सूरह 53 · 62 आयतें · मक्की

An-Najm

अन-नज्म

النجم
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53:1पृष्ठ 526 · जुज़ 27

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ وَٱلنَّجْمِ إِذَا هَوَىٰ ۝١

क़सम है तारे की जब वह गिरे!

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मेरा चिंतन
53:2पृष्ठ 526 · जुज़ 27

مَا ضَلَّ صَاحِبُكُمْ وَمَا غَوَىٰ ۝٢

तुम्हारा साथी न तो रास्ते से भटका है और न ही गलत रास्ते पर चला है।

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मेरा चिंतन
53:3पृष्ठ 526 · जुज़ 27

وَمَا يَنطِقُ عَنِ ٱلْهَوَىٰٓ ۝٣

और न वह अपनी इच्छा से बोलता है।

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मेरा चिंतन
53:4पृष्ठ 526 · जुज़ 27

إِنْ هُوَ إِلَّا وَحْىٌ يُوحَىٰ ۝٤

वह तो केवल वह़्य है, जो उतारी जाती है।

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मेरा चिंतन
53:5पृष्ठ 526 · जुज़ 27

عَلَّمَهُۥ شَدِيدُ ٱلْقُوَىٰ ۝٥

उसे बहुत मज़ूबत शक्तियों वाले (फ़रिश्ते)[1] ने सिखाया है।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[1] इससे अभिप्राय जिबरील (अलैहिस्सलाम) हैं, जो वह़्य लाते थे।
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मेरा चिंतन
53:6पृष्ठ 526 · जुज़ 27

ذُو مِرَّةٍ فَٱسْتَوَىٰ ۝٦

जो बड़ा बलशाली है। फिर वह बुलंद हुआ (अपने असली रूप में प्रकट हुआ)।

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मेरा चिंतन
53:7पृष्ठ 526 · जुज़ 27

وَهُوَ بِٱلْأُفُقِ ٱلْأَعْلَىٰ ۝٧

जबकि वह आकाश के सबसे ऊँचे क्षितिज (पूर्वी किनारे) पर था।

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मेरा चिंतन
53:8पृष्ठ 526 · जुज़ 27

ثُمَّ دَنَا فَتَدَلَّىٰ ۝٨

फिर वह निकट हुआ और उतर आया।

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मेरा चिंतन
53:9पृष्ठ 526 · जुज़ 27

فَكَانَ قَابَ قَوْسَيْنِ أَوْ أَدْنَىٰ ۝٩

फिर वह दो धनुषों की दूरी पर था, या उससे भी निकट।

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मेरा चिंतन
53:10पृष्ठ 526 · जुज़ 27

فَأَوْحَىٰٓ إِلَىٰ عَبْدِهِۦ مَآ أَوْحَىٰ ۝١٠

फिर उसने अल्लाह के बंदे[2] की ओर वह़्य की, जो भी वह़्य की।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[2] अर्थात मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की ओर। इन आयतों में नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के जिबरील (फरिश्ते) को उनके वास्तविक रूप में दो बार देखने का वर्णन है। आयशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) ने कहा : जो कहे कि मुह़म्मद (सल्लल्लहु अलैहि व सल्लम) ने अल्लाह को देखा है, तो वह झूठा है। और जो कहे कि आप कल (भविष्य) की बात जानते थे, तो वह झूठा है। तथा जो कहे कि आप ने धर्म की कुछ बातें छिपा लीं, तो वह झूठा है। किंतु आपने जिबरील (अलैहिस्सलाम) को उनके रूप में दो बार देखा। (बुख़ारी : 4855) इब्ने मसऊद ने कहा कि आपने जिबरील को देखा जिनके छह सौ पंख थे। (बुख़ारी : 4856)
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मेरा चिंतन
53:11पृष्ठ 526 · जुज़ 27

مَا كَذَبَ ٱلْفُؤَادُ مَا رَأَىٰٓ ۝١١

दिल ने झूठ नहीं बोला, जो कुछ उसने देखा।

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मेरा चिंतन
53:12पृष्ठ 526 · जुज़ 27

أَفَتُمَـٰرُونَهُۥ عَلَىٰ مَا يَرَىٰ ۝١٢

फिर क्या तुम उससे उसपर झगड़ते हो, जो वह देखता है?

