सूरह 15 · 99 आयतें · मक्की

Al-Hijr

अल-हिज्र

الحجر
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15:1पृष्ठ 262 · जुज़ 14

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ الٓر ۚ تِلْكَ ءَايَـٰتُ ٱلْكِتَـٰبِ وَقُرْءَانٍ مُّبِينٍ ۝١

अलिफ़, लाम, रा। ये किताब और स्पष्ट क़ुरआन की आयतें हैं।

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मेरा चिंतन
15:2पृष्ठ 262 · जुज़ 14

رُّبَمَا يَوَدُّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ لَوْ كَانُوا۟ مُسْلِمِينَ ۝٢

(एक समय आएगा कि) काफ़िर चाहेंगे कि काश वे (दुनिया में) मुसलमान होते![1]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[1] ऐसा उस समय होगा जब फ़रिश्ते उनकी आत्मा निकालने आएँगे, और उनको उनका नरक का स्थान दिखा देंगे। और क़ियामत के दिन तो ऐसी दुर्दशा होगी कि धूल हो जाने की कामना करेंगे। (देखिए : सूरतुन-नबा, आयत : 40)
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मेरा चिंतन
15:3पृष्ठ 262 · जुज़ 14

ذَرْهُمْ يَأْكُلُوا۟ وَيَتَمَتَّعُوا۟ وَيُلْهِهِمُ ٱلْأَمَلُ ۖ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ ۝٣

(ऐ नबी!) आप उन्हें छोड़ दें। वे खाएँ और लाभ उठाएँ, तथा (लंबी) आशा उन्हें ग़ाफ़िल रखे, फिर शीघ्र ही जान लेंगे।[2]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[2] अपने दुष्परिणाम को।
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मेरा चिंतन
15:4पृष्ठ 262 · जुज़ 14

وَمَآ أَهْلَكْنَا مِن قَرْيَةٍ إِلَّا وَلَهَا كِتَابٌ مَّعْلُومٌ ۝٤

और हमने जिस बस्ती को भी नष्ट किया, उसका एक निर्धारित समय था।

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मेरा चिंतन
15:5पृष्ठ 262 · जुज़ 14

مَّا تَسْبِقُ مِنْ أُمَّةٍ أَجَلَهَا وَمَا يَسْتَـْٔخِرُونَ ۝٥

कोई जाति अपने नियत समय से न आगे बढ़ती है और न वे पीछे रहते हैं।

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मेरा चिंतन
15:6पृष्ठ 262 · जुज़ 14

وَقَالُوا۟ يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِى نُزِّلَ عَلَيْهِ ٱلذِّكْرُ إِنَّكَ لَمَجْنُونٌ ۝٦

तथा उन (काफ़िरों) ने कहा : ऐ वह व्यक्ति जिसपर स्मरण (क़ुरआन) अवतरित किया गया है, निःसंदेह तू तो पागल है।

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मेरा चिंतन
15:7पृष्ठ 262 · जुज़ 14

لَّوْ مَا تَأْتِينَا بِٱلْمَلَـٰٓئِكَةِ إِن كُنتَ مِنَ ٱلصَّـٰدِقِينَ ۝٧

यदि तू सच्चों में से है, तो हमारे पास फ़रिश्तों को क्यों नहीं ले आता?

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मेरा चिंतन
15:8पृष्ठ 262 · जुज़ 14

مَا نُنَزِّلُ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةَ إِلَّا بِٱلْحَقِّ وَمَا كَانُوٓا۟ إِذًا مُّنظَرِينَ ۝٨

हम फ़रिश्तों को सत्य के साथ ही उतारते हैं और उस समय उन्हें कोई मोहलत नहीं दी जाती।

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मेरा चिंतन
15:9पृष्ठ 262 · जुज़ 14

إِنَّا نَحْنُ نَزَّلْنَا ٱلذِّكْرَ وَإِنَّا لَهُۥ لَحَـٰفِظُونَ ۝٩

निःसंदेह हमने ही यह ज़िक्र (क़ुरआन) उतारी है और निःसंदेह हम ही इसकी अवश्य रक्षा करने वाले[3] हैं।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[3] यह ऐतिहासिक सत्य है। इस विश्व के धर्म ग्रंथों में क़ुरआन ही एक ऐसा धर्म ग्रंथ है जिसमें उसके अवतरित होने के समय से अब तक एक अक्षर तो क्या एक मात्रा का भी परिवर्तन नहीं हुआ। और न हो सकता है। यह विशेषता इस विश्व के किसी भी धर्म ग्रंथ को प्राप्त नहीं है। तौरात हो अथवा इंजील या इस विश्व के अन्य धर्म शास्त्र हों, सब में इतने परिवर्तन किए गए हैं कि सत्य मूल धर्म की पहचान असंभव हो गई है। इसी प्रकार इस (क़ुरआन) की व्याख्या जिसे ह़दीस कहा जाता है, वह भी सुरक्षित है। और उसका पालन किए बिना किसी का जीवन इस्लामी नहीं हो सकता। क्योंकि क़ुरआन का आदेश है कि रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) तुम्हें जो दें उसको ले लो। और जिससे रोक दें उससे रुक जाओ। (देखिए सूरतुल-ह़श्र, आयत : 7) क़ुरआन कहता है कि ऐ नबी! अल्लाह ने आप पर क़ुरआन इसलिए उतारा है कि आप लोगों के लिए उसकी व्याख्या कर दें। क़ुरआन कहता है कि ऐ नबी! (सूरतुन-नह़्ल, आयत : 44) जिस व्याख्या से नमाज़, रोज़ा आदि इस्लामी अनिवार्य कर्तव्यों की विधि का ज्ञान होता है। इसीलिए उसको सुरक्षित किया गया है। और हम ह़दीस के एक-एक रावी के जन्म और मौत का समय और उसकी पूरी दशा को जानते हैं। और यह भी जानते हैं कि वह विश्वसनीय है या नहीं? इस प्रकार हम यह कह सकते हैं कि इस संसार में इस्लाम के सिवा कोई धर्म ऐसा नहीं है, जिसकी मूल पुस्तकें तथा उसके नबी की सारी बातें सुरक्षित हों।
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मेरा चिंतन
15:10पृष्ठ 262 · जुज़ 14

وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ فِى شِيَعِ ٱلْأَوَّلِينَ ۝١٠

और निःसंदेह हमने आपसे पहले विगत समुदायों के समूहों में रसूल भेजे हैं।

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मेरा चिंतन
15:11पृष्ठ 262 · जुज़ 14

وَمَا يَأْتِيهِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا كَانُوا۟ بِهِۦ يَسْتَهْزِءُونَ ۝١١

और उनके पास जो भी रसूल आता, वे उसका मज़ाक उड़ाया करते थे।

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मेरा चिंतन
15:12पृष्ठ 262 · जुज़ 14

كَذَٰلِكَ نَسْلُكُهُۥ فِى قُلُوبِ ٱلْمُجْرِمِينَ ۝١٢

इसी तरह हम यह[4] (झुठलाने की प्रवृत्ति) अपराधियों के दिलों में डाल देते हैं।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[4] अर्थात रसूलों को झुठलाने और उनका मज़ाक उड़ाने को, अर्थात उन्हें इसका दंड देंगे।
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मेरा चिंतन
15:13पृष्ठ 262 · जुज़ 14

لَا يُؤْمِنُونَ بِهِۦ ۖ وَقَدْ خَلَتْ سُنَّةُ ٱلْأَوَّلِينَ ۝١٣

वे उसपर ईमान नहीं लाते। और प्रथम जातियों से यही परंपरा चली आ रही है।

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मेरा चिंतन
15:14पृष्ठ 262 · जुज़ 14

وَلَوْ فَتَحْنَا عَلَيْهِم بَابًا مِّنَ ٱلسَّمَآءِ فَظَلُّوا۟ فِيهِ يَعْرُجُونَ ۝١٤

और यदि हम उनपर आकाश का कोई द्वार खोल दें, फिर वे उसमें चढ़ते चले जाएँ।

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मेरा चिंतन
15:15पृष्ठ 262 · जुज़ 14

لَقَالُوٓا۟ إِنَّمَا سُكِّرَتْ أَبْصَـٰرُنَا بَلْ نَحْنُ قَوْمٌ مَّسْحُورُونَ ۝١٥

तब भी निश्चय वे यही कहेंगे कि हमारी निगाहें बाँध दी गई हैं। बल्कि हमपर जादू कर दिया गया है।

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मेरा चिंतन
15:16पृष्ठ 263 · जुज़ 14

وَلَقَدْ جَعَلْنَا فِى ٱلسَّمَآءِ بُرُوجًا وَزَيَّنَّـٰهَا لِلنَّـٰظِرِينَ ۝١٦

निःसंदेह हमने आकाश में कई बुर्ज (बड़े सितारे) बनाए हैं और उन्हें देखने वालों के लिए सुशोभित किया है।

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मेरा चिंतन
15:17पृष्ठ 263 · जुज़ 14

وَحَفِظْنَـٰهَا مِن كُلِّ شَيْطَـٰنٍ رَّجِيمٍ ۝١٧

और हमने उसे प्रत्येक धिक्कारे हुए शैतान से सुरक्षित किया है।

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मेरा चिंतन
15:18पृष्ठ 263 · जुज़ 14

إِلَّا مَنِ ٱسْتَرَقَ ٱلسَّمْعَ فَأَتْبَعَهُۥ شِهَابٌ مُّبِينٌ ۝١٨

परंतु जो (शैतान) चोरी-छिपे सुनना चाहे, तो एक स्पष्ट ज्वाला (उल्का) उसका पीछा[5] करती है।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[5] शैतान चोरी से फ़रिश्तों की बात सुनने का प्रयास करते हैं। तो ज्वलंत उल्का उन्हें मारता है। अधिक विवरण के लिए, देखिए : सूरतुल-मुल्क, आयत : 5)
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मेरा चिंतन
15:19पृष्ठ 263 · जुज़ 14

وَٱلْأَرْضَ مَدَدْنَـٰهَا وَأَلْقَيْنَا فِيهَا رَوَٰسِىَ وَأَنۢبَتْنَا فِيهَا مِن كُلِّ شَىْءٍ مَّوْزُونٍ ۝١٩

और हमने धरती को फैलाया और उसमें पर्वत डाल (गाड़) दिए और उसमें हर चीज़ निर्धारित मात्रा में उगाई।

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मेरा चिंतन
15:20पृष्ठ 263 · जुज़ 14

وَجَعَلْنَا لَكُمْ فِيهَا مَعَـٰيِشَ وَمَن لَّسْتُمْ لَهُۥ بِرَٰزِقِينَ ۝٢٠

और हमने उसमें तुम्हारे लिए जीवन के संसाधन बना दिए। तथा उनके लिए (भी) जिन्हें तुम हरगिज़ रोज़ी देने वाले नहीं।

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मेरा चिंतन
15:21पृष्ठ 263 · जुज़ 14

وَإِن مِّن شَىْءٍ إِلَّا عِندَنَا خَزَآئِنُهُۥ وَمَا نُنَزِّلُهُۥٓ إِلَّا بِقَدَرٍ مَّعْلُومٍ ۝٢١

और कोई चीज़ ऐसी नहीं है, जिसके ख़ज़ाने हमारे पास न हों। और हम उसे एक निश्चित मात्रा ही में उतारते हैं।

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मेरा चिंतन
15:22पृष्ठ 263 · जुज़ 14

