सूरह 11 · 123 आयतें · मक्की

Hud

हूद

هود
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11:1पृष्ठ 221 · जुज़ 11

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ الٓر ۚ كِتَـٰبٌ أُحْكِمَتْ ءَايَـٰتُهُۥ ثُمَّ فُصِّلَتْ مِن لَّدُنْ حَكِيمٍ خَبِيرٍ ۝١

अलिफ, लाम, रा। यह एक पुस्तक है, जिसकी आयतें सुदृढ़ की गईं, फिर उन्हें सविस्तार स्पष्ट किया गया एक पूर्ण हिकमत वाले की ओर से जो पूरी ख़बर रखने वाला है।

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मेरा चिंतन
11:2पृष्ठ 221 · जुज़ 11

أَلَّا تَعْبُدُوٓا۟ إِلَّا ٱللَّهَ ۚ إِنَّنِى لَكُم مِّنْهُ نَذِيرٌ وَبَشِيرٌ ۝٢

यह कि अल्लाह के सिवा किसी की इबादत न करो। निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए उसकी ओर से एक डराने वाला तथा शुभ सूचना देने वाला हूँ।

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मेरा चिंतन
11:3पृष्ठ 221 · जुज़ 11

وَأَنِ ٱسْتَغْفِرُوا۟ رَبَّكُمْ ثُمَّ تُوبُوٓا۟ إِلَيْهِ يُمَتِّعْكُم مَّتَـٰعًا حَسَنًا إِلَىٰٓ أَجَلٍ مُّسَمًّى وَيُؤْتِ كُلَّ ذِى فَضْلٍ فَضْلَهُۥ ۖ وَإِن تَوَلَّوْا۟ فَإِنِّىٓ أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ كَبِيرٍ ۝٣

और यह कि अपने पालनहार से क्षमा माँगो, फिर उसकी ओर पलट आओ। वह तुम्हें एक निर्धारित अवधि तक उत्तम सामग्री प्रदान करेगा और प्रत्येक अतिरिक्त सत्कर्म करने वाले को उसका अतिरिक्त बदला देगा और यदि तुम फिर गह, तो मैं तुमपर एक बड़े दिन की यातना से डरता हूँ।

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मेरा चिंतन
11:4पृष्ठ 221 · जुज़ 11

إِلَى ٱللَّهِ مَرْجِعُكُمْ ۖ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ قَدِيرٌ ۝٤

अल्लाह ही की ओर तुम्हारा लौटना है और वह हर चीज़ पर सर्वशक्तिमान है।

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मेरा चिंतन
11:5पृष्ठ 221 · जुज़ 11

أَلَآ إِنَّهُمْ يَثْنُونَ صُدُورَهُمْ لِيَسْتَخْفُوا۟ مِنْهُ ۚ أَلَا حِينَ يَسْتَغْشُونَ ثِيَابَهُمْ يَعْلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعْلِنُونَ ۚ إِنَّهُۥ عَلِيمٌۢ بِذَاتِ ٱلصُّدُورِ ۝٥

सुन लो! निःसंदेह वे अपने सीनों को मोड़ते हैं, ताकि उस (अल्लाह) से छिपे रहें। सुन लो! जब वे अपने कपड़े ख़ूब लपेट लेते हैं, वह जानता है जो कुछ वे छिपाते हैं और जो कुछ प्रकट करते हैं। निःसंदेह वह सीनों की बातों को भली-भाँति जानने वाला है।[1]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[1] आयत का भावार्थ यह है कि मिश्रणवादी अपने दिलों में कुफ़्र को यह समझ कर छिपाते हैं कि अल्लाह उसे नहीं जानेगा। जबकि वह उनके खुले-छिपे और उनके दिलों के भेदों तक को जानता है।
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मेरा चिंतन
11:6पृष्ठ 222 · जुज़ 12

۞ وَمَا مِن دَآبَّةٍ فِى ٱلْأَرْضِ إِلَّا عَلَى ٱللَّهِ رِزْقُهَا وَيَعْلَمُ مُسْتَقَرَّهَا وَمُسْتَوْدَعَهَا ۚ كُلٌّ فِى كِتَـٰبٍ مُّبِينٍ ۝٦

