सूरह 19 · 98 आयतें · मक्की

Maryam

मरयम

مريم
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19:1पृष्ठ 305 · जुज़ 16

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ كٓهيعٓصٓ ۝١

काफ़, हा, या, ऐन, स़ाद।

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मेरा चिंतन
19:2पृष्ठ 305 · जुज़ 16

ذِكْرُ رَحْمَتِ رَبِّكَ عَبْدَهُۥ زَكَرِيَّآ ۝٢

(यह) आपके पालनहार की अपने बंदे ज़करिय्या पर दया की चर्चा है।

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मेरा चिंतन
19:3पृष्ठ 305 · जुज़ 16

إِذْ نَادَىٰ رَبَّهُۥ نِدَآءً خَفِيًّا ۝٣

जब उसने अपने पालनहार को गुप्त स्वर में पुकारा।

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मेरा चिंतन
19:4पृष्ठ 305 · जुज़ 16

قَالَ رَبِّ إِنِّى وَهَنَ ٱلْعَظْمُ مِنِّى وَٱشْتَعَلَ ٱلرَّأْسُ شَيْبًا وَلَمْ أَكُنۢ بِدُعَآئِكَ رَبِّ شَقِيًّا ۝٤

उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! निश्चय मेरी हड्डियाँ कमज़ोर हो गईं और सिर बुढ़ापे से सफेद[1] हो गया, तथा ऐ मेरे पालनहार! मैं तुझे पुकारकर कभी असफल नहीं हुआ।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[1] अर्थात पूरे बाल सफ़ेद हो गए।
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मेरा चिंतन
19:5पृष्ठ 305 · जुज़ 16

وَإِنِّى خِفْتُ ٱلْمَوَٰلِىَ مِن وَرَآءِى وَكَانَتِ ٱمْرَأَتِى عَاقِرًا فَهَبْ لِى مِن لَّدُنكَ وَلِيًّا ۝٥

और निःसंदेह मैं अपने पीछे रिश्तेदारों से डरता हूँ, और मेरी पत्नी आरंभ से बाँझ है, अतः मुझे अपनी ओर से एक उत्तराधिकारी प्रदान कर दे।

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मेरा चिंतन
19:6पृष्ठ 305 · जुज़ 16

يَرِثُنِى وَيَرِثُ مِنْ ءَالِ يَعْقُوبَ ۖ وَٱجْعَلْهُ رَبِّ رَضِيًّا ۝٦

जो मेरा उत्तराधिकारी हो तथा याक़ूब के वंश का उत्तराधिकारी[2] हो और ऐ मेरे पालनहार! उसे पसंदीदा बना दे।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[2] अर्थात नबी हो। आदरणीय ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) याक़ूब (अलैहिस्सलाम) के वंश में थे।
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मेरा चिंतन
19:7पृष्ठ 305 · जुज़ 16

يَـٰزَكَرِيَّآ إِنَّا نُبَشِّرُكَ بِغُلَـٰمٍ ٱسْمُهُۥ يَحْيَىٰ لَمْ نَجْعَل لَّهُۥ مِن قَبْلُ سَمِيًّا ۝٧

ऐ ज़करिय्या! निःसंदेह हम तुझे एक बालक की शुभ सूचना देते हैं, जिसका नाम यह़्या है। हमने इससे पहले उसका कोई समनाम नहीं बनाया।

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मेरा चिंतन
19:8पृष्ठ 305 · जुज़ 16

قَالَ رَبِّ أَنَّىٰ يَكُونُ لِى غُلَـٰمٌ وَكَانَتِ ٱمْرَأَتِى عَاقِرًا وَقَدْ بَلَغْتُ مِنَ ٱلْكِبَرِ عِتِيًّا ۝٨

उसने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरे यहाँ बालक कैसे होगा, जबकि मेरी पत्नी शुरू से बाँझ है और मैं बुढ़ापे की अंतिम सीमा को पहुँच गया हूँ।

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मेरा चिंतन
19:9पृष्ठ 305 · जुज़ 16

قَالَ كَذَٰلِكَ قَالَ رَبُّكَ هُوَ عَلَىَّ هَيِّنٌ وَقَدْ خَلَقْتُكَ مِن قَبْلُ وَلَمْ تَكُ شَيْـًٔا ۝٩

उसने कहा : ऐसा ही है, तेरे पालनहार ने कहा है : यह मेरे लिए सरल है, और निश्चय मैंने तुझे इससे पहले पैदा किया, जबकि तू कुछ भी नहीं था।

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मेरा चिंतन
19:10पृष्ठ 305 · जुज़ 16

قَالَ رَبِّ ٱجْعَل لِّىٓ ءَايَةً ۚ قَالَ ءَايَتُكَ أَلَّا تُكَلِّمَ ٱلنَّاسَ ثَلَـٰثَ لَيَالٍ سَوِيًّا ۝١٠

उस (ज़करिय्या) ने कहा : ऐ मेरे पालनहार! मेरे लिए कोई निशानी निर्धारित कर दे। (अल्लाह ने) फरमाया : तेरी निशानी यह है कि तू स्वस्थ होते हुए लोगों से तीन रातों तक बात नहीं करेगा।[3]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[3] रात से अभिप्राय दिन तथा रात दोनों ही हैं। अर्थात जब बिना किसी रोग के लोगों से बात नहीं कर सकोगे तो यह शुभ सूचना की निशानी होगी।
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मेरा चिंतन
19:11पृष्ठ 305 · जुज़ 16

فَخَرَجَ عَلَىٰ قَوْمِهِۦ مِنَ ٱلْمِحْرَابِ فَأَوْحَىٰٓ إِلَيْهِمْ أَن سَبِّحُوا۟ بُكْرَةً وَعَشِيًّا ۝١١

फिर वह उपासना-गृह से निकलकर अपनी जाति के पास आया और उन्हें संकेत द्वारा आदेश दिया कि सुबह और शाम (अल्लाह की) पवित्रता का वर्णन करो।

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मेरा चिंतन
19:12पृष्ठ 306 · जुज़ 16

يَـٰيَحْيَىٰ خُذِ ٱلْكِتَـٰبَ بِقُوَّةٍ ۖ وَءَاتَيْنَـٰهُ ٱلْحُكْمَ صَبِيًّا ۝١٢

ऐ यह़्या[4]! इस पुस्तक (तौरात) को मज़बूती से थाम लो। और हमने उसे बचपन ही में निर्णय-शक्ति प्रदान की।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[4] अर्थात जब यह़्या का जन्म हो गया और कुछ बड़े हुए, तो अल्लाह ने उन्हें तौरात का ज्ञान दिया।
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मेरा चिंतन
19:13पृष्ठ 306 · जुज़ 16

وَحَنَانًا مِّن لَّدُنَّا وَزَكَوٰةً ۖ وَكَانَ تَقِيًّا ۝١٣

तथा अपनी ओर से दया तथा पवित्रता (प्रदान की) और वह बड़ा संयमी (परहेज़गार) था।

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मेरा चिंतन
19:14पृष्ठ 306 · जुज़ 16