وَأَرْسَلْنَا ٱلرِّيَـٰحَ لَوَٰقِحَ فَأَنزَلْنَا مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءً فَأَسْقَيْنَـٰكُمُوهُ وَمَآ أَنتُمْ لَهُۥ بِخَـٰزِنِينَ ۝٢٢

और हमने बादलों को पानी से गर्भित करने वाली हवाओं को भेजा, फिर हमने आकाश से पानी उतारा, और उसे तुम्हें पिलाया, तथा तुम हरगिज़ उसे संग्रह करने वाले नहीं।

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मेरा चिंतन
15:23पृष्ठ 263 · जुज़ 14

وَإِنَّا لَنَحْنُ نُحْىِۦ وَنُمِيتُ وَنَحْنُ ٱلْوَٰرِثُونَ ۝٢٣

तथा निःसंदेह हम ही जीवित करते और मारते हैं और हम ही (सबके) उत्तराधिकारी हैं।

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मेरा चिंतन
15:24पृष्ठ 263 · जुज़ 14

وَلَقَدْ عَلِمْنَا ٱلْمُسْتَقْدِمِينَ مِنكُمْ وَلَقَدْ عَلِمْنَا ٱلْمُسْتَـْٔخِرِينَ ۝٢٤

तथा निःसंदेह हम तुम्हारे पहले लोगों को भी जानते हैं, और बाद में आने वालों को भी जानते हैं।

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मेरा चिंतन
15:25पृष्ठ 263 · जुज़ 14

وَإِنَّ رَبَّكَ هُوَ يَحْشُرُهُمْ ۚ إِنَّهُۥ حَكِيمٌ عَلِيمٌ ۝٢٥

और निःसंदेह आपका पालनहार ही उन्हें इकट्ठा[6] करेगा। निश्चय वह पूर्ण हिकमत वाला, सब कुछ जानने वाला है।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[6] अर्थात प्रलय के दिन ह़िसाब के लिए।
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मेरा चिंतन
15:26पृष्ठ 263 · जुज़ 14

وَلَقَدْ خَلَقْنَا ٱلْإِنسَـٰنَ مِن صَلْصَـٰلٍ مِّنْ حَمَإٍ مَّسْنُونٍ ۝٢٦

और निःसंदेह हमने मनुष्य को सड़े हुए गारे की खनखनाती हुई मिट्टी से बनाया है।

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मेरा चिंतन
15:27पृष्ठ 263 · जुज़ 14

وَٱلْجَآنَّ خَلَقْنَـٰهُ مِن قَبْلُ مِن نَّارِ ٱلسَّمُومِ ۝٢٧

और इससे पहले जिन्नों को हमने धुँआ रहित अति गर्म आग से पैदा किया।

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मेरा चिंतन
15:28पृष्ठ 263 · जुज़ 14

وَإِذْ قَالَ رَبُّكَ لِلْمَلَـٰٓئِكَةِ إِنِّى خَـٰلِقٌۢ بَشَرًا مِّن صَلْصَـٰلٍ مِّنْ حَمَإٍ مَّسْنُونٍ ۝٢٨

और (याद करो) जब आपके पालनहार ने फ़रिश्तों से कहा : मैं सड़े हुए गारे की खनखनाती मिट्टी से एक मनुष्य पैदा करने वाला हूँ।

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मेरा चिंतन
15:29पृष्ठ 263 · जुज़ 14

فَإِذَا سَوَّيْتُهُۥ وَنَفَخْتُ فِيهِ مِن رُّوحِى فَقَعُوا۟ لَهُۥ سَـٰجِدِينَ ۝٢٩

तो जब मैं उसे पूरा बना लूँ और उसमें अपनी रूह़ फूँक दूँ, तो तुम उसके आगे सजदा करते हुए गिर जाओ।[7]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[7] फ़रिश्तों का आदम को सजदा करना अल्लाह के आदेश से उनकी परीक्षा के लिए था, किंतु इस्लाम में मनुष्य के लिए किसी मनुष्य या वस्तु को सजदा करना शिर्क और अक्षम्य पाप है। (सूरत ह़ा-मीम-सजदा, आयत संख्या : 37)
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मेरा चिंतन
15:30पृष्ठ 263 · जुज़ 14

فَسَجَدَ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ كُلُّهُمْ أَجْمَعُونَ ۝٣٠

तो सब के सब फ़रिश्तों ने सजदा किया।

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मेरा चिंतन
15:31पृष्ठ 263 · जुज़ 14

إِلَّآ إِبْلِيسَ أَبَىٰٓ أَن يَكُونَ مَعَ ٱلسَّـٰجِدِينَ ۝٣١

सिवाय इबलीस के। उसने सजदा करने वालों के साथ शामिल होने से इनकार कर दिया।

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मेरा चिंतन
15:32पृष्ठ 264 · जुज़ 14

قَالَ يَـٰٓإِبْلِيسُ مَا لَكَ أَلَّا تَكُونَ مَعَ ٱلسَّـٰجِدِينَ ۝٣٢

अल्लाह ने पूछा : ऐ इबलीस! तुझे क्या हुआ कि तू सजदा करने वालों में शामिल नहीं हुआॽ

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मेरा चिंतन
15:33पृष्ठ 264 · जुज़ 14

قَالَ لَمْ أَكُن لِّأَسْجُدَ لِبَشَرٍ خَلَقْتَهُۥ مِن صَلْصَـٰلٍ مِّنْ حَمَإٍ مَّسْنُونٍ ۝٣٣

उसने कहा : मैं ऐसा नहीं कि एक मनुष्य को सजदा करूँ, जिसे तूने सड़े हुए गारे की खनखनाती मिट्टी से पैदा किया है।

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मेरा चिंतन
15:34पृष्ठ 264 · जुज़ 14

قَالَ فَٱخْرُجْ مِنْهَا فَإِنَّكَ رَجِيمٌ ۝٣٤

अल्लाह ने कहा : फिर तू यहाँ से निकल जा। क्योंकि निश्चय तू धिक्कारा हुआ है।

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मेरा चिंतन
15:35पृष्ठ 264 · जुज़ 14

