بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ وَٱلصَّـٰٓفَّـٰتِ صَفًّا ١
क़सम है पंक्तिबद्ध (फ़रिश्तों) की!
अस-साफ़्फ़ात
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بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ وَٱلصَّـٰٓفَّـٰتِ صَفًّا ١
क़सम है पंक्तिबद्ध (फ़रिश्तों) की!
فَٱلزَّٰجِرَٰتِ زَجْرًا ٢
फिर झिड़क कर डाँटने वालों की!
فَٱلتَّـٰلِيَـٰتِ ذِكْرًا ٣
फिर (अल्लाह के) ज़िक्र (वाणी) की तिलावत करने वालों की।[1]
إِنَّ إِلَـٰهَكُمْ لَوَٰحِدٌ ٤
निःसंदेह तुम्हारा पूज्य निश्चय एक ही है।
رَّبُّ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا وَرَبُّ ٱلْمَشَـٰرِقِ ٥
जो आकाशों और धरती का तथा उन दोनों के बीच की समस्त चीज़ों का स्वामी है और सूर्य के उदय होने के सभी स्थानों का मालिक है।
إِنَّا زَيَّنَّا ٱلسَّمَآءَ ٱلدُّنْيَا بِزِينَةٍ ٱلْكَوَاكِبِ ٦
निःसंदेह हमने संसार के आकाश को एक सुंदर शृंगार के साथ सुशोभित किया है, जो सितारे हैं।
وَحِفْظًا مِّن كُلِّ شَيْطَـٰنٍ مَّارِدٍ ٧
और प्रत्येक सरकश शैतान से सुरक्षित करने के लिए।
لَّا يَسَّمَّعُونَ إِلَى ٱلْمَلَإِ ٱلْأَعْلَىٰ وَيُقْذَفُونَ مِن كُلِّ جَانِبٍ ٨
वे सर्वोच्च सभा (मला-ए-आ'ला) के फ़रिश्तों की बात नहीं सुन सकते, तथा वे हर ओर से (उल्काओं से) मारे जाते हैं।
دُحُورًا ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ وَاصِبٌ ٩
भगाने के लिए। तथा उनके लिए स्थायी यातना है।
إِلَّا مَنْ خَطِفَ ٱلْخَطْفَةَ فَأَتْبَعَهُۥ شِهَابٌ ثَاقِبٌ ١٠
परंतु जो कोई (शैतान फरिश्तों की किसी बात को) अचानक उचक ले जाए, तो एक दहकता हुआ अंगारा (उल्का)[2] उसका पीछा करता है।
فَٱسْتَفْتِهِمْ أَهُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَم مَّنْ خَلَقْنَآ ۚ إِنَّا خَلَقْنَـٰهُم مِّن طِينٍ لَّازِبٍۭ ١١
तो आप इन (काफ़िरों) से पूछें कि क्या इन्हें पैदा करना अधिक कठिन है या उनका जिन्हें[3] हम पैदा कर चुके? निःसंदेह हमने उन्हें[4] एक लेसदार मिट्टी से पैदा किया है।
بَلْ عَجِبْتَ وَيَسْخَرُونَ ١٢
बल्कि आपने आश्चर्य किया और वे उपहास करते हैं।
وَإِذَا ذُكِّرُوا۟ لَا يَذْكُرُونَ ١٣
और जब उन्हें नसीहत की जाए, तो वे क़बूल नहीं करते।
وَإِذَا رَأَوْا۟ ءَايَةً يَسْتَسْخِرُونَ ١٤
और जब वे कोई निशानी देखते हैं, तो खूब उपहास करते हैं।
وَقَالُوٓا۟ إِنْ هَـٰذَآ إِلَّا سِحْرٌ مُّبِينٌ ١٥
तथा कहते हैं कि यह तो मात्र खुला जादू है।
أَءِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَـٰمًا أَءِنَّا لَمَبْعُوثُونَ ١٦
क्या जब हम मर गए और मिट्टी तथा हड्डियाँ हो चुके, तो क्या सचमुच हम अवश्य उठाए जाने वाले हैं?
أَوَءَابَآؤُنَا ٱلْأَوَّلُونَ ١٧
और क्या हमारे पहले बाप-दादा भी (उठाए जाएँगे)?
قُلْ نَعَمْ وَأَنتُمْ دَٰخِرُونَ ١٨
आप कह दीजिए : हाँ! तथा तुम अपमानित (भी) होगे!