وَبَرًّۢا بِوَٰلِدَيْهِ وَلَمْ يَكُن جَبَّارًا عَصِيًّا ۝١٤

तथा अपने माता-पिता के साथ सुशील था। तथा वह क्रूर और अवज्ञाकारी नहीं था।

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मेरा चिंतन
19:15पृष्ठ 306 · जुज़ 16

وَسَلَـٰمٌ عَلَيْهِ يَوْمَ وُلِدَ وَيَوْمَ يَمُوتُ وَيَوْمَ يُبْعَثُ حَيًّا ۝١٥

और उसपर सलामती हो जिस दिन वह पैदा हुआ और जिस दिन वह मरेगा और जिस दिन वह जीवित करके उठाया जाएगा।

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मेरा चिंतन
19:16पृष्ठ 306 · जुज़ 16

وَٱذْكُرْ فِى ٱلْكِتَـٰبِ مَرْيَمَ إِذِ ٱنتَبَذَتْ مِنْ أَهْلِهَا مَكَانًا شَرْقِيًّا ۝١٦

तथा इस किताब में मरयम[5] की चर्चा करें, जब वह अपने घरवालों से एक स्थान पर अलग हो गईं जो (उनसे) पूरब की ओर था।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[5] मरयम आदरणीय इमरान की पुत्री, दाऊद अलैहिस्सलाम के वंश से थीं। उनके जन्म के विषय में सूरत आले इमरान देखिए।
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मेरा चिंतन
19:17पृष्ठ 306 · जुज़ 16

فَٱتَّخَذَتْ مِن دُونِهِمْ حِجَابًا فَأَرْسَلْنَآ إِلَيْهَا رُوحَنَا فَتَمَثَّلَ لَهَا بَشَرًا سَوِيًّا ۝١٧

फिर उसने उनकी ओर से एक परदा बना लिया, तो हमने उसकी ओर अपनी रूह़ (विशेष फ़रिश्ता)[6] को भेजा, तो उसने उसके लिए एक पूरे मनुष्य का रूप धारण कर लिया।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[6] इससे अभिप्रेत फ़रिश्ता जिबरील (अलैहिस्सलाम) हैं।
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मेरा चिंतन
19:18पृष्ठ 306 · जुज़ 16

قَالَتْ إِنِّىٓ أَعُوذُ بِٱلرَّحْمَـٰنِ مِنكَ إِن كُنتَ تَقِيًّا ۝١٨

उसने कहा : निःसंदेह मैं तुझसे रहमान (परम दयावान्) की शरण माँगती हूँ, यदि तू डर रखने वाला है।

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मेरा चिंतन
19:19पृष्ठ 306 · जुज़ 16

قَالَ إِنَّمَآ أَنَا۠ رَسُولُ رَبِّكِ لِأَهَبَ لَكِ غُلَـٰمًا زَكِيًّا ۝١٩

उसने कहा : मैं तेरे पालनहार का भेजा हुआ हूँ, ताकि तुझे एक पवित्र लड़का प्रदान करूँ।

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मेरा चिंतन
19:20पृष्ठ 306 · जुज़ 16

قَالَتْ أَنَّىٰ يَكُونُ لِى غُلَـٰمٌ وَلَمْ يَمْسَسْنِى بَشَرٌ وَلَمْ أَكُ بَغِيًّا ۝٢٠

वह बोली : मुझे लड़का कैसे हो सकता है, जबकि किसी पुरुष ने मुझे छुआ तक नहीं है और न मैं कभी व्यभिचारिणी थी।

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मेरा चिंतन
19:21पृष्ठ 306 · जुज़ 16

قَالَ كَذَٰلِكِ قَالَ رَبُّكِ هُوَ عَلَىَّ هَيِّنٌ ۖ وَلِنَجْعَلَهُۥٓ ءَايَةً لِّلنَّاسِ وَرَحْمَةً مِّنَّا ۚ وَكَانَ أَمْرًا مَّقْضِيًّا ۝٢١

उसने कहा : ऐसा ही है, तेरे पालनहार ने कहा है कि यह मेरे लिए आसान है और ताकि हम इसे लोगों के लिए एक निशानी[7] और अपनी ओर से रहमत बनाएँ और यह एक पूर्वनियत कार्य है।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[7] अर्थात अपने सामर्थ्य की निशानी, कि हम नर-नारी के योग के बिना भी स्त्री के गर्भ से शिशु की उत्पत्ति कर सकते हैं।
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मेरा चिंतन
19:22पृष्ठ 306 · जुज़ 16

۞ فَحَمَلَتْهُ فَٱنتَبَذَتْ بِهِۦ مَكَانًا قَصِيًّا ۝٢٢

फिर वह उस (लड़के) के साथ गर्भवती हो गई, तो उसे लेकर एक दूर स्थान पर अलग चली गई।

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मेरा चिंतन
19:23पृष्ठ 306 · जुज़ 16

فَأَجَآءَهَا ٱلْمَخَاضُ إِلَىٰ جِذْعِ ٱلنَّخْلَةِ قَالَتْ يَـٰلَيْتَنِى مِتُّ قَبْلَ هَـٰذَا وَكُنتُ نَسْيًا مَّنسِيًّا ۝٢٣

फिर प्रसव पीड़ा उसे खजूर के एक तने के पास ले लाई, कहने लगी : ऐ काश! मैं इससे पहले मर जाती और भूली-बिसरी होती।

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मेरा चिंतन
19:24पृष्ठ 306 · जुज़ 16

فَنَادَىٰهَا مِن تَحْتِهَآ أَلَّا تَحْزَنِى قَدْ جَعَلَ رَبُّكِ تَحْتَكِ سَرِيًّا ۝٢٤

तो उसने उसके नीचे से पुकारा[8] कि शोकाकुल न हो, तेरे पालनहार ने तेरे नीचे[9] एक नदी (प्रवाह) कर दी है।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[8] अर्थात जिबरील फ़रिश्ते ने घाटी के नीचे से आवाज़ दी। दूसरा कथन है कि ईसा अलैहिस्सलाम ने नीचे से आवाज़ दी। [9] अर्थात मरयम के चरणों के नीचे।
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मेरा चिंतन
19:25पृष्ठ 306 · जुज़ 16

وَهُزِّىٓ إِلَيْكِ بِجِذْعِ ٱلنَّخْلَةِ تُسَـٰقِطْ عَلَيْكِ رُطَبًا جَنِيًّا ۝٢٥

और खजूर के तने को अपनी ओर हिला, वह तुझपर ताज़ा पकी हुई खजूरें गिराएगा।[10]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[10] अल्लाह ने अस्वाभाविक रूप से आदरणीय मरयम के लिए, खाने-पीने की व्यवस्था कर दी।
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मेरा चिंतन
19:26पृष्ठ 307 · जुज़ 16