وَإِنَّ عَلَيْكَ ٱللَّعْنَةَ إِلَىٰ يَوْمِ ٱلدِّينِ ۝٣٥

और निःसंदेह तुझपर बदले (क़ियामत) के दिन तक धिक्कार है।

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मेरा चिंतन
15:36पृष्ठ 264 · जुज़ 14

قَالَ رَبِّ فَأَنظِرْنِىٓ إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَ ۝٣٦

उस (इबलीस) ने कहा[8] : ऐ मेरे पालनहार! तो फिर मुझे उस दिन तक मोहलत दे, जब वे (पुनः जीवित कर) उठाए जाएँगे।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[8] अर्थात फ़रिश्ते परीक्षा में सफल हुए और इबलीस असफल रहा। क्योंकि उसने आदेश का पालन न करके अपनी मनमानी की। इसी प्रकार वे भी हैं, जो अल्लाह की बात न मानकर मनमानी करते हैं।
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मेरा चिंतन
15:37पृष्ठ 264 · जुज़ 14

قَالَ فَإِنَّكَ مِنَ ٱلْمُنظَرِينَ ۝٣٧

(अल्लाह ने) कहा : तू निःसंदेह मोहलत दिए गए लोगों में से है।

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मेरा चिंतन
15:38पृष्ठ 264 · जुज़ 14

إِلَىٰ يَوْمِ ٱلْوَقْتِ ٱلْمَعْلُومِ ۝٣٨

ज्ञात समय के दिन तक।

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मेरा चिंतन
15:39पृष्ठ 264 · जुज़ 14

قَالَ رَبِّ بِمَآ أَغْوَيْتَنِى لَأُزَيِّنَنَّ لَهُمْ فِى ٱلْأَرْضِ وَلَأُغْوِيَنَّهُمْ أَجْمَعِينَ ۝٣٩

वह बोला : ऐ मेरे पालनहार! चूँकि तूने मुझे पथभ्रष्ट किया है, मैं अवश्य ही उनके लिए धरती में (पाप को) सुशोभित करूँगा और उन सभी को पथभ्रष्ट कर दूँगा।

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मेरा चिंतन
15:40पृष्ठ 264 · जुज़ 14

إِلَّا عِبَادَكَ مِنْهُمُ ٱلْمُخْلَصِينَ ۝٤٠

सिवाय तेरे उनमें से चुने हुए बंदों के।

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मेरा चिंतन
15:41पृष्ठ 264 · जुज़ 14

قَالَ هَـٰذَا صِرَٰطٌ عَلَىَّ مُسْتَقِيمٌ ۝٤١

(अल्लाह ने) कहा : यह रास्ता है जो मुझ तक सीधा है।

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मेरा चिंतन
15:42पृष्ठ 264 · जुज़ 14

إِنَّ عِبَادِى لَيْسَ لَكَ عَلَيْهِمْ سُلْطَـٰنٌ إِلَّا مَنِ ٱتَّبَعَكَ مِنَ ٱلْغَاوِينَ ۝٤٢

निःसंदेह मेरे बंदों पर तेरा कोई वश नहीं[9], परंतु जो बहके हुए लोगों में से तेरे पीछे चले।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[9] अर्थात जो बंदे क़ुरआन तथा ह़दीस (नबी का तरीक़ा) का ज्ञान रखेंगे, उनपर शैतान का प्रभाव नहीं होगा। और जो इन दोनों के ज्ञान से जाहिल होंगे, वही उसके झाँसे में आएँगे। किंतु जो तौबा कर लें, तो उनको क्षमा कर दिया जाएगा।
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मेरा चिंतन
15:43पृष्ठ 264 · जुज़ 14

وَإِنَّ جَهَنَّمَ لَمَوْعِدُهُمْ أَجْمَعِينَ ۝٤٣

और निश्चय ही उन सब के वादा की जगह जहन्नम है।

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मेरा चिंतन
15:44पृष्ठ 264 · जुज़ 14

لَهَا سَبْعَةُ أَبْوَٰبٍ لِّكُلِّ بَابٍ مِّنْهُمْ جُزْءٌ مَّقْسُومٌ ۝٤٤

उस (जहन्नम) के सात द्वार हैं। और प्रत्येक द्वार के लिए उन (इबलीस के अनुयायियों) का एक विभाजित भाग[10] है।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[10] अर्थात इबलीस के अनुयायी अपने कुकर्मों के अनुसार नरक के द्वार में प्रवेश करेंगे।
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मेरा चिंतन
15:45पृष्ठ 264 · जुज़ 14

إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى جَنَّـٰتٍ وَعُيُونٍ ۝٤٥

निःसंदेह आज्ञाकारी लोग जन्नतों तथा स्रोतों में होंगे।

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मेरा चिंतन
15:46पृष्ठ 264 · जुज़ 14

ٱدْخُلُوهَا بِسَلَـٰمٍ ءَامِنِينَ ۝٤٦

(उनसे कहा जाएगा :) इसमें सलामती के साथ निर्भय होकर प्रवेश कर जाओ।

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मेरा चिंतन
15:47पृष्ठ 264 · जुज़ 14

وَنَزَعْنَا مَا فِى صُدُورِهِم مِّنْ غِلٍّ إِخْوَٰنًا عَلَىٰ سُرُرٍ مُّتَقَـٰبِلِينَ ۝٤٧

और हम निकाल देंगे उनके दिलों में जो कुछ द्वेष होगा। वे भाई-भाई होकर एक-दूसरे के आमने-सामने तख़्तों पर (बैठे) होंगे।

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मेरा चिंतन
15:48पृष्ठ 264 · जुज़ 14