فَإِنَّمَا هِىَ زَجْرَةٌ وَٰحِدَةٌ فَإِذَا هُمْ يَنظُرُونَ ١٩
वह बस एक ही झिड़की होगी, तो एकाएक वे देख रहे होंगे।
وَقَالُوا۟ يَـٰوَيْلَنَا هَـٰذَا يَوْمُ ٱلدِّينِ ٢٠
तथा वे कहेंगे : हाय हमारा विनाश! यह तो बदले का दिन है।
هَـٰذَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ ٱلَّذِى كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ ٢١
यही निर्णय का दिन है, जिसे तुम झुठलाया करते थे।
۞ ٱحْشُرُوا۟ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ وَأَزْوَٰجَهُمْ وَمَا كَانُوا۟ يَعْبُدُونَ ٢٢
(आदेश होगा कि) इकट्ठा करो उन लोगों को जिन्होंने अत्याचार किया तथा उनके साथियों को और जिनकी वे उपासना किया करते थे ।
مِن دُونِ ٱللَّهِ فَٱهْدُوهُمْ إِلَىٰ صِرَٰطِ ٱلْجَحِيمِ ٢٣
अल्लाह के सिवा। फिर उन्हें जहन्नम की राह दिखा दो।
وَقِفُوهُمْ ۖ إِنَّهُم مَّسْـُٔولُونَ ٢٤
और उन्हें ठहराओ[5], निःसंदेह वे प्रश्न किए जाने वाले हैं।
مَا لَكُمْ لَا تَنَاصَرُونَ ٢٥
तुम्हें क्या हुआ कि तुम एक-दूसरे की सहायता नहीं करते?
بَلْ هُمُ ٱلْيَوْمَ مُسْتَسْلِمُونَ ٢٦
बल्कि, आज वे सर्वथा आज्ञाकारी हैं।
وَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ يَتَسَآءَلُونَ ٢٧
और वे एक-दूसरे की ओर रुख़ करके परस्पर प्रश्न करेंगे।[6]
قَالُوٓا۟ إِنَّكُمْ كُنتُمْ تَأْتُونَنَا عَنِ ٱلْيَمِينِ ٢٨
वे कहेंगे : निःसंदेह तुम हमारे पास दाहिने[7] से आया करते थे।
قَالُوا۟ بَل لَّمْ تَكُونُوا۟ مُؤْمِنِينَ ٢٩
वे[8] कहेंगे : बल्कि तुम (स्वयं) ईमान वाले न थे।
وَمَا كَانَ لَنَا عَلَيْكُم مِّن سُلْطَـٰنٍۭ ۖ بَلْ كُنتُمْ قَوْمًا طَـٰغِينَ ٣٠
तथा हमारा तुमपर कोई ज़ोर[9] न था, बल्कि तुम (स्वंय) हद से बढ़ने वाले लोग थे।
فَحَقَّ عَلَيْنَا قَوْلُ رَبِّنَآ ۖ إِنَّا لَذَآئِقُونَ ٣١
तो हमपर हमारे पालनहार का कथन सिद्ध हो गया। निःसंदेह हम निश्चय (यातना) चखने वाले हैं।
فَأَغْوَيْنَـٰكُمْ إِنَّا كُنَّا غَـٰوِينَ ٣٢
तो हमने तुम्हें गुमराह किया। निःसंदेह हम स्वयं गुमराह थे।
فَإِنَّهُمْ يَوْمَئِذٍ فِى ٱلْعَذَابِ مُشْتَرِكُونَ ٣٣
तो निश्चय ही वे उस दिन यातना में सहभागी होंगे।
إِنَّا كَذَٰلِكَ نَفْعَلُ بِٱلْمُجْرِمِينَ ٣٤
निःसंदेह हम अपराधियों के साथ ऐसा ही किया करते हैं।
إِنَّهُمْ كَانُوٓا۟ إِذَا قِيلَ لَهُمْ لَآ إِلَـٰهَ إِلَّا ٱللَّهُ يَسْتَكْبِرُونَ ٣٥
निःसंदेह वे ऐसे लोग थे कि जब उनसे कहा जाता कि अल्लाह के सिवा कोई पूज्य (इबादत के योग्य) नहीं, तो वे अभिमान करते थे।
وَيَقُولُونَ أَئِنَّا لَتَارِكُوٓا۟ ءَالِهَتِنَا لِشَاعِرٍ مَّجْنُونٍۭ ٣٦
तथा कहते थे : क्या सचमुच हम अपने पूज्यों को एक दीवाने कवि के कारण छोड़ देने वाले हैं?