فَكُلِى وَٱشْرَبِى وَقَرِّى عَيْنًا ۖ فَإِمَّا تَرَيِنَّ مِنَ ٱلْبَشَرِ أَحَدًا فَقُولِىٓ إِنِّى نَذَرْتُ لِلرَّحْمَـٰنِ صَوْمًا فَلَنْ أُكَلِّمَ ٱلْيَوْمَ إِنسِيًّا ۝٢٦

अतः खा और पी और आँख ठंडी कर। फिर यदि तू किसी आदमी को देखे, तो कह दे : मैंने तो रहमान के लिए रोज़े की मन्नत मानी है। अतः आज मैं कदापि किसी मनुष्य से बात नहीं करूँगी।

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मेरा चिंतन
19:27पृष्ठ 307 · जुज़ 16

فَأَتَتْ بِهِۦ قَوْمَهَا تَحْمِلُهُۥ ۖ قَالُوا۟ يَـٰمَرْيَمُ لَقَدْ جِئْتِ شَيْـًٔا فَرِيًّا ۝٢٧

फिर वह उसे उठाए हुए अपनी जाति के पास ले आई, उन्होंने कहा : ऐ मरयम! तूने बहुत बुरा काम किया है।

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मेरा चिंतन
19:28पृष्ठ 307 · जुज़ 16

يَـٰٓأُخْتَ هَـٰرُونَ مَا كَانَ أَبُوكِ ٱمْرَأَ سَوْءٍ وَمَا كَانَتْ أُمُّكِ بَغِيًّا ۝٢٨

ऐ हारून की बहन! न तेरा पिता कोई बुरा व्यक्ति था और न तेरी माँ कोई व्यभिचारिणी थी।

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मेरा चिंतन
19:29पृष्ठ 307 · जुज़ 16

فَأَشَارَتْ إِلَيْهِ ۖ قَالُوا۟ كَيْفَ نُكَلِّمُ مَن كَانَ فِى ٱلْمَهْدِ صَبِيًّا ۝٢٩

तो उसने उस (शिशु) की ओर संकेत किया। उन्होंने कहा : हम उससे कैसे बात करें, जो अभी तक गोद में बच्चा है?

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मेरा चिंतन
19:30पृष्ठ 307 · जुज़ 16

قَالَ إِنِّى عَبْدُ ٱللَّهِ ءَاتَىٰنِىَ ٱلْكِتَـٰبَ وَجَعَلَنِى نَبِيًّا ۝٣٠

वह (शिशु) बोल पड़ा : निःसंदेह मैं अल्लाह का बंदा हूँ। उसने मुझे पुस्तक (इन्जील) प्रदान की तथा मुझे नबी बनाया है।[11]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[11] अर्थात मुझे पुस्तक प्रदान करने और नबी बनाने का निर्णय कर दिया है।
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मेरा चिंतन
19:31पृष्ठ 307 · जुज़ 16

وَجَعَلَنِى مُبَارَكًا أَيْنَ مَا كُنتُ وَأَوْصَـٰنِى بِٱلصَّلَوٰةِ وَٱلزَّكَوٰةِ مَا دُمْتُ حَيًّا ۝٣١

तथा मुझे बरकत वाला बनाया है, जहाँ भी मैं रहूँ और मुझे नमाज़ तथा ज़कात का आदेश दिया है, जब तक मैं जीवित रहूँ।

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मेरा चिंतन
19:32पृष्ठ 307 · जुज़ 16

وَبَرًّۢا بِوَٰلِدَتِى وَلَمْ يَجْعَلْنِى جَبَّارًا شَقِيًّا ۝٣٢

तथा आपनी माँ के साथ अच्छा व्यवहार करने वाला (बनाया) और उसने मुझे क्रूर तथा अभागा[12] नहीं बनाया।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[12] इसमें यह संकेत है कि माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार करना क्रूरता तथा दुर्भाग्य है।
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मेरा चिंतन
19:33पृष्ठ 307 · जुज़ 16

وَٱلسَّلَـٰمُ عَلَىَّ يَوْمَ وُلِدتُّ وَيَوْمَ أَمُوتُ وَيَوْمَ أُبْعَثُ حَيًّا ۝٣٣

तथा सलामती है मुझपर, जिस दिन मैं पैदा हुआ और जिस दिन मैं मरूँगा और जिस दिन मैं जीवित करके उठाया जाऊँगा।

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मेरा चिंतन
19:34पृष्ठ 307 · जुज़ 16

ذَٰلِكَ عِيسَى ٱبْنُ مَرْيَمَ ۚ قَوْلَ ٱلْحَقِّ ٱلَّذِى فِيهِ يَمْتَرُونَ ۝٣٤

यह है ईसा बिन मरयम। यही सत्य बात है, जिसमें वे संदेह कर रहे हैं।

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मेरा चिंतन
19:35पृष्ठ 307 · जुज़ 16

مَا كَانَ لِلَّهِ أَن يَتَّخِذَ مِن وَلَدٍ ۖ سُبْحَـٰنَهُۥٓ ۚ إِذَا قَضَىٰٓ أَمْرًا فَإِنَّمَا يَقُولُ لَهُۥ كُن فَيَكُونُ ۝٣٥

अल्लाह के योग्य नहीं है कि वह कोई संतान बनाए। वह पवित्र है! जब वह किसी कार्य का निर्णय करता है, तो उससे केवल यह कहता है कि "हो जा", तो वह हो जाता है।

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मेरा चिंतन
19:36पृष्ठ 307 · जुज़ 16

وَإِنَّ ٱللَّهَ رَبِّى وَرَبُّكُمْ فَٱعْبُدُوهُ ۚ هَـٰذَا صِرَٰطٌ مُّسْتَقِيمٌ ۝٣٦

और निःसंदेह अल्लाह ही मेरा पालनहार और तुम्हारा पालनहार है, अतः उसी की इबादत करो, यही सीधा रास्ता है।

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मेरा चिंतन
19:37पृष्ठ 307 · जुज़ 16

فَٱخْتَلَفَ ٱلْأَحْزَابُ مِنۢ بَيْنِهِمْ ۖ فَوَيْلٌ لِّلَّذِينَ كَفَرُوا۟ مِن مَّشْهَدِ يَوْمٍ عَظِيمٍ ۝٣٧

फिर इन गिरोहों[13] ने आपस में मतभेद कर लिया, तो उन लोगों के लिए जिन्होंने कुफ़्र किया, एक बड़े दिन की उपस्थिति के कारण बड़ा विनाश है।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[13] अर्थात अह्ले किताब के गिरोहों ने ईसा अलैहिस्सलाम की वास्तविकता जानने के पश्चात् उनके विषय में मतभेद किया। यहूदियों ने उसे जादूगर तथा वर्णसंकर (व्यभिचार से उत्पन्न व्यक्ति) कहा। और ईसाइयों के एक गिरोह ने कहा कि वह स्वयं अल्लाह है। दूसरे ने कहा : वह अल्लाह का पुत्र है। और उनके तीसरे कैथुलिक गिरोह ने कहा कि वह तीन में का तीसरा है। बड़े दिन से अभिप्राय प्रलय का दिन है।
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मेरा चिंतन
19:38पृष्ठ 307 · जुज़ 16