لَا يَمَسُّهُمْ فِيهَا نَصَبٌ وَمَا هُم مِّنْهَا بِمُخْرَجِينَ ۝٤٨

न उसमें उन्हें कोई थकान होगी और न वे वहाँ से निकाले जाएँगे।

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मेरा चिंतन
15:49पृष्ठ 264 · जुज़ 14

۞ نَبِّئْ عِبَادِىٓ أَنِّىٓ أَنَا ٱلْغَفُورُ ٱلرَّحِيمُ ۝٤٩

(ऐ नबी!) आप मेरे बंदों को सूचित कर दें कि निःसंदेह मैं ही बड़ा क्षमाशील, अत्यंत दयावान्[11] हूँ।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[11] ह़दीस में है कि अल्लाह ने सौ दया पैदा की, निन्नानवे अपने पास रख लीं। और एक को पूरे संसार के लिए भेज दिया। अतः यदि काफ़िर उसकी पूरी दया जान जाए, तो स्वर्ग से निराश नहीं होगा। और ईमान वाला उसकी पूरी यातना जान जाए, तो नरक से निर्भय नहीं होगा। (सह़ीह़ बुख़ारी : 6469)
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मेरा चिंतन
15:50पृष्ठ 264 · जुज़ 14

وَأَنَّ عَذَابِى هُوَ ٱلْعَذَابُ ٱلْأَلِيمُ ۝٥٠

और यह भी कि निःसंदेह मेरी यातना ही कष्टदायक यातना है।

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मेरा चिंतन
15:51पृष्ठ 264 · जुज़ 14

وَنَبِّئْهُمْ عَن ضَيْفِ إِبْرَٰهِيمَ ۝٥١

और आप उन्हें इबराहीम (अलैहिस्सलाम) के अतिथियों के बारे में सूचित कर दें।

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मेरा चिंतन
15:52पृष्ठ 265 · जुज़ 14

إِذْ دَخَلُوا۟ عَلَيْهِ فَقَالُوا۟ سَلَـٰمًا قَالَ إِنَّا مِنكُمْ وَجِلُونَ ۝٥٢

जब वे इबराहीम के पास आए, तो उन्होंने सलाम किया। उसने कहा : हमें तो तुमसे डर लग रहा है।

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मेरा चिंतन
15:53पृष्ठ 265 · जुज़ 14

قَالُوا۟ لَا تَوْجَلْ إِنَّا نُبَشِّرُكَ بِغُلَـٰمٍ عَلِيمٍ ۝٥٣

उन्होंने कहा : डरिए नहीं, निःसंदेह हम आपको एक ज्ञानी बालक की शुभ सूचना देते हैं।

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मेरा चिंतन
15:54पृष्ठ 265 · जुज़ 14

قَالَ أَبَشَّرْتُمُونِى عَلَىٰٓ أَن مَّسَّنِىَ ٱلْكِبَرُ فَبِمَ تُبَشِّرُونَ ۝٥٤

उसने कहा : क्या तुम मुझे इस बुढ़ापे के आ जाने के उपरांत शुभ सूचना दे रहे हो? तो तुम किस आधार पर यह शुभ सूचना दे रहे होॽ

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मेरा चिंतन
15:55पृष्ठ 265 · जुज़ 14

قَالُوا۟ بَشَّرْنَـٰكَ بِٱلْحَقِّ فَلَا تَكُن مِّنَ ٱلْقَـٰنِطِينَ ۝٥٥

उन्होंने कहा : हमने आपको सच्ची शुभ सूचना दी है। अतः आप निराश होने वालों में से न हों।

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मेरा चिंतन
15:56पृष्ठ 265 · जुज़ 14

قَالَ وَمَن يَقْنَطُ مِن رَّحْمَةِ رَبِّهِۦٓ إِلَّا ٱلضَّآلُّونَ ۝٥٦

(इबराहीम अलैहिस्सलाम ने) कहा : और पथभ्रष्टों के सिवा अपने पालनहार की दया से कौन निराश होता है।

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मेरा चिंतन
15:57पृष्ठ 265 · जुज़ 14

قَالَ فَمَا خَطْبُكُمْ أَيُّهَا ٱلْمُرْسَلُونَ ۝٥٧

उसने कहा : ऐ भेजे हुए फ़रिश्तो! तुम्हारा अभियान क्या है?

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मेरा चिंतन
15:58पृष्ठ 265 · जुज़ 14

قَالُوٓا۟ إِنَّآ أُرْسِلْنَآ إِلَىٰ قَوْمٍ مُّجْرِمِينَ ۝٥٨

उन्होंने उत्तर दिया : निःसंदेह हम एक अपराधी जाति की ओर भेजे गए हैं।

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मेरा चिंतन
15:59पृष्ठ 265 · जुज़ 14

إِلَّآ ءَالَ لُوطٍ إِنَّا لَمُنَجُّوهُمْ أَجْمَعِينَ ۝٥٩

लूत के घर वालों के सिवा। निश्चय हम उन सभी को अवश्य बचा लेने वाले हैं।

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मेरा चिंतन
15:60पृष्ठ 265 · जुज़ 14

إِلَّا ٱمْرَأَتَهُۥ قَدَّرْنَآ ۙ إِنَّهَا لَمِنَ ٱلْغَـٰبِرِينَ ۝٦٠

परंतु लूत की पत्नी, हमने नियत कर दिया है कि निःसंदेह वह निश्चय ही पीछे रह जाने वालों में से है।

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मेरा चिंतन
15:61पृष्ठ 265 · जुज़ 14

فَلَمَّا جَآءَ ءَالَ لُوطٍ ٱلْمُرْسَلُونَ ۝٦١

फिर जब लूत के घर वालों के पास भेजे हुए (फ़रिश्ते) आए।

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मेरा चिंतन
15:62पृष्ठ 265 · जुज़ 14