بَلْ جَآءَ بِٱلْحَقِّ وَصَدَّقَ ٱلْمُرْسَلِينَ ٣٧
बल्कि वह सत्य लेकर आए हैं तथा उन्होंने सभी रसूलों की पुष्टि की है।
إِنَّكُمْ لَذَآئِقُوا۟ ٱلْعَذَابِ ٱلْأَلِيمِ ٣٨
निःसंदेह तुम निश्चय दुःखदायी यातना चखने वाले हो।
وَمَا تُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ ٣٩
तथा तुम्हें केवल उसी का बदला दिया जाएगा, जो तुम किया करते थे।
إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ ٤٠
परंतु अल्लाह के ख़ालिस (विशुद्ध) किए हुए बंदे।
أُو۟لَـٰٓئِكَ لَهُمْ رِزْقٌ مَّعْلُومٌ ٤١
यही लोग हैं, जिनके लिए निर्धारित रोज़ी है।
فَوَٰكِهُ ۖ وَهُم مُّكْرَمُونَ ٤٢
प्रत्येक प्रकार के फल। तथा वे सम्मानित किए गए हैं।
فِى جَنَّـٰتِ ٱلنَّعِيمِ ٤٣
नेमत के बाग़ों में।
عَلَىٰ سُرُرٍ مُّتَقَـٰبِلِينَ ٤٤
तख़्तों पर आमने-सामने बैठे होंगे।
يُطَافُ عَلَيْهِم بِكَأْسٍ مِّن مَّعِينٍۭ ٤٥
उनपर प्रवाहित शराब के प्याले फिराए जाएँगे।
بَيْضَآءَ لَذَّةٍ لِّلشَّـٰرِبِينَ ٤٦
जो सफ़ेद होगी, पीने वालों के लिए स्वादिष्ट होगी।
لَا فِيهَا غَوْلٌ وَلَا هُمْ عَنْهَا يُنزَفُونَ ٤٧
न उसमें कोई सिरदर्द होगा, और न वे उससे मदहोश होंगे।
وَعِندَهُمْ قَـٰصِرَٰتُ ٱلطَّرْفِ عِينٌ ٤٨
तथा उनके पास दृष्टि नीची रखने वाली, बड़ी आँखों वाली स्त्रियाँ होंगी।
كَأَنَّهُنَّ بَيْضٌ مَّكْنُونٌ ٤٩
मानो वे छिपाकर रखे हुए अंडे हों।[10]
فَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ يَتَسَآءَلُونَ ٥٠
फिर वे एक-दूसरे के सम्मुख होकर आपस में प्रश्न करेंगे।
قَالَ قَآئِلٌ مِّنْهُمْ إِنِّى كَانَ لِى قَرِينٌ ٥١
उनमें से एक कहने वाला कहेगा : मेरा एक साथी था।
يَقُولُ أَءِنَّكَ لَمِنَ ٱلْمُصَدِّقِينَ ٥٢
वह कहा करता था कि क्या सचमुच तू भी (मरणोपरांत पुनर्जीवन को) मानने वालों में से है?
أَءِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَـٰمًا أَءِنَّا لَمَدِينُونَ ٥٣
क्या जब हम मर गए और हम मिट्टी तथा हड्डियाँ हो गए, तो क्या सचमुच हम अवश्य बदला दिए जाने वाले हैं?
قَالَ هَلْ أَنتُم مُّطَّلِعُونَ ٥٤
वह कहेगा : क्या तुम झाँककर देखने वाले हो?
فَٱطَّلَعَ فَرَءَاهُ فِى سَوَآءِ ٱلْجَحِيمِ ٥٥
फिर वह झाँकेगा, तो उसे भड़कती हुई आग के बीच में देखेगा।
قَالَ تَٱللَّهِ إِن كِدتَّ لَتُرْدِينِ ٥٦
कहेगा : अल्लाह की कसम! निश्चय तू क़रीब था कि मुझे नष्ट ही कर दे।
وَلَوْلَا نِعْمَةُ رَبِّى لَكُنتُ مِنَ ٱلْمُحْضَرِينَ ٥٧
और यदि मेरे पालनहार की अनुकंपा न होती, तो निश्चय मैं भी (जहन्नम में) उपस्थित किए गए लोगों में से होता।
أَفَمَا نَحْنُ بِمَيِّتِينَ ٥٨
तो क्या (यह सही नहीं है) कि हम कभी मरने वाले नहीं हैं?
إِلَّا مَوْتَتَنَا ٱلْأُولَىٰ وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّبِينَ ٥٩
सिवाय अपनी प्रथम मौत के, और न हम कभी यातना दिए जाने वाले हैं।
إِنَّ هَـٰذَا لَهُوَ ٱلْفَوْزُ ٱلْعَظِيمُ ٦٠
निश्चय यही तो बहुत बड़ी सफलता है।
لِمِثْلِ هَـٰذَا فَلْيَعْمَلِ ٱلْعَـٰمِلُونَ ٦١
इसी (जैसी सफलता) के लिए कर्म करने वालों को कर्म करना चाहिए।
أَذَٰلِكَ خَيْرٌ نُّزُلًا أَمْ شَجَرَةُ ٱلزَّقُّومِ ٦٢
क्या यह आतिथ्य उत्तम है या थोहड़ का वृक्ष?