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मेरा चिंतन
53:13पृष्ठ 526 · जुज़ 27

وَلَقَدْ رَءَاهُ نَزْلَةً أُخْرَىٰ ۝١٣

हालाँकि, निश्चित रूप से उसने उसे एक और बार उतरते हुए भी देखा है।

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मेरा चिंतन
53:14पृष्ठ 526 · जुज़ 27

عِندَ سِدْرَةِ ٱلْمُنتَهَىٰ ۝١٤

सिदरतुल-मुनतहा'[3] के पास।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[3] 'सिदरतुल मुनतहा', यह छठे या सातवें आकाश पर बैरी का एक वृक्ष है। जिस तक धरती की चीज़ पहुँचती है। तथा ऊपर की चीज़ उतरती है। (सह़ीह़ मुस्लिम : 173)
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मेरा चिंतन
53:15पृष्ठ 526 · जुज़ 27

عِندَهَا جَنَّةُ ٱلْمَأْوَىٰٓ ۝١٥

उसी के पास 'जन्नतुल मावा' (शाश्वत स्वर्ग) है।

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मेरा चिंतन
53:16पृष्ठ 526 · जुज़ 27

إِذْ يَغْشَى ٱلسِّدْرَةَ مَا يَغْشَىٰ ۝١٦

जब सिदरा पर छा रहा था, जो कुछ छा रहा था।[4]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[4] ह़दीस में है कि वह सोने के पतिंगे थे। (सह़ीह़ मुस्लिम : 173)
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मेरा चिंतन
53:17पृष्ठ 526 · जुज़ 27

مَا زَاغَ ٱلْبَصَرُ وَمَا طَغَىٰ ۝١٧

न निगाह इधर-उधर हुई और न सीमा से आगे बढ़ी।

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मेरा चिंतन
53:18पृष्ठ 526 · जुज़ 27

لَقَدْ رَأَىٰ مِنْ ءَايَـٰتِ رَبِّهِ ٱلْكُبْرَىٰٓ ۝١٨

निःसंदेह उसने अपने पालनहार की कुछ बहुत बड़ी निशानियाँ[5] देखीं।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[5] इसमें मे'राज की रात आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के आकाशों में अल्लाह की निशानियाँ देखने का वर्णन है।
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मेरा चिंतन
53:19पृष्ठ 526 · जुज़ 27

أَفَرَءَيْتُمُ ٱللَّـٰتَ وَٱلْعُزَّىٰ ۝١٩

फिर क्या तुमने लात और उज़्ज़ा को देखा।

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मेरा चिंतन
53:20पृष्ठ 526 · जुज़ 27

وَمَنَوٰةَ ٱلثَّالِثَةَ ٱلْأُخْرَىٰٓ ۝٢٠

तथा तीसरी एक और (मूर्ति) मनात को?[6]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[6] लात, उज़्ज़ा और मनात ये तीनों मक्का के मुश्रिकों की देवियों के नाम हैं। और अर्थ यह है कि क्या इनकी भी कोई वास्तविकता है?
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मेरा चिंतन
53:21पृष्ठ 526 · जुज़ 27

أَلَكُمُ ٱلذَّكَرُ وَلَهُ ٱلْأُنثَىٰ ۝٢١

क्या तुम्हारे लिए पुत्र हैं और उस (अल्लाह) के लिए पुत्रियाँ?