أَسْمِعْ بِهِمْ وَأَبْصِرْ يَوْمَ يَأْتُونَنَا ۖ لَـٰكِنِ ٱلظَّـٰلِمُونَ ٱلْيَوْمَ فِى ضَلَـٰلٍ مُّبِينٍ ۝٣٨

वे कितने सुनने वाले होंगे और कितने देखने वाले होंगे! जिस दिन वे हमारे पास आएँगे, किंतु अत्याचारी लोग आज खुली गुमराही में हैं।

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मेरा चिंतन
19:39पृष्ठ 308 · जुज़ 16

وَأَنذِرْهُمْ يَوْمَ ٱلْحَسْرَةِ إِذْ قُضِىَ ٱلْأَمْرُ وَهُمْ فِى غَفْلَةٍ وَهُمْ لَا يُؤْمِنُونَ ۝٣٩

और (ऐ नबी!) आप उन्हें पछतावे के दिन से डराएँ, जब हर काम का फैसला[14] कर दिया जाएगा, और वे पूरी तरह से ग़फ़लत में हैं और वे ईमान नहीं लाते।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[14] अर्थात प्रत्येक के कर्मानुसार उसके लिए नरक अथवा स्वर्ग का निर्णय कर दिया जाएगा। फिर मौत को एक भेड़ के रूप में वध कर दिया जाएगा। तथा घोषणा कर दी जाएगी कि ऐ स्वर्गियो! तुम्हें सदा रहना है, और अब मौत नहीं है। और हे नारकियो! तुम्हें सदा नरक में रहना है, अब मौत नहीं है। (सह़ीह़ बुख़ारी, ह़दीस संख्या : 4730)
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मेरा चिंतन
19:40पृष्ठ 308 · जुज़ 16

إِنَّا نَحْنُ نَرِثُ ٱلْأَرْضَ وَمَنْ عَلَيْهَا وَإِلَيْنَا يُرْجَعُونَ ۝٤٠

निःसंदेह हम ही धरती के उत्तराधिकारी होंगे और उनके भी जो उसपर हैं और वे हमारी ही ओर लौटाए जाएँगे।

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मेरा चिंतन
19:41पृष्ठ 308 · जुज़ 16

وَٱذْكُرْ فِى ٱلْكِتَـٰبِ إِبْرَٰهِيمَ ۚ إِنَّهُۥ كَانَ صِدِّيقًا نَّبِيًّا ۝٤١

तथा इस किताब में इबराहीम की चर्चा करें, निःसंदेह वह बहुत सच्चा (और) नबी था।

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मेरा चिंतन
19:42पृष्ठ 308 · जुज़ 16

إِذْ قَالَ لِأَبِيهِ يَـٰٓأَبَتِ لِمَ تَعْبُدُ مَا لَا يَسْمَعُ وَلَا يُبْصِرُ وَلَا يُغْنِى عَنكَ شَيْـًٔا ۝٤٢

जब उसने अपने पिता से कहा : ऐ मेरे पिता! आप उस चीज़ को क्यों पूजते हैं, जो न सुनती है और न देखती है और न आपके किसी काम आती है?

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मेरा चिंतन
19:43पृष्ठ 308 · जुज़ 16

يَـٰٓأَبَتِ إِنِّى قَدْ جَآءَنِى مِنَ ٱلْعِلْمِ مَا لَمْ يَأْتِكَ فَٱتَّبِعْنِىٓ أَهْدِكَ صِرَٰطًا سَوِيًّا ۝٤٣

ऐ मेरे पिता! निःसंदेह मेरे पास वह ज्ञान आया है, जो आपके पास नहीं आया, अतः आप मेरा अनुसरण करें, मैं आपको सीधा मार्ग दिखाऊँगा।

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मेरा चिंतन
19:44पृष्ठ 308 · जुज़ 16

يَـٰٓأَبَتِ لَا تَعْبُدِ ٱلشَّيْطَـٰنَ ۖ إِنَّ ٱلشَّيْطَـٰنَ كَانَ لِلرَّحْمَـٰنِ عَصِيًّا ۝٤٤

ऐ मेरे पिता! शैतान की पूजा न करें। निःसंदेह शैतान हमेशा से रहमान (परम दयालु अल्लाह) का अवज्ञाकारी है।

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मेरा चिंतन
19:45पृष्ठ 308 · जुज़ 16

يَـٰٓأَبَتِ إِنِّىٓ أَخَافُ أَن يَمَسَّكَ عَذَابٌ مِّنَ ٱلرَّحْمَـٰنِ فَتَكُونَ لِلشَّيْطَـٰنِ وَلِيًّا ۝٤٥

ऐ मेरे पिता! वास्तव में, मुझे डर है कि आपको रहमान (परम दयालु) की ओर से कोई यातना आ लगे, फिर आप शैतान के मित्र हो जाएँगे।

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मेरा चिंतन
19:46पृष्ठ 308 · जुज़ 16

قَالَ أَرَاغِبٌ أَنتَ عَنْ ءَالِهَتِى يَـٰٓإِبْرَٰهِيمُ ۖ لَئِن لَّمْ تَنتَهِ لَأَرْجُمَنَّكَ ۖ وَٱهْجُرْنِى مَلِيًّا ۝٤٦

उसने कहा : क्या तू हमारे पूज्यों से विमुख हो रहा है, ऐ इबराहीम!? निश्चय यदि तू बाज़ न आया, तो मैं अवश्य ही तुझे संगसार कर दूँगा और तू लंबे समय के लिए मुझसे अलग हो जा।

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मेरा चिंतन
19:47पृष्ठ 308 · जुज़ 16

قَالَ سَلَـٰمٌ عَلَيْكَ ۖ سَأَسْتَغْفِرُ لَكَ رَبِّىٓ ۖ إِنَّهُۥ كَانَ بِى حَفِيًّا ۝٤٧

(इबराहीम ने) कहा : आपपर सलाम हो! मैं अपने पालनहार से आपके लिए अवश्य क्षमा की प्रार्थना करूँगा। निःसंदेह वह हमेशा से मुझपर बहुत दयालु है।

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मेरा चिंतन
19:48पृष्ठ 308 · जुज़ 16

وَأَعْتَزِلُكُمْ وَمَا تَدْعُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ وَأَدْعُوا۟ رَبِّى عَسَىٰٓ أَلَّآ أَكُونَ بِدُعَآءِ رَبِّى شَقِيًّا ۝٤٨

तथा मैं आप लोगों से और उन चीज़ों से जिन्हें आप लोग अल्लाह के सिवा पुकारते हैं, किनारा करता हूँ और अपने पालनहार को पुकारता हूँ। आशा है कि मैं अपने रब को पुकारकर असफल नहीं रहूँगा।