إِنَّا جَعَلْنَـٰهَا فِتْنَةً لِّلظَّـٰلِمِينَ ٦٣
निःसंदेह हमने उसे अत्याचारियों के लिए एक परीक्षा बनाया है।
إِنَّهَا شَجَرَةٌ تَخْرُجُ فِىٓ أَصْلِ ٱلْجَحِيمِ ٦٤
निःसंदेह वह ऐसा वृक्ष है, जो जहन्नम के तल में उगता है।
طَلْعُهَا كَأَنَّهُۥ رُءُوسُ ٱلشَّيَـٰطِينِ ٦٥
उसके गुच्छे ऐसे हैं मानो वे शैतानों के सिर हों।
فَإِنَّهُمْ لَـَٔاكِلُونَ مِنْهَا فَمَالِـُٔونَ مِنْهَا ٱلْبُطُونَ ٦٦
तो वे (जहन्नमवासी) निश्चय उसमें से खाने वाले हैं। फिर उससे पेट भरने वाले हैं।
ثُمَّ إِنَّ لَهُمْ عَلَيْهَا لَشَوْبًا مِّنْ حَمِيمٍ ٦٧
फिर निःसंदेह उनके लिए उसपर खौलते हुए पानी का मिश्रण है।
ثُمَّ إِنَّ مَرْجِعَهُمْ لَإِلَى ٱلْجَحِيمِ ٦٨
फिर निःसंदेह उनकी वापसी निश्चय उसी भड़कती हुई आग की ओर होगी।
إِنَّهُمْ أَلْفَوْا۟ ءَابَآءَهُمْ ضَآلِّينَ ٦٩
निःसंदेह उन्होंने अपने बाप-दादा को गुमराह पाया।
فَهُمْ عَلَىٰٓ ءَاثَـٰرِهِمْ يُهْرَعُونَ ٧٠
तो वे उन्हीं के पदचिह्नों पर दौड़े चले जा रहे हैं।[11]
وَلَقَدْ ضَلَّ قَبْلَهُمْ أَكْثَرُ ٱلْأَوَّلِينَ ٧١
और निःसंदेह इनसे पहले अगले लोगों में से अधिकतर लोग गुमराह हो चुके हैं।
وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا فِيهِم مُّنذِرِينَ ٧٢
तथा निःसंदेह हमने उनके अंदर कई डराने वाले भेजे।
فَٱنظُرْ كَيْفَ كَانَ عَـٰقِبَةُ ٱلْمُنذَرِينَ ٧٣
तो देखो कि उन डराए जाने वालों का परिणाम[12] कैसा हुआ?
إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ ٧٤
सिवाय अल्लाह के ख़ालिस किए हुए बंदों के।
وَلَقَدْ نَادَىٰنَا نُوحٌ فَلَنِعْمَ ٱلْمُجِيبُونَ ٧٥
तथा निःसंदेह नूह ने हमें पुकारा, तो निश्चय हम अच्छे स्वीकार करने वाले हैं।
وَنَجَّيْنَـٰهُ وَأَهْلَهُۥ مِنَ ٱلْكَرْبِ ٱلْعَظِيمِ ٧٦
और हमने उसे और उसके घर वालों को बहुत बड़ी आपदा से बचा लिया।
وَجَعَلْنَا ذُرِّيَّتَهُۥ هُمُ ٱلْبَاقِينَ ٧٧
तथा हमने उसकी संतति ही को बाक़ी रहने वाला[13] बना दिया।
وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِى ٱلْـَٔاخِرِينَ ٧٨
और हमने पीछे आने वालों में उसके लिए (अच्छा स्मरण) बाक़ी रखा।
سَلَـٰمٌ عَلَىٰ نُوحٍ فِى ٱلْعَـٰلَمِينَ ٧٩
सर्व संसार में नूह़ पर सलाम[14] हो।
إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ ٨٠
निःसंदेह हम सदाचारियों को इसी तरह बदला देते हैं।
إِنَّهُۥ مِنْ عِبَادِنَا ٱلْمُؤْمِنِينَ ٨١
निश्चय वह हमारे ईमान वाले बंदों में से था।
ثُمَّ أَغْرَقْنَا ٱلْـَٔاخَرِينَ ٨٢
फिर हमने दूसरों को डुबो दिया।
۞ وَإِنَّ مِن شِيعَتِهِۦ لَإِبْرَٰهِيمَ ٨٣
और निःसंदेह उसी के तरीक़े पर चलने वालों में से निश्चय इबराहीम (भी) थे।
إِذْ جَآءَ رَبَّهُۥ بِقَلْبٍ سَلِيمٍ ٨٤
(उस समय को याद करें) जब वह अपने पालनहार के पास शुद्ध दिल लेकर आए।
إِذْ قَالَ لِأَبِيهِ وَقَوْمِهِۦ مَاذَا تَعْبُدُونَ ٨٥
जब उसने अपने बाप तथा अपनी जाति से कहा : तुम किस चीज़ की इबादत करते हो?
أَئِفْكًا ءَالِهَةً دُونَ ٱللَّهِ تُرِيدُونَ ٨٦
क्या अल्लाह को छोड़कर अपने गढ़े हुए पूज्यों को चाहते हो?
فَمَا ظَنُّكُم بِرَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ٨٧
तो सर्व संसार के पालनहार के विषय में तुम्हारा क्या गुमान है?
فَنَظَرَ نَظْرَةً فِى ٱلنُّجُومِ ٨٨
फिर उसने एक दृष्टि तारों पर डाली।[15]
فَقَالَ إِنِّى سَقِيمٌ ٨٩
फिर कहा : मैं तो बीमार हूँ।
فَتَوَلَّوْا۟ عَنْهُ مُدْبِرِينَ ٩٠
तो वे उससे पीठ फेरकर वापस चले गए।
فَرَاغَ إِلَىٰٓ ءَالِهَتِهِمْ فَقَالَ أَلَا تَأْكُلُونَ ٩١
फिर वह चुपके से उनके पूज्यों की ओर गया और कहा : क्या तुम खाते नहीं?
مَا لَكُمْ لَا تَنطِقُونَ ٩٢
तुम्हें क्या हुआ कि तुम बोलते नहीं?