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मेरा चिंतन
53:22पृष्ठ 526 · जुज़ 27

تِلْكَ إِذًا قِسْمَةٌ ضِيزَىٰٓ ۝٢٢

तब तो यह बड़ा अन्यायपूर्ण बँटवारा है।

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मेरा चिंतन
53:23पृष्ठ 526 · जुज़ 27

إِنْ هِىَ إِلَّآ أَسْمَآءٌ سَمَّيْتُمُوهَآ أَنتُمْ وَءَابَآؤُكُم مَّآ أَنزَلَ ٱللَّهُ بِهَا مِن سُلْطَـٰنٍ ۚ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا ٱلظَّنَّ وَمَا تَهْوَى ٱلْأَنفُسُ ۖ وَلَقَدْ جَآءَهُم مِّن رَّبِّهِمُ ٱلْهُدَىٰٓ ۝٢٣

ये (मूर्तियाँ) कुछ नामों के सिवा कुछ भी नहीं हैं, जो तुमने तथा तुम्हारे बाप-दादा ने रख लिए हैं। अल्लाह ने इनका कोई प्रमाण नहीं उतारा है। ये लोग केवल अटकल[7] के और उन चीज़ों के पीछे चल रहे हैं जो उनके दिल चाहते हैं। जबकि निःसंदेह उनके पास उनके पालनहार की ओर से मार्गदर्शन आ चुका है।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[7] मुश्रिक अपनी मूर्तियों को अल्लाह की पुत्रियाँ कहकर उनकी पूजा करते थे, जिसका यहाँ खंडन किया जा रहा है।
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मेरा चिंतन
53:24पृष्ठ 526 · जुज़ 27

أَمْ لِلْإِنسَـٰنِ مَا تَمَنَّىٰ ۝٢٤

क्या मनुष्य को वह मिल जाएगा, जिसकी वह कामना करे?

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मेरा चिंतन
53:25पृष्ठ 526 · जुज़ 27

فَلِلَّهِ ٱلْـَٔاخِرَةُ وَٱلْأُولَىٰ ۝٢٥

(नहीं, ऐसा नहीं है) क्योंकि आख़िरत और दुनिया अल्लाह ही के अधिकार में है।

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मेरा चिंतन
53:26पृष्ठ 526 · जुज़ 27

۞ وَكَم مِّن مَّلَكٍ فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ لَا تُغْنِى شَفَـٰعَتُهُمْ شَيْـًٔا إِلَّا مِنۢ بَعْدِ أَن يَأْذَنَ ٱللَّهُ لِمَن يَشَآءُ وَيَرْضَىٰٓ ۝٢٦

और आकाशों में कितने ही फ़रिश्ते हैं कि उनकी सिफ़ारिश कुछ लाभ नहीं देती, परंतु इसके पश्चात कि अल्लाह अनुमति दे जिसके लिए चाहे तथा (जिसे) पसंद करे।[8]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[8] अरब के मुश्रिक यह समझते थे कि यदि हम फ़रिश्तों की पूजा करेंगे, तो वे अल्लाह से सिफ़ारिश करके हमें यातना से मुक्त करा देंगे। इसी का खंडन यहाँ किया जा रहा है।
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मेरा चिंतन
53:27पृष्ठ 527 · जुज़ 27

إِنَّ ٱلَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِٱلْـَٔاخِرَةِ لَيُسَمُّونَ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةَ تَسْمِيَةَ ٱلْأُنثَىٰ ۝٢٧

निःसंदेह वे लोग जो आख़िरत पर ईमान नहीं रखते, निश्चय वे फ़रिश्तों के नाम औरतों के नामों की तरह रखते हैं।

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मेरा चिंतन
53:28पृष्ठ 527 · जुज़ 27

وَمَا لَهُم بِهِۦ مِنْ عِلْمٍ ۖ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا ٱلظَّنَّ ۖ وَإِنَّ ٱلظَّنَّ لَا يُغْنِى مِنَ ٱلْحَقِّ شَيْـًٔا ۝٢٨