और धरती पर चलने-फिरने वाला जो भी प्राणी है, उसकी रोज़ी अल्लाह के ज़िम्मे है। वह उसके ठहरने के स्थान तथा उसके सौंपे जाने के स्थान को जानता है। सब कुछ एक स्पष्ट पुस्तक में (अंकित) है।[2]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[2] अर्थात अल्लाह प्रत्येक व्यक्ति के जीवन-मरण आदि की सब दशाओं से अवगत है।
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मेरा चिंतन
11:7पृष्ठ 222 · जुज़ 12

وَهُوَ ٱلَّذِى خَلَقَ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضَ فِى سِتَّةِ أَيَّامٍ وَكَانَ عَرْشُهُۥ عَلَى ٱلْمَآءِ لِيَبْلُوَكُمْ أَيُّكُمْ أَحْسَنُ عَمَلًا ۗ وَلَئِن قُلْتَ إِنَّكُم مَّبْعُوثُونَ مِنۢ بَعْدِ ٱلْمَوْتِ لَيَقُولَنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُوٓا۟ إِنْ هَـٰذَآ إِلَّا سِحْرٌ مُّبِينٌ ۝٧

और वही है, जिसने आकाशों तथा धरती को छः दिनों में पैदा किया। उस समय उसका सिंहासन पानी पर था। ताकि तुम्हारी परीक्षा ले कि तुममें किसका कर्म सबसे उत्तम है। और (ऐ नबी!) यदि आप उनसे कहें कि निःसंदेह तुम मरने के बाद पुनः जीवित किए जाओगे, तो जिन लोगों ने कुफ़्र किया, वे अवश्य कहेंगे कि यह तो खुला जादू है।

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मेरा चिंतन
11:8पृष्ठ 222 · जुज़ 12

وَلَئِنْ أَخَّرْنَا عَنْهُمُ ٱلْعَذَابَ إِلَىٰٓ أُمَّةٍ مَّعْدُودَةٍ لَّيَقُولُنَّ مَا يَحْبِسُهُۥٓ ۗ أَلَا يَوْمَ يَأْتِيهِمْ لَيْسَ مَصْرُوفًا عَنْهُمْ وَحَاقَ بِهِم مَّا كَانُوا۟ بِهِۦ يَسْتَهْزِءُونَ ۝٨

और यदि हम एक गिनी-चुनी अवधि तक उनसे यातना को विलंबित कर दें, तो अवश्य कहेंगे कि किस चीज़ ने उसे रोक रखा है? सुन लो! वह जिस दिन उनपर आ जाएगी, तो उनपर से टाली नहीं जाएगी। और वह (यातना) उन्हें घेर लेगी, जिसकी वे हँसी उड़ाया करते थे।

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मेरा चिंतन
11:9पृष्ठ 222 · जुज़ 12

وَلَئِنْ أَذَقْنَا ٱلْإِنسَـٰنَ مِنَّا رَحْمَةً ثُمَّ نَزَعْنَـٰهَا مِنْهُ إِنَّهُۥ لَيَـُٔوسٌ كَفُورٌ ۝٩

और यदि हम मनुष्य को अपनी तरफ़ से किसी दया (नेमत) का स्वाद चखा दें, फिर उसे उससे छीन लें, तो निश्चय ही वह अति निराश, बड़ा नाशुक्रा हो जाता है।

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मेरा चिंतन
11:10पृष्ठ 222 · जुज़ 12

وَلَئِنْ أَذَقْنَـٰهُ نَعْمَآءَ بَعْدَ ضَرَّآءَ مَسَّتْهُ لَيَقُولَنَّ ذَهَبَ ٱلسَّيِّـَٔاتُ عَنِّىٓ ۚ إِنَّهُۥ لَفَرِحٌ فَخُورٌ ۝١٠

और यदि हम उसे विपत्ति पहुँचने के बाद कोई नेमत चखाएँ, तो निश्चय ही वह अवश्य कहेगा : समस्त विपत्तियाँ मुझसे दूर हो गईं। निःसंदेह वह बहुत इतराने वाला, बहुत गर्व करने वाला है।[3]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[3] इसमें मनुष्य की स्वभाविक दशा की ओर संकेत है।
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मेरा चिंतन
11:11पृष्ठ 222 · जुज़ 12