قَالَ إِنَّكُمْ قَوْمٌ مُّنكَرُونَ ۝٦٢

तो उस (लूत अलैहिस्सलाम) ने कहा : तुम तो अपरिचित लोग हो।

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मेरा चिंतन
15:63पृष्ठ 265 · जुज़ 14

قَالُوا۟ بَلْ جِئْنَـٰكَ بِمَا كَانُوا۟ فِيهِ يَمْتَرُونَ ۝٦٣

उन्होंने कहा : (डरो नहीं) बल्कि हम तुम्हारे पास वह चीज़ लेकर आए हैं, जिसमें वे संदेह किया करते थे।

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मेरा चिंतन
15:64पृष्ठ 265 · जुज़ 14

وَأَتَيْنَـٰكَ بِٱلْحَقِّ وَإِنَّا لَصَـٰدِقُونَ ۝٦٤

और हम तुम्हारे पास सत्य लेकर आए हैं और निःसंदेह हम निश्चय सच्चे हैं।

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मेरा चिंतन
15:65पृष्ठ 265 · जुज़ 14

فَأَسْرِ بِأَهْلِكَ بِقِطْعٍ مِّنَ ٱلَّيْلِ وَٱتَّبِعْ أَدْبَـٰرَهُمْ وَلَا يَلْتَفِتْ مِنكُمْ أَحَدٌ وَٱمْضُوا۟ حَيْثُ تُؤْمَرُونَ ۝٦٥

अतः तुम अपने घर वालों को लेकर रात के किसी हिस्से में निकल जाओ और खुद उनके पीछे-पीछे चलो। और तुममें से कोई मुड़कर न देखे। तथा चले जाओ, जहाँ तुम्हें आदेश दिया जाता है।

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मेरा चिंतन
15:66पृष्ठ 265 · जुज़ 14

وَقَضَيْنَآ إِلَيْهِ ذَٰلِكَ ٱلْأَمْرَ أَنَّ دَابِرَ هَـٰٓؤُلَآءِ مَقْطُوعٌ مُّصْبِحِينَ ۝٦٦

और हमने उसकी ओर इस बात की वह़्य कर दी कि इन लोगों की जड़ सुबह होते ही काट दी जाने वाली है।

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मेरा चिंतन
15:67पृष्ठ 265 · जुज़ 14

وَجَآءَ أَهْلُ ٱلْمَدِينَةِ يَسْتَبْشِرُونَ ۝٦٧

और उस नगर वाले इस हाल में आए कि बहुत खुश हो रहे थे।[12]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[12] अर्थात जब फ़रिश्तों को नवयुवकों के रूप में देखा, तो लूत अलैहिस्सलाम के यहाँ आ गए ताकि उनके साथ कुकर्म करें।
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मेरा चिंतन
15:68पृष्ठ 265 · जुज़ 14

قَالَ إِنَّ هَـٰٓؤُلَآءِ ضَيْفِى فَلَا تَفْضَحُونِ ۝٦٨

उस (लूत अलैहिस्सलाम) ने कहा : ये लोग तो मेरे अतिथि हैं। अतः मुझे अपमानित न करो।

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मेरा चिंतन
15:69पृष्ठ 265 · जुज़ 14

وَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَلَا تُخْزُونِ ۝٦٩

तथा अल्लाह से डरो और मुझे अपमानित न करो।

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मेरा चिंतन
15:70पृष्ठ 265 · जुज़ 14

قَالُوٓا۟ أَوَلَمْ نَنْهَكَ عَنِ ٱلْعَـٰلَمِينَ ۝٧٠

उन्होंने कहा : क्या हमने तुम्हें विश्व वासियों (को अतिथि बनाने) से मना[13] नहीं किया?

अनुवाद टिप्पणियाँ
[13] कि सबके समर्थक न बनो।
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मेरा चिंतन
15:71पृष्ठ 266 · जुज़ 14

قَالَ هَـٰٓؤُلَآءِ بَنَاتِىٓ إِن كُنتُمْ فَـٰعِلِينَ ۝٧١

उस (लूत अलैहिस्सलाम) ने कहा : ये मेरी बेटियाँ हैं, यदि तुम कुछ करने वाले[14] हो।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[14] अर्थात् इनसे विवाह कर लो, और अपनी कामवासना पूरी करो, और कुकर्म न करो।
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मेरा चिंतन
15:72पृष्ठ 266 · जुज़ 14

لَعَمْرُكَ إِنَّهُمْ لَفِى سَكْرَتِهِمْ يَعْمَهُونَ ۝٧٢

ऐ नबी! आपकी आयु की क़सम![15] निःसंदेह वे निश्चय अपनी मस्ती में भटके फिरते थे।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[15] अल्लाह के सिवा किसी मनुष्य के लिए उचित नहीं है कि वह अल्लाह के सिवा किसी और चीज़ की क़सम खाए।
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मेरा चिंतन
15:73पृष्ठ 266 · जुज़ 14

فَأَخَذَتْهُمُ ٱلصَّيْحَةُ مُشْرِقِينَ ۝٧٣

अंततः सूर्योदय के समय ही चिंघाड़ ने उन्हें पकड़ लिया।

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मेरा चिंतन
15:74पृष्ठ 266 · जुज़ 14

فَجَعَلْنَا عَـٰلِيَهَا سَافِلَهَا وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهِمْ حِجَارَةً مِّن سِجِّيلٍ ۝٧٤

फिर हमने उस बस्ती के ऊपरी भाग को नीचे कर दिया और उनपर कंकड़ के पत्थर बरसाए।

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मेरा चिंतन
15:75पृष्ठ 266 · जुज़ 14

إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَـٰتٍ لِّلْمُتَوَسِّمِينَ ۝٧٥

निःसंदेह इसमें सोच-विचार करने वालों[16] के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[16] अर्थात जो लक्षणों से तथ्य को समझ जाते हैं।
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मेरा चिंतन
15:76पृष्ठ 266 · जुज़ 14