فَرَاغَ عَلَيْهِمْ ضَرْبًۢا بِٱلْيَمِينِ ٩٣
फिर वह दाएँ हाथ से मारते हुए उनपर पिल पड़ा।
فَأَقْبَلُوٓا۟ إِلَيْهِ يَزِفُّونَ ٩٤
फिर वे दौड़ते हुए उसकी ओर आए।
قَالَ أَتَعْبُدُونَ مَا تَنْحِتُونَ ٩٥
उसने कहा : क्या तुम उसकी इबादत करते हो, जिसे ख़ुद तराशते हो?
وَٱللَّهُ خَلَقَكُمْ وَمَا تَعْمَلُونَ ٩٦
हालाँकि अल्लाह ही ने तुम्हें पैदा किया तथा उसे भी जो तुम करते हो।
قَالُوا۟ ٱبْنُوا۟ لَهُۥ بُنْيَـٰنًا فَأَلْقُوهُ فِى ٱلْجَحِيمِ ٩٧
उन्होंने कहा : इसके लिए एक इमारत (अग्नि-कुंड) बनाओ, फिर इसे भड़कती आग में फेंक दो।
فَأَرَادُوا۟ بِهِۦ كَيْدًا فَجَعَلْنَـٰهُمُ ٱلْأَسْفَلِينَ ٩٨
अतः उन्होंने उसके साथ एक चाल चलनी चाही, तो हमने उन्हीं को सबसे नीचा कर दिया।
وَقَالَ إِنِّى ذَاهِبٌ إِلَىٰ رَبِّى سَيَهْدِينِ ٩٩
तथा उसने कहा : निःसंदेह मैं अपने पालनहार की ओर[16] जाने वाला हूँ। वह मुझे अवश्य सीधा रास्ता दिखाएगा।
رَبِّ هَبْ لِى مِنَ ٱلصَّـٰلِحِينَ ١٠٠
ऐ मेरे पालनहार! मुझे एक सदाचारी पुत्र प्रदान कर।
فَبَشَّرْنَـٰهُ بِغُلَـٰمٍ حَلِيمٍ ١٠١
तो हमने उसे एक सहनशील पुत्र की शुभ सूचना दी।
فَلَمَّا بَلَغَ مَعَهُ ٱلسَّعْىَ قَالَ يَـٰبُنَىَّ إِنِّىٓ أَرَىٰ فِى ٱلْمَنَامِ أَنِّىٓ أَذْبَحُكَ فَٱنظُرْ مَاذَا تَرَىٰ ۚ قَالَ يَـٰٓأَبَتِ ٱفْعَلْ مَا تُؤْمَرُ ۖ سَتَجِدُنِىٓ إِن شَآءَ ٱللَّهُ مِنَ ٱلصَّـٰبِرِينَ ١٠٢
फिर जब वह उसके साथ दौड़-धूप की आयु को पहुँचा, तो उसने कहा : ऐ मेरे प्रिय बेटे! निःसंदेह मैं स्वप्न में देखता हूँ कि मैं तुझे ज़बह कर रहा हूँ। तो अब देख, तेरा क्या विचार है? उसने कहा : ऐ मेरे पिता! आपको जो आदेश दिया जा रहा है उसे कर डालिए। अगर अल्लाह ने चाहा, तो आप अवश्य मुझे धैर्यवानों में से पाएँगे।
فَلَمَّآ أَسْلَمَا وَتَلَّهُۥ لِلْجَبِينِ ١٠٣
अंततः जब दोनों (अल्लाह के आदेश के प्रति) समर्पित हो गए, और उसने उसे पेशानी के एक किनारे पर गिरा दिया।
وَنَـٰدَيْنَـٰهُ أَن يَـٰٓإِبْرَٰهِيمُ ١٠٤
और हमने उसे आवाज़ दी कि ऐ इबराहीम!