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मेरा चिंतन
19:49पृष्ठ 308 · जुज़ 16

فَلَمَّا ٱعْتَزَلَهُمْ وَمَا يَعْبُدُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ وَهَبْنَا لَهُۥٓ إِسْحَـٰقَ وَيَعْقُوبَ ۖ وَكُلًّا جَعَلْنَا نَبِيًّا ۝٤٩

फिर जब वह उनसे और उन चीज़ों से जिनकी वे अल्लाह के सिवा पूजा करते थे, अलग हो गया, तो हमने उसे इसहाक़ और याक़ूब प्रदान किए और हर एक को हमने नबी बनाया।

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मेरा चिंतन
19:50पृष्ठ 308 · जुज़ 16

وَوَهَبْنَا لَهُم مِّن رَّحْمَتِنَا وَجَعَلْنَا لَهُمْ لِسَانَ صِدْقٍ عَلِيًّا ۝٥٠

तथा हमने उन्हें अपनी रहमत से हिस्सा दिया और उन्हें बहुत ऊँची, सच्ची ख्याति प्रदान की।

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मेरा चिंतन
19:51पृष्ठ 308 · जुज़ 16

وَٱذْكُرْ فِى ٱلْكِتَـٰبِ مُوسَىٰٓ ۚ إِنَّهُۥ كَانَ مُخْلَصًا وَكَانَ رَسُولًا نَّبِيًّا ۝٥١

और आप इस पुस्तक में मूसा की चर्चा करें। निश्चय वह चुना हुआ था तथा रसूल एवं नबी था।

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मेरा चिंतन
19:52पृष्ठ 309 · जुज़ 16

وَنَـٰدَيْنَـٰهُ مِن جَانِبِ ٱلطُّورِ ٱلْأَيْمَنِ وَقَرَّبْنَـٰهُ نَجِيًّا ۝٥٢

और हमने उसे पहाड़ की दाहिनी ओर से पुकारा तथा सरगोशी करते हुए उसे समीप कर लिया।

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मेरा चिंतन
19:53पृष्ठ 309 · जुज़ 16

وَوَهَبْنَا لَهُۥ مِن رَّحْمَتِنَآ أَخَاهُ هَـٰرُونَ نَبِيًّا ۝٥٣

और हमने उसे अपनी दया से उसके भाई हारून को नबी बनाकर प्रदान किया।

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मेरा चिंतन
19:54पृष्ठ 309 · जुज़ 16

وَٱذْكُرْ فِى ٱلْكِتَـٰبِ إِسْمَـٰعِيلَ ۚ إِنَّهُۥ كَانَ صَادِقَ ٱلْوَعْدِ وَكَانَ رَسُولًا نَّبِيًّا ۝٥٤

तथा इस किताब में इसमाईल[15] की चर्चा करें। निश्चय वह वादे का सच्चा तथा रसूल एवं नबी था।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[15] आप इबराहीम अलैहिस्सलाम के बड़े पुत्र थे, इन्हीं से अरबों का वंश चला और आप ही के वंश से अंतिम नबी मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) नबी बनाकर भेजे गए।
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मेरा चिंतन
19:55पृष्ठ 309 · जुज़ 16

وَكَانَ يَأْمُرُ أَهْلَهُۥ بِٱلصَّلَوٰةِ وَٱلزَّكَوٰةِ وَكَانَ عِندَ رَبِّهِۦ مَرْضِيًّا ۝٥٥

और वह अपने घरवालों को नमाज़ और ज़कात का आदेश देता था और वह अपने पालनहार के निकट पसंदीदा था।

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मेरा चिंतन
19:56पृष्ठ 309 · जुज़ 16

وَٱذْكُرْ فِى ٱلْكِتَـٰبِ إِدْرِيسَ ۚ إِنَّهُۥ كَانَ صِدِّيقًا نَّبِيًّا ۝٥٦

तथा इस किताब में इदरीस की चर्चा करें। निःसंदेह वह बड़ा सत्यवादी और नबी था।

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मेरा चिंतन
19:57पृष्ठ 309 · जुज़ 16

وَرَفَعْنَـٰهُ مَكَانًا عَلِيًّا ۝٥٧

तथा हमने उसे बहुत ऊँचे स्थान पर उठाया।

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मेरा चिंतन
19:58पृष्ठ 309 · जुज़ 16

أُو۟لَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ أَنْعَمَ ٱللَّهُ عَلَيْهِم مِّنَ ٱلنَّبِيِّـۧنَ مِن ذُرِّيَّةِ ءَادَمَ وَمِمَّنْ حَمَلْنَا مَعَ نُوحٍ وَمِن ذُرِّيَّةِ إِبْرَٰهِيمَ وَإِسْرَٰٓءِيلَ وَمِمَّنْ هَدَيْنَا وَٱجْتَبَيْنَآ ۚ إِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ ءَايَـٰتُ ٱلرَّحْمَـٰنِ خَرُّوا۟ سُجَّدًا وَبُكِيًّا ۩ ۝٥٨

ये वे लोग हैं, जिनपर अल्लाह ने अनुग्रह किया नबियों में से, आदम की संतान में से तथा उन लोगों में से जिन्हें हमने नूह़ के साथ सवार किया तथा इबराहीम और इसराईल की संतान में से तथा उन लोगों में से जिन्हें हमने मार्गदर्शन प्रदान किया और चुन लिया। जब उनपर रहमान की आयतें पढ़ी जाती थीं, तो वे सजदा करते और रोते हुए गिर जाते थे।

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मेरा चिंतन
19:59पृष्ठ 309 · जुज़ 16

۞ فَخَلَفَ مِنۢ بَعْدِهِمْ خَلْفٌ أَضَاعُوا۟ ٱلصَّلَوٰةَ وَٱتَّبَعُوا۟ ٱلشَّهَوَٰتِ ۖ فَسَوْفَ يَلْقَوْنَ غَيًّا ۝٥٩

फिर उनके बाद उनके स्थान पर ऐसे अयोग्य उत्तराधिकारी आए, जिन्होंने नमाज़ की उपेक्षा की और अपनी इच्छाओं का पालन किया, तो वे जल्द ही पथभ्रष्टता का सामना करेंगे।

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मेरा चिंतन
19:60पृष्ठ 309 · जुज़ 16

إِلَّا مَن تَابَ وَءَامَنَ وَعَمِلَ صَـٰلِحًا فَأُو۟لَـٰٓئِكَ يَدْخُلُونَ ٱلْجَنَّةَ وَلَا يُظْلَمُونَ شَيْـًٔا ۝٦٠

परंतु जिसने तौबा कर ली और ईमान लाया और अच्छे कर्म किए, तो ये लोग जन्नत में प्रवेश करेंगे और उनपर कुछ भी अत्याचार नहीं किया जाएगा।

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मेरा चिंतन
19:61पृष्ठ 309 · जुज़ 16