हालाँकि उन्हें इसके बारे में कोई ज्ञान नहीं। वे केवल अनुमान के पीछे चल रहे हैं। और निःसंदेह अनुमान सच्चाई की तुलना में किसी काम नहीं आता।

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मेरा चिंतन
53:29पृष्ठ 527 · जुज़ 27

فَأَعْرِضْ عَن مَّن تَوَلَّىٰ عَن ذِكْرِنَا وَلَمْ يُرِدْ إِلَّا ٱلْحَيَوٰةَ ٱلدُّنْيَا ۝٢٩

अतः आप उससे मुँह फेर लें, जिसने हमारी नसीहत से मुँह मोड़ लिया और जिसने दुनिया के जीवन के सिवा कुछ नहीं चाहा।

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मेरा चिंतन
53:30पृष्ठ 527 · जुज़ 27

ذَٰلِكَ مَبْلَغُهُم مِّنَ ٱلْعِلْمِ ۚ إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعْلَمُ بِمَن ضَلَّ عَن سَبِيلِهِۦ وَهُوَ أَعْلَمُ بِمَنِ ٱهْتَدَىٰ ۝٣٠

यही उनके ज्ञान की सीमा है। निश्चित रूप से आपका पालनहार ही उसे अधिक जानने वाला है, जो उसके मार्ग से भटक गया और वही उसे भी ज़्यादा जानने वाला है, जो सीधे मार्ग पर चला।

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मेरा चिंतन
53:31पृष्ठ 527 · जुज़ 27

وَلِلَّهِ مَا فِى ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَمَا فِى ٱلْأَرْضِ لِيَجْزِىَ ٱلَّذِينَ أَسَـٰٓـُٔوا۟ بِمَا عَمِلُوا۟ وَيَجْزِىَ ٱلَّذِينَ أَحْسَنُوا۟ بِٱلْحُسْنَى ۝٣١

तथा जो कुछ आकाशों में है और जो कुछ धरती में है, सब अल्लाह ही का है, ताकि वह बुराई करने वालों को उनके किए का बदला दे, और भलाई करने वालों को अच्छा बदला दे।

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मेरा चिंतन
53:32पृष्ठ 527 · जुज़ 27

ٱلَّذِينَ يَجْتَنِبُونَ كَبَـٰٓئِرَ ٱلْإِثْمِ وَٱلْفَوَٰحِشَ إِلَّا ٱللَّمَمَ ۚ إِنَّ رَبَّكَ وَٰسِعُ ٱلْمَغْفِرَةِ ۚ هُوَ أَعْلَمُ بِكُمْ إِذْ أَنشَأَكُم مِّنَ ٱلْأَرْضِ وَإِذْ أَنتُمْ أَجِنَّةٌ فِى بُطُونِ أُمَّهَـٰتِكُمْ ۖ فَلَا تُزَكُّوٓا۟ أَنفُسَكُمْ ۖ هُوَ أَعْلَمُ بِمَنِ ٱتَّقَىٰٓ ۝٣٢

वे लोग जो बड़े गुनाहों तथा अश्लील कार्यों[9] से दूर रहते हैं, सिवाय कुछ छोटे गुनाहों के। निःसंदेह आपका पालनहार बड़ा क्षमा करने वाला है। वह तुम्हें अधिक जानने वाला है जब उसने तुम्हें धरती[10] से पैदा किया और जब तुम अपनी माँओं के पेटों में बच्चे थे। अतः अपनी पवित्रता का दावा मत करो, वह उसे ज़्यादा जानने वाला है जो वास्तव में परहेज़गार है।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[9] इससे अभिप्राय अश्लीलता पर आधारित कुकर्म हैं। जैसे बाल-मैथुन, व्यभिचार, नारियों का अपने सौंदर्य का प्रदर्शन और पर्दे का त्याग, मिश्रित शिक्षा, मिश्रित सभाएँ, सौंदर्य की प्रतियोगिता आदि। जिसे आधुनिक युग में सभ्यता का नाम दिया जाता है। और मुस्लिम समाज भी इससे प्रभावित हो रहा है। ह़दीस में है कि सात विनाशकारी कर्मों से बचो : 1- अल्लाह का साझी बनाने से। 2- जादू करना। 3- अकारण जान मारना। 4- मदिरा पीना। 5- अनाथ का धन खाना। 6- युद्ध के दिन भागना। 7- तथा भोली-भाली पवित्र स्त्री को कलंक लगाना। (सह़ीह़ बुख़ारी : 2766, मुस्लिम : 89) [10] अर्थात तुम्हारे मूल आदम (अलैहिस्सलाम) को।
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मेरा चिंतन
53:33पृष्ठ 527 · जुज़ 27