وَإِنَّهَا لَبِسَبِيلٍ مُّقِيمٍ ۝٧٦

और निःसंदेह वह (बस्ती) एक सार्वजनिक[17] मार्ग पर स्थित है।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[17] अर्थात जो सार्वजनिक मार्ग ह़िजाज़ (मक्का) से शाम को जाता है। यह शिक्षाप्रद बस्ती उसी मार्ग में आती है, जिससे तुम गुज़रते हुए शाम जाते हो।
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मेरा चिंतन
15:77पृष्ठ 266 · जुज़ 14

إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةً لِّلْمُؤْمِنِينَ ۝٧٧

निःसंदेह इसमें ईमान वलों के लिए निश्चय बड़ी निशानी है।

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मेरा चिंतन
15:78पृष्ठ 266 · जुज़ 14

وَإِن كَانَ أَصْحَـٰبُ ٱلْأَيْكَةِ لَظَـٰلِمِينَ ۝٧٨

और निःसंदेह 'ऐका'[18] वाले निश्चित रूप से अत्याचारी थे।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[18] इससे अभिप्रेत शुऐब अलैहिस्सलाम की जाति है, ऐका का अर्थ वन तथा झाड़ी है।
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मेरा चिंतन
15:79पृष्ठ 266 · जुज़ 14

فَٱنتَقَمْنَا مِنْهُمْ وَإِنَّهُمَا لَبِإِمَامٍ مُّبِينٍ ۝٧٩

तो हमने उनसे बदला लिया। और निःसंदेह वे दोनों[19] (बस्तियाँ) स्पष्ट मार्ग पर हैं।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[19] अर्थात मदयन और ऐका का क्षेत्र भी ह़िजाज़ से फ़िलस्तीन और सीरिया जाते हुए, राह में पड़ता है।
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मेरा चिंतन
15:80पृष्ठ 266 · जुज़ 14

وَلَقَدْ كَذَّبَ أَصْحَـٰبُ ٱلْحِجْرِ ٱلْمُرْسَلِينَ ۝٨٠

तथा निःसंदेह ह़िज्र[20] के रहने वालों ने (भी) रसूलों को झुठलाया।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[20] ह़िज्र समूद जाति की बस्ती थी, जो सालेह (अलैहिस्सलाम) की जाति थी, यह बस्ती मदीना और तबूक के बीच में स्थित थी।
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मेरा चिंतन
15:81पृष्ठ 266 · जुज़ 14

وَءَاتَيْنَـٰهُمْ ءَايَـٰتِنَا فَكَانُوا۟ عَنْهَا مُعْرِضِينَ ۝٨١

और हमने उन्हें अपनी निशानियाँ दीं, तो वे उनसे मुँह फेरने वाले थे।

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मेरा चिंतन
15:82पृष्ठ 266 · जुज़ 14

وَكَانُوا۟ يَنْحِتُونَ مِنَ ٱلْجِبَالِ بُيُوتًا ءَامِنِينَ ۝٨٢

और वे निर्भय होकर पर्वतों को काटकर घर बनाते थे।

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मेरा चिंतन
15:83पृष्ठ 266 · जुज़ 14

فَأَخَذَتْهُمُ ٱلصَّيْحَةُ مُصْبِحِينَ ۝٨٣

अंततः सुबह होते ही उन्हें चिंघाड़ ने पकड़ लिया।

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मेरा चिंतन
15:84पृष्ठ 266 · जुज़ 14

فَمَآ أَغْنَىٰ عَنْهُم مَّا كَانُوا۟ يَكْسِبُونَ ۝٨٤

फिर उनके किसी काम न आया, जो वे कमाया करते थे।

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मेरा चिंतन
15:85पृष्ठ 266 · जुज़ 14

وَمَا خَلَقْنَا ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَآ إِلَّا بِٱلْحَقِّ ۗ وَإِنَّ ٱلسَّاعَةَ لَـَٔاتِيَةٌ ۖ فَٱصْفَحِ ٱلصَّفْحَ ٱلْجَمِيلَ ۝٨٥

और हमने आकाशों तथा धरती और उन दोनों के बीच मौजूद सारी चीज़ों को सत्य के साथ पैदा किया है। और निःसंदेह क़ियामत अवश्य आने वाली है। अतः (ऐ नबी!) आप (उन्हें) भले तौर पर क्षमा कर दें।

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मेरा चिंतन
15:86पृष्ठ 266 · जुज़ 14

إِنَّ رَبَّكَ هُوَ ٱلْخَلَّـٰقُ ٱلْعَلِيمُ ۝٨٦

निःसंदेह आपका पालनहार ही हर चीज़ को पैदा करने वाला, सब कुछ जानने वाला है।

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मेरा चिंतन
15:87पृष्ठ 266 · जुज़ 14

وَلَقَدْ ءَاتَيْنَـٰكَ سَبْعًا مِّنَ ٱلْمَثَانِى وَٱلْقُرْءَانَ ٱلْعَظِيمَ ۝٨٧

तथा (ऐ नबी!) हमने आपको बार-बार दोहराई जाने वाली सात आयतें और महान क़ुरआन[21] प्रदान किया है।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[21] अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु ने कहा कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का कथन है कि उम्मुल क़ुरआन (सूरतुल-फ़ातिह़ा) ही वे सात आयतें हैं जो दुहराई जाती हैं, तथा महा क़ुरआन हैं। (सह़ीह़ बुख़ारी : 4704) एक दूसरी ह़दीस में है कि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फरमाया : "अल्ह़म्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन" ही वह सात आयतें हैं जो बार-बार दुहराई जाती हैं, और महा क़ुरआन हैं, जो मुझे प्रदान किया गया है। (संक्षिप्त अनुवाद, सह़ीह़ बुख़ारी : 4702) यही कारण है कि इसके पढ़े बिना नमाज़ नहीं होती। ( सह़ीह़ बुख़ारी : 756, मुस्लिम : 394)
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मेरा चिंतन
15:88पृष्ठ 266 · जुज़ 14