جَنَّـٰتِ عَدْنٍ ٱلَّتِى وَعَدَ ٱلرَّحْمَـٰنُ عِبَادَهُۥ بِٱلْغَيْبِ ۚ إِنَّهُۥ كَانَ وَعْدُهُۥ مَأْتِيًّا ۝٦١

सदा निवास के बाग़ो में, जिनका रहमान ने अपने बंदों से (उनके) बिन देखे वादा किया है। निःसंदेह उसका वादा पूरा होकर रहने वाला है।

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मेरा चिंतन
19:62पृष्ठ 309 · जुज़ 16

لَّا يَسْمَعُونَ فِيهَا لَغْوًا إِلَّا سَلَـٰمًا ۖ وَلَهُمْ رِزْقُهُمْ فِيهَا بُكْرَةً وَعَشِيًّا ۝٦٢

वे उसमें 'सलाम' के सिवा कोई व्यर्थ बात नहीं सुनेंगे, तथा उनके लिए उसमें सुबह और शाम उनकी जीविका होगी।

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मेरा चिंतन
19:63पृष्ठ 309 · जुज़ 16

تِلْكَ ٱلْجَنَّةُ ٱلَّتِى نُورِثُ مِنْ عِبَادِنَا مَن كَانَ تَقِيًّا ۝٦٣

यह है वह जन्नत, जिसका वारिस हम अपने बंदों में से उसे बनाते हैं, जो परहेज़गार हो।

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मेरा चिंतन
19:64पृष्ठ 309 · जुज़ 16

وَمَا نَتَنَزَّلُ إِلَّا بِأَمْرِ رَبِّكَ ۖ لَهُۥ مَا بَيْنَ أَيْدِينَا وَمَا خَلْفَنَا وَمَا بَيْنَ ذَٰلِكَ ۚ وَمَا كَانَ رَبُّكَ نَسِيًّا ۝٦٤

और हम[16] नहीं उतरते, परंतु आपके पालनहार के आदेश से, उसी का है जो हमारे आगे है तथा जो हमारे पीछे है और जो इसके बीच है और आपका पालनहार कभी भूलने वाला नहीं है।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[16] ह़दीस के अनुसार एक बार नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने (फ़रिश्ते) जिबरील से कहा कि क्या चीज़ आपको रोक रही है कि आप मुझसे और अधिक मिला करें। इसी पर यह आयत अवतरित हुई। (सह़ीह़ बुख़ारी, ह़दीस संख्या : 4731)
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मेरा चिंतन
19:65पृष्ठ 310 · जुज़ 16

رَّبُّ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا فَٱعْبُدْهُ وَٱصْطَبِرْ لِعِبَـٰدَتِهِۦ ۚ هَلْ تَعْلَمُ لَهُۥ سَمِيًّا ۝٦٥

जो आकाशों और धरती का और उन दोनों के बीच की चीज़ों का पालनहार है। अतः उसी की इबादत करें तथा उसकी इबादत पर पर दृढ़ रहें। क्या आप उसका समकक्ष किसी को जानते हैं?

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मेरा चिंतन
19:66पृष्ठ 310 · जुज़ 16

وَيَقُولُ ٱلْإِنسَـٰنُ أَءِذَا مَا مِتُّ لَسَوْفَ أُخْرَجُ حَيًّا ۝٦٦

तथा मनुष्य कहता है : जब मैं मर गया, तो क्या मैं सचमुच फिर जीवित करके निकाला जाऊँगा?

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मेरा चिंतन
19:67पृष्ठ 310 · जुज़ 16

أَوَلَا يَذْكُرُ ٱلْإِنسَـٰنُ أَنَّا خَلَقْنَـٰهُ مِن قَبْلُ وَلَمْ يَكُ شَيْـًٔا ۝٦٧

और क्या मनुष्य याद नहीं करता कि निःसंदेह हम ही ने उसे इससे पूर्व पैदा किया, जबकि वह कुछ भी नहीं था?

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मेरा चिंतन
19:68पृष्ठ 310 · जुज़ 16

فَوَرَبِّكَ لَنَحْشُرَنَّهُمْ وَٱلشَّيَـٰطِينَ ثُمَّ لَنُحْضِرَنَّهُمْ حَوْلَ جَهَنَّمَ جِثِيًّا ۝٦٨

तो क़सम है आपके पालनहार की! निःसंदेह हम उन्हें और शैतानों को ज़रूर इकट्ठा करेंगे, फिर निःसंदेह हम उन्हें जहन्नम के आसपास घुटनों के बल गिरे हुए ज़रूर उपस्थित करेंगे।

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मेरा चिंतन
19:69पृष्ठ 310 · जुज़ 16

ثُمَّ لَنَنزِعَنَّ مِن كُلِّ شِيعَةٍ أَيُّهُمْ أَشَدُّ عَلَى ٱلرَّحْمَـٰنِ عِتِيًّا ۝٦٩

फिर निश्चय ही हम प्रत्येक गिरोह में से उस व्यक्ति को अवश्य निकालेंगे, जो रहमान (परम दयावान) के प्रति सबसे बढ़कर सरकश है।

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मेरा चिंतन
19:70पृष्ठ 310 · जुज़ 16

ثُمَّ لَنَحْنُ أَعْلَمُ بِٱلَّذِينَ هُمْ أَوْلَىٰ بِهَا صِلِيًّا ۝٧٠

फिर, निश्चित रूप से, हम उन लोगों को अधिक जानने वाले हैं, जो इसमें झोंके जाने के अधिक योग्य हैं।

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मेरा चिंतन
19:71पृष्ठ 310 · जुज़ 16

وَإِن مِّنكُمْ إِلَّا وَارِدُهَا ۚ كَانَ عَلَىٰ رَبِّكَ حَتْمًا مَّقْضِيًّا ۝٧١

और तुममें से जो भी है, उस पर से गुज़रने वाला[17] है। यह एक पूर्वनिर्धारित निर्णय है जिसे पूरा करना आपके पालनहार के ज़िम्मे है।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[17] अर्थात नरक से जिस पर एक पुल बनाया जाएगा। उस पर से सभी ईमान वालों और काफ़िरों को अवश्य गुज़रना होगा। यह और बात है कि ईमान वालों को इससे कोई हानि न पहुँचे। इसकी व्याख्या सह़ीह़ ह़दीसों में वर्णित है।
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मेरा चिंतन
19:72पृष्ठ 310 · जुज़ 16

ثُمَّ نُنَجِّى ٱلَّذِينَ ٱتَّقَوا۟ وَّنَذَرُ ٱلظَّـٰلِمِينَ فِيهَا جِثِيًّا ۝٧٢

फिर हम डरने वालों को बचा लेंगे तथा अत्याचारियों को उसमें मुँह के बल गिरे हुए छोड़ देंगे।

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मेरा चिंतन
19:73पृष्ठ 310 · जुज़ 16

وَإِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ ءَايَـٰتُنَا بَيِّنَـٰتٍ قَالَ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لِلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ أَىُّ ٱلْفَرِيقَيْنِ خَيْرٌ مَّقَامًا وَأَحْسَنُ نَدِيًّا ۝٧٣

तथा जब उनके समक्ष हमारी स्पष्ट आयतें पढ़ी जाती हैं, तो काफ़िर लोग ईमान लाने वालों से कहते हैं कि दोनों गिरोहों में से किसकी स्थिति बेहतर और सभा की दृष्टि से कौन अधिक अच्छा है?