أَفَرَءَيْتَ ٱلَّذِى تَوَلَّىٰ ۝٣٣

फिर क्या आपने उसे देखा जिसने मुँह फेर लिया?

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मेरा चिंतन
53:34पृष्ठ 527 · जुज़ 27

وَأَعْطَىٰ قَلِيلًا وَأَكْدَىٰٓ ۝٣٤

और थोड़ा-सा दिया फिर रोक लिया।

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मेरा चिंतन
53:35पृष्ठ 527 · जुज़ 27

أَعِندَهُۥ عِلْمُ ٱلْغَيْبِ فَهُوَ يَرَىٰٓ ۝٣٥

क्या उसके पास परोक्ष का ज्ञान है? अतः वह देख रहा है।[11]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[11] इस आयत में जो परंपरागत धर्म को मोक्ष का साधन समझता है उससे कहा जा रहा है कि क्या वह जानता है कि प्रलय के दिन इतने ही से सफल हो जाएगा? जबकि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) वह़्य के आधार पर जो प्रस्तुत कर रहे हैं, वही सत्य है। और अल्लाह की वह़्य ही परोक्ष के ज्ञान का साधन है।
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मेरा चिंतन
53:36पृष्ठ 527 · जुज़ 27

أَمْ لَمْ يُنَبَّأْ بِمَا فِى صُحُفِ مُوسَىٰ ۝٣٦

या उसे उन बातों की सूचना नहीं दी गई, जो मूसा के ग्रंथों में हैं?

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मेरा चिंतन
53:37पृष्ठ 527 · जुज़ 27

وَإِبْرَٰهِيمَ ٱلَّذِى وَفَّىٰٓ ۝٣٧

और इबराहीम के (ग्रंथों में), जिसने (कर्तव्य) पूरा किया।

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मेरा चिंतन
53:38पृष्ठ 527 · जुज़ 27

أَلَّا تَزِرُ وَازِرَةٌ وِزْرَ أُخْرَىٰ ۝٣٨

कि कोई बोझ उठाने वाला किसी दूसरे का बोझ नहीं उठाएगा।

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मेरा चिंतन
53:39पृष्ठ 527 · जुज़ 27

وَأَن لَّيْسَ لِلْإِنسَـٰنِ إِلَّا مَا سَعَىٰ ۝٣٩

और यह कि मनुष्य के लिए केवल वही है, जिसके लिए उसने प्रयास किया।

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मेरा चिंतन
53:40पृष्ठ 527 · जुज़ 27

وَأَنَّ سَعْيَهُۥ سَوْفَ يُرَىٰ ۝٤٠

और यह कि निश्चय उसका प्रयास शीघ्र ही देखा जाएगा।

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मेरा चिंतन
53:41पृष्ठ 527 · जुज़ 27

ثُمَّ يُجْزَىٰهُ ٱلْجَزَآءَ ٱلْأَوْفَىٰ ۝٤١

फिर उसे उसका पूरा प्रतिफल दिया जाएगा।

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मेरा चिंतन
53:42पृष्ठ 527 · जुज़ 27