قَدْ صَدَّقْتَ ٱلرُّءْيَآ ۚ إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ ١٠٥
निश्चय तूने स्वप्न को सच कर दिखाया। हम सदाचारियों को इसी तरह बदला प्रदान करते हैं।
إِنَّ هَـٰذَا لَهُوَ ٱلْبَلَـٰٓؤُا۟ ٱلْمُبِينُ ١٠٦
निःसंदेह यही तो निश्चय खुला परीक्षण है।
وَفَدَيْنَـٰهُ بِذِبْحٍ عَظِيمٍ ١٠٧
और हमने उसके फ़िदया (छुड़ौती) में एक बहुत बड़ा ज़बीहा[17] दिया।
وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِى ٱلْـَٔاخِرِينَ ١٠٨
और हमने पीछे आने वालों में उसके लिए (अच्छा स्मरण) बाक़ी रखा।
سَلَـٰمٌ عَلَىٰٓ إِبْرَٰهِيمَ ١٠٩
सलाम हो इबराहीम पर।
كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ ١١٠
हम इसी तरह सदाचारियों को बदला प्रदान करते हैं।
إِنَّهُۥ مِنْ عِبَادِنَا ٱلْمُؤْمِنِينَ ١١١
निश्चय वह हमारे ईमान वाले बंदों में से था।
وَبَشَّرْنَـٰهُ بِإِسْحَـٰقَ نَبِيًّا مِّنَ ٱلصَّـٰلِحِينَ ١١٢
तथा हमने उसे इसहाक़ की शुभ सूचना दी, जो नबी होगा, सदाचारियों में से (होगा)।[18]
وَبَـٰرَكْنَا عَلَيْهِ وَعَلَىٰٓ إِسْحَـٰقَ ۚ وَمِن ذُرِّيَّتِهِمَا مُحْسِنٌ وَظَالِمٌ لِّنَفْسِهِۦ مُبِينٌ ١١٣
तथा हमने उसपर और इसहाक़ पर बरकत उतारी। और उन दोनों की संतति में से कोई सदाचारी है और कोई अपने आप पर खुला अत्याचार करने वाला है।
وَلَقَدْ مَنَنَّا عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَـٰرُونَ ١١٤
तथा निःसंदेह हमने मूसा और हारून पर उपकार किया।
وَنَجَّيْنَـٰهُمَا وَقَوْمَهُمَا مِنَ ٱلْكَرْبِ ٱلْعَظِيمِ ١١٥
और हमने उन दोनों को और उन दोनों की जाति को बहुत बड़ी विपत्ति से छुटकारा दिया।
وَنَصَرْنَـٰهُمْ فَكَانُوا۟ هُمُ ٱلْغَـٰلِبِينَ ١١٦
तथा हमने उनकी सहायता की, तो वही प्रभुत्वशाली रहे।
وَءَاتَيْنَـٰهُمَا ٱلْكِتَـٰبَ ٱلْمُسْتَبِينَ ١١٧
तथा हमने उन दोनों को अत्यंत स्पष्ट पुस्तक (तौरात) प्रदान की।
وَهَدَيْنَـٰهُمَا ٱلصِّرَٰطَ ٱلْمُسْتَقِيمَ ١١٨
और हमने उन दोनों को सीधे मार्ग पर चलाया।
وَتَرَكْنَا عَلَيْهِمَا فِى ٱلْـَٔاخِرِينَ ١١٩
और हमने पीछे आने वालों में उन दोनों का अच्छा स्मरण छोड़ा।
سَلَـٰمٌ عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَـٰرُونَ ١٢٠
सलाम हो मूसा और हारून पर।
إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ ١٢١
निःसंदेह हम सदाचारियों को इसी तरह बदला देते हैं।
إِنَّهُمَا مِنْ عِبَادِنَا ٱلْمُؤْمِنِينَ ١٢٢
निःसंदेह वे दोनों हमारे ईमान वाले बंदों में से थे।
وَإِنَّ إِلْيَاسَ لَمِنَ ٱلْمُرْسَلِينَ ١٢٣
तथा निःसंदेह इलयास निश्चय नबियों में से थे।
إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِۦٓ أَلَا تَتَّقُونَ ١٢٤
जब उसने अपनी जाति से कहा : क्या तुम डरते नहीं?
أَتَدْعُونَ بَعْلًا وَتَذَرُونَ أَحْسَنَ ٱلْخَـٰلِقِينَ ١٢٥
क्या तुम 'बअ्ल' (नामक मूर्ति) को पुकारते हो? तथा पैदा करने वालों में सबस बेहतर को छोड़ देते हो?
ٱللَّهَ رَبَّكُمْ وَرَبَّ ءَابَآئِكُمُ ٱلْأَوَّلِينَ ١٢٦
अल्लाह को, जो तुम्हारा पालनहार है तथा तुम्हारे पहले बाप-दादा का पालनहार है।
فَكَذَّبُوهُ فَإِنَّهُمْ لَمُحْضَرُونَ ١٢٧
किंतु उन्होंने उसे झुठला दिया। तो निश्चय वे अवश्य हाज़िर किए जाने वाले हैं।
إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ ١٢٨
सिवाय अल्लाह के ख़ालिस किए हुए बंदों के।
وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِى ٱلْـَٔاخِرِينَ ١٢٩
और हमने पीछे आने वालों में उसके लिए (अच्छा स्मरण) बाक़ी रखा।
سَلَـٰمٌ عَلَىٰٓ إِلْ يَاسِينَ ١٣٠
सलाम हो इल्यासीन[19] पर।
إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ ١٣١
निःसंदेह हम सदाचारियों को इसी तरह बदला देते हैं।
إِنَّهُۥ مِنْ عِبَادِنَا ٱلْمُؤْمِنِينَ ١٣٢
निश्चय वह हमारे ईमान वाले बंदों में से था।
وَإِنَّ لُوطًا لَّمِنَ ٱلْمُرْسَلِينَ ١٣٣
और निःसंदेह लूत निश्चय रसूलों में से था।
إِذْ نَجَّيْنَـٰهُ وَأَهْلَهُۥٓ أَجْمَعِينَ ١٣٤
जब हमने उसे तथा उसके सब घर वालों को बचाया।
إِلَّا عَجُوزًا فِى ٱلْغَـٰبِرِينَ ١٣٥
सिवाय एक बुढ़िया[20] के, जो पीछे रह जाने वालों में से थी।
ثُمَّ دَمَّرْنَا ٱلْـَٔاخَرِينَ ١٣٦
फिर हमने दूसरों का विनाश कर दिया।
وَإِنَّكُمْ لَتَمُرُّونَ عَلَيْهِم مُّصْبِحِينَ ١٣٧
तथा निःसंदेह तुम[21] निश्चय सुबह के समय जाते हुए उनपर से गुज़रते हो।
وَبِٱلَّيْلِ ۗ أَفَلَا تَعْقِلُونَ ١٣٨
तथा रात के समय भी। तो क्या तुम समझते नहीं?