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मेरा चिंतन
19:74पृष्ठ 310 · जुज़ 16

وَكَمْ أَهْلَكْنَا قَبْلَهُم مِّن قَرْنٍ هُمْ أَحْسَنُ أَثَـٰثًا وَرِءْيًا ۝٧٤

और हम इनसे पहले कितनी ही जातियों को नष्ट कर चुके हैं, जो जीवन-साधन और शक्ल-सूरत (वेशभूषा) में कहीं अधिक अच्छी थीं।

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मेरा चिंतन
19:75पृष्ठ 310 · जुज़ 16

قُلْ مَن كَانَ فِى ٱلضَّلَـٰلَةِ فَلْيَمْدُدْ لَهُ ٱلرَّحْمَـٰنُ مَدًّا ۚ حَتَّىٰٓ إِذَا رَأَوْا۟ مَا يُوعَدُونَ إِمَّا ٱلْعَذَابَ وَإِمَّا ٱلسَّاعَةَ فَسَيَعْلَمُونَ مَنْ هُوَ شَرٌّ مَّكَانًا وَأَضْعَفُ جُندًا ۝٧٥

(हे नबी!) आप कह दें कि जो व्यक्ति गुमराही में पड़ा हुआ है, तो रहमान उसे एक अवधि तक मोहलत देता है। यहाँ तक कि जब वे उस चीज़ को देख लेंगे जिसका उनसे वादा किया जाता है; या तो यातना और या क़ियामत, तो वे अवश्य जान लेंगे कि कौन स्थिति में अधिक बुरा और जत्थे की दृष्टि से अधिक कमज़ोर है।

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मेरा चिंतन
19:76पृष्ठ 310 · जुज़ 16

وَيَزِيدُ ٱللَّهُ ٱلَّذِينَ ٱهْتَدَوْا۟ هُدًى ۗ وَٱلْبَـٰقِيَـٰتُ ٱلصَّـٰلِحَـٰتُ خَيْرٌ عِندَ رَبِّكَ ثَوَابًا وَخَيْرٌ مَّرَدًّا ۝٧٦

और अल्लाह हिदायत पाने वालों को हिदायत में आधिक कर देता है और शेष रहने वाली नेकियाँ आपके पालनहार के निकट सवाब की दृष्टि से बेहतर तथा परिणाम की दृष्टि से कहीं अच्छी हैं।

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मेरा चिंतन
19:77पृष्ठ 311 · जुज़ 16

أَفَرَءَيْتَ ٱلَّذِى كَفَرَ بِـَٔايَـٰتِنَا وَقَالَ لَأُوتَيَنَّ مَالًا وَوَلَدًا ۝٧٧

तो क्या (ऐ नबी!) आपने उस व्यक्ति को देखा, जिसने हमारी आयतों का इनकार किया और कहा : मैं अवश्य ही धन तथा संतान दिया जाऊँगा?

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मेरा चिंतन
19:78पृष्ठ 311 · जुज़ 16

أَطَّلَعَ ٱلْغَيْبَ أَمِ ٱتَّخَذَ عِندَ ٱلرَّحْمَـٰنِ عَهْدًا ۝٧٨

क्या उसने परोक्ष को झाँककर देख लिया है, या उसने रहमान से कोई वचन ले रखा है?

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मेरा चिंतन
19:79पृष्ठ 311 · जुज़ 16

كَلَّا ۚ سَنَكْتُبُ مَا يَقُولُ وَنَمُدُّ لَهُۥ مِنَ ٱلْعَذَابِ مَدًّا ۝٧٩

कदापि नहीं! हम अवश्य लिखेंगे, जो कुछ वह कहता है और हम उसके लिए यातना में अत्यधिक वृद्धि कर देंगे।

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मेरा चिंतन
19:80पृष्ठ 311 · जुज़ 16

وَنَرِثُهُۥ مَا يَقُولُ وَيَأْتِينَا فَرْدًا ۝٨٠

और हम उसके वारिस होंगे उन चीज़ों में जो वह कर रहा है और वह अकेला[18] हमारे पास आएगा।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[18] इन आयतों के अवतरित होने का कारण यह बताया गया है कि ख़ब्बाब बिन अरत्त का आस बिन वायल (काफ़िर) पर कुछ ऋण था। जिसे वह माँगने के लिए गए, तो उसने कहा : मैं तुझे उस समय तक नहीं दूँगा जब तक मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ कुफ़्र नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि यह काम तो तू मरकर पुनः जीवित हो जाए, तब भी नहीं करूँगा। उसने कहा : क्या मैं मरने के पश्चात् पुनः जीवित किया जाऊँगा? ख़ब्बाब ने कहा : हाँ। आस ने कहा : वहाँ मुझे धन और संतान मिलेगी, तो तुम्हारा ऋण चुका दूँगा। (सह़ीह़ बुख़ारी, ह़दीस संख्या : 4732)
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मेरा चिंतन
19:81पृष्ठ 311 · जुज़ 16

وَٱتَّخَذُوا۟ مِن دُونِ ٱللَّهِ ءَالِهَةً لِّيَكُونُوا۟ لَهُمْ عِزًّا ۝٨١

तथा उन्होंने अल्लाह के सिवा अन्य पूज्य बना लिए, ताकि वे उनके लिए सम्मान का कारण हों।

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मेरा चिंतन
19:82पृष्ठ 311 · जुज़ 16

كَلَّا ۚ سَيَكْفُرُونَ بِعِبَادَتِهِمْ وَيَكُونُونَ عَلَيْهِمْ ضِدًّا ۝٨٢

ऐसा कभी नहीं होगा, जल्द ही वे उनकी पूजा का इनकार[19] कर देंगे और उनके खिलाफ (विरोधी) हो जाएँगे।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[19] अर्थात प्रलय के दिन।
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मेरा चिंतन
19:83पृष्ठ 311 · जुज़ 16

أَلَمْ تَرَ أَنَّآ أَرْسَلْنَا ٱلشَّيَـٰطِينَ عَلَى ٱلْكَـٰفِرِينَ تَؤُزُّهُمْ أَزًّا ۝٨٣

क्या आपने नहीं देखा कि हमने शैतानों को काफ़िरों पर छोड़ रखा है, वे उन्हें ख़ूब उकसाते रहते हैं?