وَأَنَّ إِلَىٰ رَبِّكَ ٱلْمُنتَهَىٰ ۝٤٢

और यह कि निःसंदेह आपके पालनहार ही की ओर अंततः पहुँचना है।

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मेरा चिंतन
53:43पृष्ठ 527 · जुज़ 27

وَأَنَّهُۥ هُوَ أَضْحَكَ وَأَبْكَىٰ ۝٤٣

तथा यह कि निःसंदह वही है, जिसने हँसाया तथा रुलाया।

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मेरा चिंतन
53:44पृष्ठ 527 · जुज़ 27

وَأَنَّهُۥ هُوَ أَمَاتَ وَأَحْيَا ۝٤٤

तथा यह कि निःसंदेह वही है, जिसने मृत्यु दी और जीवन दिया।

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मेरा चिंतन
53:45पृष्ठ 528 · जुज़ 27

وَأَنَّهُۥ خَلَقَ ٱلزَّوْجَيْنِ ٱلذَّكَرَ وَٱلْأُنثَىٰ ۝٤٥

और यह कि निःसंदेह उसी ने दो प्रकार : नर और मादा पैदा किए।

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मेरा चिंतन
53:46पृष्ठ 528 · जुज़ 27

مِن نُّطْفَةٍ إِذَا تُمْنَىٰ ۝٤٦

एक बूँद से, जब वह टपकाई जाती है।

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मेरा चिंतन
53:47पृष्ठ 528 · जुज़ 27

وَأَنَّ عَلَيْهِ ٱلنَّشْأَةَ ٱلْأُخْرَىٰ ۝٤٧

और यह कि निःसंदेह उसी के ज़िम्मे दूसरी बार[12] पैदा करना है।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[12] अर्थात प्रलय के दिन प्रतिफल प्रदान करने के लिए।
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मेरा चिंतन
53:48पृष्ठ 528 · जुज़ 27

وَأَنَّهُۥ هُوَ أَغْنَىٰ وَأَقْنَىٰ ۝٤٨

और यह कि निःसंदेह उसी ने धनी बनाया और कोष प्रदान किया।

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मेरा चिंतन
53:49पृष्ठ 528 · जुज़ 27

وَأَنَّهُۥ هُوَ رَبُّ ٱلشِّعْرَىٰ ۝٤٩

और यह कि निःसंदेह वही ''शे'रा'' [13] का रब है।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[13] शे'रा एक तारे का नाम है। जिसकी पूजा कुछ अरब के लोग किया करते थे। (इब्ने कसीर) अर्थ यह है कि यह तारा पूज्य नहीं, वास्तविक पूज्य उसका स्वामी अल्लाह है।
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मेरा चिंतन
53:50पृष्ठ 528 · जुज़ 27

وَأَنَّهُۥٓ أَهْلَكَ عَادًا ٱلْأُولَىٰ ۝٥٠

और यह कि निःसंदेह उसी ने प्रथम 'आद' [14] को विनष्ट किया।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[14] यह हूद (अलैहिस्सलाम) की जाति थे।
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मेरा चिंतन
53:51पृष्ठ 528 · जुज़ 27

وَثَمُودَا۟ فَمَآ أَبْقَىٰ ۝٥١

तथा समूद को, फिर (किसी को) बाक़ी न छोड़ा।

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मेरा चिंतन
53:52पृष्ठ 528 · जुज़ 27

وَقَوْمَ نُوحٍ مِّن قَبْلُ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا۟ هُمْ أَظْلَمَ وَأَطْغَىٰ ۝٥٢

तथा इनसे पहले नूह़ की जाति को। निःसंदेह वे बहुत ही ज़ालिम और बड़े ही सरकश थे।

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मेरा चिंतन
53:53पृष्ठ 528 · जुज़ 27