إِلَّا ٱلَّذِينَ صَبَرُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ أُو۟لَـٰٓئِكَ لَهُم مَّغْفِرَةٌ وَأَجْرٌ كَبِيرٌ ۝١١

परन्तु जिन लोगों ने धैर्य से काम लिया और अच्छे कर्म करते रहे, ऐस लोगों के लिए क्षमा और बड़ा प्रतिफल है।

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मेरा चिंतन
11:12पृष्ठ 222 · जुज़ 12

فَلَعَلَّكَ تَارِكٌۢ بَعْضَ مَا يُوحَىٰٓ إِلَيْكَ وَضَآئِقٌۢ بِهِۦ صَدْرُكَ أَن يَقُولُوا۟ لَوْلَآ أُنزِلَ عَلَيْهِ كَنزٌ أَوْ جَآءَ مَعَهُۥ مَلَكٌ ۚ إِنَّمَآ أَنتَ نَذِيرٌ ۚ وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ وَكِيلٌ ۝١٢

तो (ऐ नबी!) संभवतः आप अपनी ओर की जाने वाली वह़्य के कुछ भाग (का प्रसार) छोड़ देने वाले हैं, और उसके (प्रसार के) कारण आपका सीना तंग हो रहा है कि वे कहेंगे कि इसपर कोई ख़ज़ाना क्यों नहीं उतारा गया या इसके साथ कोई फरिश्ता क्यों नहीं आया? (तो सुनिए) आप केवल सचेत करने वाले हैं और अल्लाह ही प्रत्येक चीज़ का संरक्षक है।

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मेरा चिंतन
11:13पृष्ठ 223 · जुज़ 12

أَمْ يَقُولُونَ ٱفْتَرَىٰهُ ۖ قُلْ فَأْتُوا۟ بِعَشْرِ سُوَرٍ مِّثْلِهِۦ مُفْتَرَيَـٰتٍ وَٱدْعُوا۟ مَنِ ٱسْتَطَعْتُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ إِن كُنتُمْ صَـٰدِقِينَ ۝١٣

बल्कि क्या वे कहते हैं कि उसने इस (क़ुरआन) को स्वयं गढ़ लिया है? आप कह दें कि इस जैसी गढ़ी हुई दस सूरतें ले आओ[4] और अल्लाह के सिवा, जिसे बुला सकते हो, बुला लो, यदि तुम सच्चे हो।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[4] अल्लाह का यह चैलेंज है कि अगर तुमको शंका है कि यह क़ुरआन मुह़म्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने स्वयं बना लिया है, तो तुम इस जैसी दस सूरतें ही बना कर दिखा दो। और यह चैलेंज प्रलय तक के लिए है। और कोई दस तो क्या, इस जैसी एक सूरत भी नहीं ला सकता। (देखिए : सूरत यूनुस, आयत : 38 तथा सूरतुल-बक़रह, आयत : 23)
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मेरा चिंतन
11:14पृष्ठ 223 · जुज़ 12

فَإِلَّمْ يَسْتَجِيبُوا۟ لَكُمْ فَٱعْلَمُوٓا۟ أَنَّمَآ أُنزِلَ بِعِلْمِ ٱللَّهِ وَأَن لَّآ إِلَـٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ فَهَلْ أَنتُم مُّسْلِمُونَ ۝١٤

फिर यदि वे तुम्हारी मांग पूरी न करें, तो जान लो कि यह (क़ुरआन) अल्लाह के ज्ञान के साथ उतारा गया है और यह कि उसके सिवा कोई पूज्य नहीं। तो क्या तुम मुसलमान होते हो?