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मेरा चिंतन
19:84पृष्ठ 311 · जुज़ 16

فَلَا تَعْجَلْ عَلَيْهِمْ ۖ إِنَّمَا نَعُدُّ لَهُمْ عَدًّا ۝٨٤

अतः आपर उनपर जल्दी न करें [20], हम तो केवल उनके लिए (दिन) गिन रहे हैं।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[20] अर्थात उनपर शीघ्र यातना उतारने की माँग ने करें। इसके लिए केवल उनकी आयु पूरी होने की देर है।
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मेरा चिंतन
19:85पृष्ठ 311 · जुज़ 16

يَوْمَ نَحْشُرُ ٱلْمُتَّقِينَ إِلَى ٱلرَّحْمَـٰنِ وَفْدًا ۝٨٥

जिस दिन हम परहेज़गारों को रहमान के पास मेहमान बनाकर इकट्ठा करेंगे।

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मेरा चिंतन
19:86पृष्ठ 311 · जुज़ 16

وَنَسُوقُ ٱلْمُجْرِمِينَ إِلَىٰ جَهَنَّمَ وِرْدًا ۝٨٦

तथा अपराधियों को नरक की ओर प्यासे हाँककर ले जाएँगे।

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मेरा चिंतन
19:87पृष्ठ 311 · जुज़ 16

لَّا يَمْلِكُونَ ٱلشَّفَـٰعَةَ إِلَّا مَنِ ٱتَّخَذَ عِندَ ٱلرَّحْمَـٰنِ عَهْدًا ۝٨٧

वे सिफारिश का अधिकार नहीं रखेंगे, सिवाय उसके जिसने रहमान के पास कोई प्रतिज्ञा प्राप्त कर ली हो।[21]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[21] अर्थात अल्लाह की अनुमति से वही सिफ़ारिश करेगा जो ईमान लाया है।
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मेरा चिंतन
19:88पृष्ठ 311 · जुज़ 16

وَقَالُوا۟ ٱتَّخَذَ ٱلرَّحْمَـٰنُ وَلَدًا ۝٨٨

तथा उन्होंने कहा कि रहमान ने संतान बना रखी है।[22]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[22] अर्थात ईसाइयों ने - जैसा कि इस सूरत के आरंभ में आया है - ईसा अलैहिस्सलाम को अल्लाह का पुत्र बना लिया। और इस भ्रम में पड़ गए कि उन्होंने मनुष्य के पापों का प्रायश्चित कर दिया। इस आयत में इसी गलत धारणा का खंडन किया जा रहा है।
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मेरा चिंतन
19:89पृष्ठ 311 · जुज़ 16

لَّقَدْ جِئْتُمْ شَيْـًٔا إِدًّا ۝٨٩

निश्चय ही तुम एक बड़ी भारी बात गढ़कर लाए हो।

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मेरा चिंतन
19:90पृष्ठ 311 · जुज़ 16

تَكَادُ ٱلسَّمَـٰوَٰتُ يَتَفَطَّرْنَ مِنْهُ وَتَنشَقُّ ٱلْأَرْضُ وَتَخِرُّ ٱلْجِبَالُ هَدًّا ۝٩٠

समीप है कि इस कथन के कारण आकाश फट पड़ें तथा धरती चिर जाए और और पहाड़ ध्वस्त होकर गिर पड़ें।

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19:91पृष्ठ 311 · जुज़ 16

أَن دَعَوْا۟ لِلرَّحْمَـٰنِ وَلَدًا ۝٩١

इस बात पर कि उन्होंने रहमान की संतान होने का दावा किया।

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19:92पृष्ठ 311 · जुज़ 16

وَمَا يَنۢبَغِى لِلرَّحْمَـٰنِ أَن يَتَّخِذَ وَلَدًا ۝٩٢

हालाँकि, रहमान के योग्य नहीं कि कोई संतान बनाए।

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मेरा चिंतन
19:93पृष्ठ 311 · जुज़ 16

إِن كُلُّ مَن فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ إِلَّآ ءَاتِى ٱلرَّحْمَـٰنِ عَبْدًا ۝٩٣

आकाशों तथा धरती में जो कोई भी है, वह रहमान के पास दास के रूप में आने वाला है।

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मेरा चिंतन
19:94पृष्ठ 311 · जुज़ 16

لَّقَدْ أَحْصَىٰهُمْ وَعَدَّهُمْ عَدًّا ۝٩٤

निश्चय उसने उन्हें (अपने ज्ञान के साथ) घेर रखा है तथा उन्हें अच्छी तरह गिन रखा है।

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मेरा चिंतन
19:95पृष्ठ 311 · जुज़ 16

وَكُلُّهُمْ ءَاتِيهِ يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ فَرْدًا ۝٩٥

और उनमें से हर एक क़ियामत के दिन उसके पास अकेला आने वाला है।[23]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[23] अर्थात उस दिन कोई किसी का सहायक न होगा। और न ही किसी को उसका धन-संतान लाभ देगा।
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19:96पृष्ठ 312 · जुज़ 16

إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ سَيَجْعَلُ لَهُمُ ٱلرَّحْمَـٰنُ وُدًّا ۝٩٦

निःसंदेह जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, शीघ्र ही रहमान उनके लिए प्रेम पैदा करेगा।[24]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[24] अर्थात उनके ईमान और सत्कर्म के कारण, लोग उनसे प्रेम करने लगेंगे।
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मेरा चिंतन
19:97पृष्ठ 312 · जुज़ 16

فَإِنَّمَا يَسَّرْنَـٰهُ بِلِسَانِكَ لِتُبَشِّرَ بِهِ ٱلْمُتَّقِينَ وَتُنذِرَ بِهِۦ قَوْمًا لُّدًّا ۝٩٧

अतः (ऐ नबी!) हमने इसे आपकी भाषा में सरल बना दिया है, ताकि आप इसके द्वारा डर रखने वालों को शुभ सूचना दें तथा इसके द्वारा उन लोगों को डराएँ जो सख़्त झगड़ालू हैं।

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मेरा चिंतन
19:98पृष्ठ 312 · जुज़ 16

وَكَمْ أَهْلَكْنَا قَبْلَهُم مِّن قَرْنٍ هَلْ تُحِسُّ مِنْهُم مِّنْ أَحَدٍ أَوْ تَسْمَعُ لَهُمْ رِكْزًۢا ۝٩٨

और हमने उनसे पहले कितनी ही जातियों को विनष्ट कर दिया, तो क्या आप उनमें से किसी एक को महसूस करते हैं, या उनकी कोई भनक सुनते हैं?!

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मूल अरबी: Tanzil Uthmani v1.1. अर्थों का अनुवाद: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari · QuranEnc.com · v1.1.5.

सभी 6,236 आयत संदर्भों को स्रोत से मिलाकर जाँचा गया है। यह तकनीकी अखंडता जाँच है, स्वतंत्र विद्वत समीक्षा नहीं। आरंभ की बिस्मिल्लाहें उसी रूप में सुरक्षित रखी गई हैं जिस रूप में मिली थीं।

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अनुवाद स्रोत

Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
Translated by Azizul Haq Al-Omari.
स्रोत संस्करण: 1.1.5 · 2025-08-05

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