وَٱلْمُؤْتَفِكَةَ أَهْوَىٰ ۝٥٣

और उलट जाने वाली बस्ती[15] को उसने उठाकर धरती पर दे मारा।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[15] अर्थात लूत अलैहिस्सलमा की जाति कि बस्तियों को।
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari · QuranEnc.com · v1.1.5
मेरा चिंतन
53:54पृष्ठ 528 · जुज़ 27

فَغَشَّىٰهَا مَا غَشَّىٰ ۝٥٤

तो ढाँप दिया[16] उसे जिस चीज़ से ढाँपा।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[16] अर्थात पत्थरों की वर्षा करके उससे उनकी बस्ती को ढाँप दिया।
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मेरा चिंतन
53:55पृष्ठ 528 · जुज़ 27

فَبِأَىِّ ءَالَآءِ رَبِّكَ تَتَمَارَىٰ ۝٥٥

तो (ऐ इनसान!) तू अपने पालनहार की ने'मतों में से किस-किस में संदेह करेगा?

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मेरा चिंतन
53:56पृष्ठ 528 · जुज़ 27

هَـٰذَا نَذِيرٌ مِّنَ ٱلنُّذُرِ ٱلْأُولَىٰٓ ۝٥٦

यह[17] पहले डराने वालों में से एक डराने वाला है।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[17] अर्थात मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) भी एक रसूल हैं प्रथम रसूलों के समान।
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मेरा चिंतन
53:57पृष्ठ 528 · जुज़ 27

أَزِفَتِ ٱلْـَٔازِفَةُ ۝٥٧

निकट आने वाली निकट आ गई।

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मेरा चिंतन
53:58पृष्ठ 528 · जुज़ 27

لَيْسَ لَهَا مِن دُونِ ٱللَّهِ كَاشِفَةٌ ۝٥٨

जिसे अल्लाह के सिवा कोई हटाने वाला नहीं।

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मेरा चिंतन
53:59पृष्ठ 528 · जुज़ 27

أَفَمِنْ هَـٰذَا ٱلْحَدِيثِ تَعْجَبُونَ ۝٥٩

तो क्या तुम इस बात पर आश्चर्य करते हो?

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मेरा चिंतन
53:60पृष्ठ 528 · जुज़ 27

وَتَضْحَكُونَ وَلَا تَبْكُونَ ۝٦٠

तथा हँसते हो और रोते नहीं हो?

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मेरा चिंतन
53:61पृष्ठ 528 · जुज़ 27

وَأَنتُمْ سَـٰمِدُونَ ۝٦١

तथा तुम ग़ाफ़िल हो!

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मेरा चिंतन
53:62पृष्ठ 528 · जुज़ 27

فَٱسْجُدُوا۟ لِلَّهِ وَٱعْبُدُوا۟ ۩ ۝٦٢

अतः अल्लाह को सजदा करो और उसी की इबादत[18] करो।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[18] ह़दीस में है कि जब सजदे की प्रथम सूरत "नज्म" उतरी, तो नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और जो आपके पास थे, सब ने सजदा किया, एक व्यक्ति के सिवा। उसने कुछ धूल ली, और उसपर सज्दा किया। तो मैंने इसके पश्चात् देखा कि वह काफ़िर रहते हुए मारा गया। और वह उमय्या बिन ख़लफ़ है। (सह़ीह़ बुख़ारी : 4863)
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पाठ स्रोत और सटीकता

मूल अरबी: Tanzil Uthmani v1.1. अर्थों का अनुवाद: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari · QuranEnc.com · v1.1.5.

सभी 6,236 आयत संदर्भों को स्रोत से मिलाकर जाँचा गया है। यह तकनीकी अखंडता जाँच है, स्वतंत्र विद्वत समीक्षा नहीं। आरंभ की बिस्मिल्लाहें उसी रूप में सुरक्षित रखी गई हैं जिस रूप में मिली थीं।

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अनुवाद स्रोत

Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
Translated by Azizul Haq Al-Omari.
स्रोत संस्करण: 1.1.5 · 2025-08-05

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