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मेरा चिंतन
11:15पृष्ठ 223 · जुज़ 12

مَن كَانَ يُرِيدُ ٱلْحَيَوٰةَ ٱلدُّنْيَا وَزِينَتَهَا نُوَفِّ إِلَيْهِمْ أَعْمَـٰلَهُمْ فِيهَا وَهُمْ فِيهَا لَا يُبْخَسُونَ ۝١٥

जो व्यक्ति सांसारिक जीवन तथा उसकी शोभा चाहता हो, हम ऐसे लोगों को उनके कर्मों का बदला इसी (दुनिया) में दे देते हैं और इसमें उनका कोई हक़ नहीं मारा जाता।

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मेरा चिंतन
11:16पृष्ठ 223 · जुज़ 12

أُو۟لَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ لَيْسَ لَهُمْ فِى ٱلْـَٔاخِرَةِ إِلَّا ٱلنَّارُ ۖ وَحَبِطَ مَا صَنَعُوا۟ فِيهَا وَبَـٰطِلٌ مَّا كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ ۝١٦

यही वे लोग हैं, जिनके लिए आख़िरत में आग के सिवा कुछ नहीं है और उनके दुनिया में किए हुए समस्त कार्य व्यर्थ हो जाएँगे और उनका सारा किया-धरा अकारथ होकर रह जाएगा।

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मेरा चिंतन
11:17पृष्ठ 223 · जुज़ 12

أَفَمَن كَانَ عَلَىٰ بَيِّنَةٍ مِّن رَّبِّهِۦ وَيَتْلُوهُ شَاهِدٌ مِّنْهُ وَمِن قَبْلِهِۦ كِتَـٰبُ مُوسَىٰٓ إِمَامًا وَرَحْمَةً ۚ أُو۟لَـٰٓئِكَ يُؤْمِنُونَ بِهِۦ ۚ وَمَن يَكْفُرْ بِهِۦ مِنَ ٱلْأَحْزَابِ فَٱلنَّارُ مَوْعِدُهُۥ ۚ فَلَا تَكُ فِى مِرْيَةٍ مِّنْهُ ۚ إِنَّهُ ٱلْحَقُّ مِن رَّبِّكَ وَلَـٰكِنَّ أَكْثَرَ ٱلنَّاسِ لَا يُؤْمِنُونَ ۝١٧

तो क्या वह व्यक्ति जो अपने पालनहार की ओर से स्पष्ट प्रमाण[5] रखता हो और उसके बाद अल्लाह की ओर से एक गवाह[6] भी आ जाए, तथा उससे पहले मूसा की पुस्तक मार्गदर्शक और दया के रूप में उपस्थित रही हो (वह गुमराही में पड़े हुए लोगों के समान हो सकता है?) ऐसे ही लोग इस (क़ुरआन) पर ईमान रखते हैं। और इन समूहों में से जो व्यक्ति भी इसका इनकार करेगा, तो उसके वादा की जगह (ठिकाना) दोज़ख है। अतः आप इसके बारे में किसी संदेह में न पड़ें। निःसंदेह यह आपके पालनहार की ओर से सत्य है। परंतु अधिकतर लोग ईमान (विश्वास) नहीं रखते।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[5] अर्थात जो अपने अस्तित्व तथा विश्व की रचना और व्यवस्था पर विचार करके यह जानता था कि इसका स्वामी तथा शासक केवल अल्लाह ही है, उसके अतिरिक्त कोई अन्य नहीं हो सकता। [6] अर्थात नबी और क़ुरआन।
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मेरा चिंतन
11:18पृष्ठ 223 · जुज़ 12

وَمَنْ أَظْلَمُ مِمَّنِ ٱفْتَرَىٰ عَلَى ٱللَّهِ كَذِبًا ۚ أُو۟لَـٰٓئِكَ يُعْرَضُونَ عَلَىٰ رَبِّهِمْ وَيَقُولُ ٱلْأَشْهَـٰدُ هَـٰٓؤُلَآءِ ٱلَّذِينَ كَذَبُوا۟ عَلَىٰ رَبِّهِمْ ۚ أَلَا لَعْنَةُ ٱللَّهِ عَلَى ٱلظَّـٰلِمِينَ ۝١٨

और उससे बड़ा अत्याचारी कौन होगा, जो अल्लाह पर झूठ गढ़े? ऐसे लोग अपने पालनहार के समक्ष प्रस्तुत किए जाएँगे और गवाही देने वाले कहेंगे कि यही वे लोग हैं जिन्होंने अपने पालनहार पर झूठ गढ़ा था। सुन लो! अत्याचारियों पर अल्लाह की धिक्कार है।

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मेरा चिंतन
11:19पृष्ठ 223 · जुज़ 12

