعِ ٱلشَّمْسِ وَقَبْلَ غُرُوبِهَا ۖ وَمِنْ ءَانَآئِ ٱلَّيْلِ فَسَبِّحْ وَأَطْرَافَ ٱلنَّهَارِ لَعَلَّكَ تَرْضَىٰ ۝١٣٠

अतः जो कुछ वे कहते हैं, उसपर सब्र करें तथा सूर्य उगने से पहले[42] और उसके डूबने से पहले[43] अपने पालनहार की प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता बयान करें, और रात की कुछ घड़ियों[44] में भी पवित्रता बयान करें, और दिन के किनारों[45] में, ताकि आप प्रसन्न हो जाएँ।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[42] अर्थात फ़ज्र की नमाज में। [43] अर्थात अस्र की नमाज़ में। [44] अर्थात इशा की नमाज़ में। [45] अर्थात ज़ुह्र तथा मग़्रिब की नमाज़ में।
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मेरा चिंतन
20:131पृष्ठ 321 · जुज़ 16

وَلَا تَمُدَّنَّ عَيْنَيْكَ إِلَىٰ مَا مَتَّعْنَا بِهِۦٓ أَزْوَٰجًا مِّنْهُمْ زَهْرَةَ ٱلْحَيَوٰةِ ٱلدُّنْيَا لِنَفْتِنَهُمْ فِيهِ ۚ وَرِزْقُ رَبِّكَ خَيْرٌ وَأَبْقَىٰ ۝١٣١

और अपनी आँखों को उन चीज़ों की ओर कदापि न उठाएँ जो हमने उनके[46] विभिन्न प्रकार के लोगों को सांसारिक जीवन के लिए आभूषण के रूप में उपयोग करने के लिए दी हैं, ताकि हम उसमें उनकी परीक्षा लें, और आपके पालनहार का दिया[47] हुआ सबसे अच्छा और सबसे अधिक स्थायी है।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[46] अर्थात मिश्रणवादियों के। [47] अर्थात प्रलोक का प्रतिफल।
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मेरा चिंतन
20:132पृष्ठ 321 · जुज़ 16

وَأْمُرْ أَهْلَكَ بِٱلصَّلَوٰةِ وَٱصْطَبِرْ عَلَيْهَا ۖ لَا نَسْـَٔلُكَ رِزْقًا ۖ نَّحْنُ نَرْزُقُكَ ۗ وَٱلْعَـٰقِبَةُ لِلتَّقْوَىٰ ۝١٣٢

और आप अपने घरवालों को नमाज़ का आदेश दें और स्वयं भी उसपर स्थित रहें, हम आपसे कोई जीविका नहीं माँगते, हम ही आपको जीविका प्रदान करते हैं और अच्छा परिणाम परहेज़गारी का है।

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मेरा चिंतन
20:133पृष्ठ 321 · जुज़ 16

وَقَالُوا۟ لَوْلَا يَأْتِينَا بِـَٔايَةٍ مِّن رَّبِّهِۦٓ ۚ أَوَلَمْ تَأْتِهِم بَيِّنَةُ مَا فِى ٱلصُّحُفِ ٱلْأُولَىٰ ۝١٣٣

तथा उन्होंने कहा : यह हमारे पास अपने रब की ओर से कोई निशानी क्यों नहीं लाता? और क्या उनके पास वह स्पष्ट प्रमाण नहीं आया जो पहली किताबों में है?

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मेरा चिंतन
20:134पृष्ठ 321 · जुज़ 16

وَلَوْ أَنَّآ أَهْلَكْنَـٰهُم بِعَذَابٍ مِّن قَبْلِهِۦ لَقَالُوا۟ رَبَّنَا لَوْلَآ أَرْسَلْتَ إِلَيْنَا رَسُولًا فَنَتَّبِعَ ءَايَـٰتِكَ مِن قَبْلِ أَن نَّذِلَّ وَنَخْزَىٰ ۝١٣٤

और यदि हम वास्तव में उन्हें इससे पहले किसी अज़ाब से विनष्ट कर देते, तो ये लोग अवश्य कहते : ऐ हमारे रब! तूने हमारी ओर कोई रसूल क्यों नहीं भेजा कि हम तेरी आयतों की पैरवी करते, इससे[48] पहले कि हम ज़लील और रुसवा हों?

अनुवाद टिप्पणियाँ
[48] अर्थात नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम और क़ुरआन के आने से पहले।
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मेरा चिंतन
20:135पृष्ठ 321 · जुज़ 16

قُلْ كُلٌّ مُّتَرَبِّصٌ فَتَرَبَّصُوا۟ ۖ فَسَتَعْلَمُونَ مَنْ أَصْحَـٰبُ ٱلصِّرَٰطِ ٱلسَّوِىِّ وَمَنِ ٱهْتَدَىٰ ۝١٣٥

आप कह दें : हर एक प्रतीक्षारत है। अतः तुम (भी) प्रतीक्षा करो। फिर शीघ्र ही तुम जान लोगे कि सीधे मार्ग वाले कौन हैं और कौन है जिसे मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

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मूल अरबी: Tanzil Uthmani v1.1. अर्थों का अनुवाद: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari · QuranEnc.com · v1.1.5.

सभी 6,236 आयत संदर्भों को स्रोत से मिलाकर जाँचा गया है। यह तकनीकी अखंडता जाँच है, स्वतंत्र विद्वत समीक्षा नहीं। आरंभ की बिस्मिल्लाहें उसी रूप में सुरक्षित रखी गई हैं जिस रूप में मिली थीं।

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अनुवाद स्रोत

Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
Translated by Azizul Haq Al-Omari.
स्रोत संस्करण: 1.1.5 · 2025-08-05

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