وَإِنَّ يُونُسَ لَمِنَ ٱلْمُرْسَلِينَ ١٣٩
तथा निःसंदेह यूनुस निश्चय रसूलों में से था।
إِذْ أَبَقَ إِلَى ٱلْفُلْكِ ٱلْمَشْحُونِ ١٤٠
जब वह भरी नाव की ओर भागकर गया।[22]
فَسَاهَمَ فَكَانَ مِنَ ٱلْمُدْحَضِينَ ١٤١
फिर वह क़ुर'आ में शामिल हुआ, तो हारने वालों में से हो गया।
فَٱلْتَقَمَهُ ٱلْحُوتُ وَهُوَ مُلِيمٌ ١٤٢
फिर मछली ने उसे निगल लिया, इस हाल में कि वह निंदनीय था।
فَلَوْلَآ أَنَّهُۥ كَانَ مِنَ ٱلْمُسَبِّحِينَ ١٤٣
फिर अगर यह बात न होती कि वह अल्लाह की पवित्रता का वर्णन करने वालों में से था।
لَلَبِثَ فِى بَطْنِهِۦٓ إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَ ١٤٤
तो निश्चय वह उसके पेट में उस दिन तक रहता, जिसमें लोग उठाए जाएँगे।[23]
۞ فَنَبَذْنَـٰهُ بِٱلْعَرَآءِ وَهُوَ سَقِيمٌ ١٤٥
फिर हमने उसे चटियल मैदान में फेंक दिया, इस हाल में कि वह बीमार[24] था।
وَأَنۢبَتْنَا عَلَيْهِ شَجَرَةً مِّن يَقْطِينٍ ١٤٦
तथा हमने उसपर एक लता वाला वृक्ष उगा दिया।[25]
وَأَرْسَلْنَـٰهُ إِلَىٰ مِا۟ئَةِ أَلْفٍ أَوْ يَزِيدُونَ ١٤٧
तथा हमने उसे एक लाख की ओर भेजा, बल्कि वे अधिक होंगे।
فَـَٔامَنُوا۟ فَمَتَّعْنَـٰهُمْ إِلَىٰ حِينٍ ١٤٨
चुनाँचे वे ईमान ले आए, तो हमने उन्हें एक समय तक लाभ उठाने दिया।[26]
فَٱسْتَفْتِهِمْ أَلِرَبِّكَ ٱلْبَنَاتُ وَلَهُمُ ٱلْبَنُونَ ١٤٩
तो (ऐ नबी!) आप उनसे पूछें कि क्या आपके पालनहार के लिए बेटियाँ हैं और उनके लिए बेटे?
أَمْ خَلَقْنَا ٱلْمَلَـٰٓئِكَةَ إِنَـٰثًا وَهُمْ شَـٰهِدُونَ ١٥٠
या हमने फ़रिश्तों को मादा पैदा किया, जबकि वे उस समय उपस्थित[27] थे?
أَلَآ إِنَّهُم مِّنْ إِفْكِهِمْ لَيَقُولُونَ ١٥١
सुन लो! निःसंदेह वे निश्चय अपने झूठ ही से कहते हैं।
وَلَدَ ٱللَّهُ وَإِنَّهُمْ لَكَـٰذِبُونَ ١٥٢
कि अल्लाह ने संतान बनाया है। और निःसंदेह वे निश्चय झूठे हैं।
أَصْطَفَى ٱلْبَنَاتِ عَلَى ٱلْبَنِينَ ١٥٣
क्या उसने पुत्रियों को पुत्रों पर प्राथमिकता दी?
مَا لَكُمْ كَيْفَ تَحْكُمُونَ ١٥٤
तुम्हें क्या हो गया है, तुम कैसा फ़ैसला कर रहे हो?
أَفَلَا تَذَكَّرُونَ ١٥٥
तो क्या तुम शिक्षा ग्रहण नहीं करते?
أَمْ لَكُمْ سُلْطَـٰنٌ مُّبِينٌ ١٥٦
या तुम्हारे पास कोई स्पष्ट प्रमाण है?
فَأْتُوا۟ بِكِتَـٰبِكُمْ إِن كُنتُمْ صَـٰدِقِينَ ١٥٧
तो लाओ अपनी किताब, यदि तुम सच्चे हो?