لَا تَمُدَّنَّ عَيْنَيْكَ إِلَىٰ مَا مَتَّعْنَا بِهِۦٓ أَزْوَٰجًا مِّنْهُمْ وَلَا تَحْزَنْ عَلَيْهِمْ وَٱخْفِضْ جَنَاحَكَ لِلْمُؤْمِنِينَ ۝٨٨

आप उसकी ओर हरगिज़ न देखें, जो सुख-सामग्री हमने उनमें से विभिन्न प्रकार के लोगों को दे रखी है और न उनपर दुखी हों और ईमान वालों के लिए अपने बाज़ू झुका दें (यानी उनके लिए विनम्र रहें)।

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मेरा चिंतन
15:89पृष्ठ 266 · जुज़ 14

وَقُلْ إِنِّىٓ أَنَا ٱلنَّذِيرُ ٱلْمُبِينُ ۝٨٩

और कह दें कि निःसंदेह मैं तो खुल्लम-खुल्ला डराने[22] वाला हूँ।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[22] अर्थात अवज्ञा पर यातना से।
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मेरा चिंतन
15:90पृष्ठ 266 · जुज़ 14

كَمَآ أَنزَلْنَا عَلَى ٱلْمُقْتَسِمِينَ ۝٩٠

जैसे कि हमने (अल्लाह की किताब को) विभाजित करने वालों[23] पर (यातना) उतारी थी।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[23] विभाजन कारियों से अभिप्राय : यहूदी और ईसाई हैं। जिन्होंने अपनी पुस्तकों तौरात तथा इंजील को खंड-खंड कर दिए। अर्थात उनके कुछ भाग पर ईमान लाए और कुछ को नकार दिया। (सह़ीह़ बुख़ारी : 4705-4706)
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मेरा चिंतन
15:91पृष्ठ 267 · जुज़ 14

ٱلَّذِينَ جَعَلُوا۟ ٱلْقُرْءَانَ عِضِينَ ۝٩١

जिन्होंने क़ुरआन को खंड-खंड कर दिया।[24]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[24] इसी प्रकार इन्होंने भी क़ुरआन के कुछ भाग को मान लिया और कुछ का अगलों की कहानियाँ बता कर इनकार कर दिया। तो ऐसे सभी लोगों से प्रलय के दिन पूछ होगी कि मेरी पुस्तकों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया?
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मेरा चिंतन
15:92पृष्ठ 267 · जुज़ 14

فَوَرَبِّكَ لَنَسْـَٔلَنَّهُمْ أَجْمَعِينَ ۝٩٢

अतः आपके पालनहार की क़सम! हम उन सबसे अवश्य पूछेंगे।

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मेरा चिंतन
15:93पृष्ठ 267 · जुज़ 14

عَمَّا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ ۝٩٣

उसके बारे में जो वे किया करते थे।

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मेरा चिंतन
15:94पृष्ठ 267 · जुज़ 14

فَٱصْدَعْ بِمَا تُؤْمَرُ وَأَعْرِضْ عَنِ ٱلْمُشْرِكِينَ ۝٩٤

अतः आपको जो आदेश दिया जा रहा है, उसका ऐलान कर दें और मुश्रिकों (अनेकेश्वरवादियो) से मुँह फेर लें।

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मेरा चिंतन
15:95पृष्ठ 267 · जुज़ 14

إِنَّا كَفَيْنَـٰكَ ٱلْمُسْتَهْزِءِينَ ۝٩٥

निःसंदेह हम आपकी ओर से मज़ाक उड़ाने वालों के विरुद्ध काफ़ी हैं।

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मेरा चिंतन
15:96पृष्ठ 267 · जुज़ 14

ٱلَّذِينَ يَجْعَلُونَ مَعَ ٱللَّهِ إِلَـٰهًا ءَاخَرَ ۚ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ ۝٩٦

जो अल्लाह के साथ दूसरा पूज्य बनाते हैं। तो उन्हें जल्द पता चल जाएगा।

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मेरा चिंतन
15:97पृष्ठ 267 · जुज़ 14

وَلَقَدْ نَعْلَمُ أَنَّكَ يَضِيقُ صَدْرُكَ بِمَا يَقُولُونَ ۝٩٧

और निश्चय हम जानते हैं कि उनकी बातों से आपका सीना तंग होता है।

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मेरा चिंतन
15:98पृष्ठ 267 · जुज़ 14

فَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ وَكُن مِّنَ ٱلسَّـٰجِدِينَ ۝٩٨

अतः आप अपने रब की प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता का गान करें और सजदा करने वालों में शामिल हो जाएँ।

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मेरा चिंतन
15:99पृष्ठ 267 · जुज़ 14

وَٱعْبُدْ رَبَّكَ حَتَّىٰ يَأْتِيَكَ ٱلْيَقِينُ ۝٩٩

और अपने रब की इबादत करते रहें, यहाँ तक कि आपके पास यक़ीन (मौत) आ जाए।[25]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[25] अर्थात मरण का समय आ जाए, जिसका आना यक़ीनी (निश्चित) है।
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मेरा चिंतन

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पाठ स्रोत और सटीकता

मूल अरबी: Tanzil Uthmani v1.1. अर्थों का अनुवाद: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari · QuranEnc.com · v1.1.5.

सभी 6,236 आयत संदर्भों को स्रोत से मिलाकर जाँचा गया है। यह तकनीकी अखंडता जाँच है, स्वतंत्र विद्वत समीक्षा नहीं। आरंभ की बिस्मिल्लाहें उसी रूप में सुरक्षित रखी गई हैं जिस रूप में मिली थीं।

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अनुवाद स्रोत

Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
Translated by Azizul Haq Al-Omari.
स्रोत संस्करण: 1.1.5 · 2025-08-05

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