وَجَعَلُوا۟ بَيْنَهُۥ وَبَيْنَ ٱلْجِنَّةِ نَسَبًا ۚ وَلَقَدْ عَلِمَتِ ٱلْجِنَّةُ إِنَّهُمْ لَمُحْضَرُونَ ١٥٨
और उन्होंने अल्लाह तथा जिन्नों के बीच रिश्तेदारी बना दी। हालाँकि निःसंदेह जिन्न जान चुके हैं कि निःसंदेह वे (मुश्रिक) अवश्य उपस्थित किए जाने वाले हैं।[28]
سُبْحَـٰنَ ٱللَّهِ عَمَّا يَصِفُونَ ١٥٩
अल्लाह उन बातों से पवित्र है, जो वे वर्णन करते हैं।
إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ ١٦٠
सिवाय अल्लाह के ख़ालिस किए हुए बंदों के।[29]
فَإِنَّكُمْ وَمَا تَعْبُدُونَ ١٦١
अतः निःसंदेह तुम तथा जिनकी तुम पूजा करते हो।
مَآ أَنتُمْ عَلَيْهِ بِفَـٰتِنِينَ ١٦٢
तुम उसके विरुद्ध (किसी को) बहकाने वाले नहीं।
إِلَّا مَنْ هُوَ صَالِ ٱلْجَحِيمِ ١٦٣
परंतु उसको, जो भड़कती आग में प्रवेश करने वाला है।
وَمَا مِنَّآ إِلَّا لَهُۥ مَقَامٌ مَّعْلُومٌ ١٦٤
और हम (फ़रिश्तों) में से जो भी है उसका एक नियत स्थान है।
وَإِنَّا لَنَحْنُ ٱلصَّآفُّونَ ١٦٥
तथा निःसंदेह हम निश्चय पंक्तिबद्ध रहने वाले हैं।
وَإِنَّا لَنَحْنُ ٱلْمُسَبِّحُونَ ١٦٦
तथा निःसंदेह हम निश्चय तस्बीह़ (पवित्रता गान) करने वाले हैं।
وَإِن كَانُوا۟ لَيَقُولُونَ ١٦٧
तथा निःसंदेह वे (मुश्रिक) तो कहा करते थे
لَوْ أَنَّ عِندَنَا ذِكْرًا مِّنَ ٱلْأَوَّلِينَ ١٦٨
यदि हमारे पास पहले लोगों की कोई शिक्षा (किताब) होती,
لَكُنَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ ١٦٩
तो हम अवश्य अल्लाह के ख़ालिस (चुने हुए) बंदे होते।
فَكَفَرُوا۟ بِهِۦ ۖ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ ١٧٠
(फिर जब किताब आ गई) तो उन्होंने उसका इनकार कर दिया। अतः जल्द ही उन्हें पता चल जाएगा।
وَلَقَدْ سَبَقَتْ كَلِمَتُنَا لِعِبَادِنَا ٱلْمُرْسَلِينَ ١٧١
और निःसंदेह हमारे भेजे हुए बंदों के लिए हमारी बात पहले ही निश्चित हो चुकी
إِنَّهُمْ لَهُمُ ٱلْمَنصُورُونَ ١٧٢
कि निःसंदेह वही हैं, जिनकी सहायता की जाएगी।
وَإِنَّ جُندَنَا لَهُمُ ٱلْغَـٰلِبُونَ ١٧٣
तथा निःसंदेह हमारी सेना ही निश्चय प्रभुत्वशाली रहेगी।
فَتَوَلَّ عَنْهُمْ حَتَّىٰ حِينٍ ١٧٤
तो आप कुछ समय तक के लिए उनसे मुँह फेर लें।
وَأَبْصِرْهُمْ فَسَوْفَ يُبْصِرُونَ ١٧٥
तथा उन्हें देखते रहें। वे भी शीघ्र ही देख लेंगे।
أَفَبِعَذَابِنَا يَسْتَعْجِلُونَ ١٧٦
तो क्या वे हमारी यातना की शीघ्र माँग कर रहे हैं?
فَإِذَا نَزَلَ بِسَاحَتِهِمْ فَسَآءَ صَبَاحُ ٱلْمُنذَرِينَ ١٧٧
फिर जब वह उनके आँगन में उतरेगी, तो डराए गए लोगों की सुबह बहुत बुरी होगी।
وَتَوَلَّ عَنْهُمْ حَتَّىٰ حِينٍ ١٧٨
َऔर आप कुछ समय तक के लिए उनसे मुँह फेर लें।
وَأَبْصِرْ فَسَوْفَ يُبْصِرُونَ ١٧٩
तथा देखते रहें। जल्द ही वे भी देख लेंगे।
سُبْحَـٰنَ رَبِّكَ رَبِّ ٱلْعِزَّةِ عَمَّا يَصِفُونَ ١٨٠
पवित्र है आपका पालनहार, पराक्रम व शक्ति का स्वामी!, उस बात से, जो वे बयान करते हैं।
وَسَلَـٰمٌ عَلَى ٱلْمُرْسَلِينَ ١٨١
तथा सलाम हो रसूलों पर।
وَٱلْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ ٱلْعَـٰلَمِينَ ١٨٢
और हर प्रकार की प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जो सर्व संसार का पालनहार है।
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