ٱلَّذِينَ يَصُدُّونَ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ وَيَبْغُونَهَا عِوَجًا وَهُم بِٱلْـَٔاخِرَةِ هُمْ كَـٰفِرُونَ ۝١٩

जो अल्लाह के मार्ग से रोकते हैं और उसे टेढ़ा बनाना चाहते हैं और वही आख़िरत का इनकार करने वाले हैं।

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मेरा चिंतन
11:20पृष्ठ 224 · जुज़ 12

أُو۟لَـٰٓئِكَ لَمْ يَكُونُوا۟ مُعْجِزِينَ فِى ٱلْأَرْضِ وَمَا كَانَ لَهُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ مِنْ أَوْلِيَآءَ ۘ يُضَـٰعَفُ لَهُمُ ٱلْعَذَابُ ۚ مَا كَانُوا۟ يَسْتَطِيعُونَ ٱلسَّمْعَ وَمَا كَانُوا۟ يُبْصِرُونَ ۝٢٠

वे धरती में अल्लाह की यातना से बचकर भाग नहीं सकते और न उनका अल्लाह के सिवा कोई सहायक है। उनके लिए यातना दुगुनी कर दी जाएगी। वे (दुनिया में) न सुन सकते थे, न देख सकते थे।

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मेरा चिंतन
11:21पृष्ठ 224 · जुज़ 12

أُو۟لَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ خَسِرُوٓا۟ أَنفُسَهُمْ وَضَلَّ عَنْهُم مَّا كَانُوا۟ يَفْتَرُونَ ۝٢١

ये वही लोग हैं, जिन्होंने अपने आपको घाटे में डाला और वह सब कुछ उनसे खो गया, जो वे झूठ गढ़ा करते थे।

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मेरा चिंतन
11:22पृष्ठ 224 · जुज़ 12

لَا جَرَمَ أَنَّهُمْ فِى ٱلْـَٔاخِرَةِ هُمُ ٱلْأَخْسَرُونَ ۝٢٢

इसमें कोई संदेह नहीं कि यही लोग आख़िरत में सबसे अधिक घाटा उठाने वाले हैं।

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मेरा चिंतन
11:23पृष्ठ 224 · जुज़ 12

إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ وَعَمِلُوا۟ ٱلصَّـٰلِحَـٰتِ وَأَخْبَتُوٓا۟ إِلَىٰ رَبِّهِمْ أُو۟لَـٰٓئِكَ أَصْحَـٰبُ ٱلْجَنَّةِ ۖ هُمْ فِيهَا خَـٰلِدُونَ ۝٢٣

निःसंदेह जो लोग ईमान लाए और अच्छे कार्य किए, तथा अपने पालनहार के सामने विनम्रता प्रकट की, वही लोग जन्नत वाले हैं। वे उसमें हमेशा रहेंगे।

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मेरा चिंतन
11:24पृष्ठ 224 · जुज़ 12

۞ مَثَلُ ٱلْفَرِيقَيْنِ كَٱلْأَعْمَىٰ وَٱلْأَصَمِّ وَٱلْبَصِيرِ وَٱلسَّمِيعِ ۚ هَلْ يَسْتَوِيَانِ مَثَلًا ۚ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ ۝٢٤

दोनों पक्षों का उदाहरण अंधे और बहरे तथा देखने और सुनने वाले की तरह है। क्या ये दोनों उदाहरण में बराबर हो सकते हैं? क्या तुम (इससे) नसीहत नहीं पकड़ते?[7]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[7] कि दोनों का परिणाम एक नहीं हो सकता। एक को नरक में और दूसरे को स्वर्ग में जाना है। ( देखिए : सूरतुल-ह़श्र, आयत : 20)
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मेरा चिंतन
11:25पृष्ठ 224 · जुज़ 12

وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوْمِهِۦٓ إِنِّى لَكُمْ نَذِيرٌ مُّبِينٌ ۝٢٥

और हमने नूह़ को उसकी जाति की ओर रसूल बनाकर भेजा। (उन्होंने कहा :) निःसंदेह मैं तुम्हें साफ़-साफ़ सावधान करने वाला हूँ।

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मेरा चिंतन
11:26पृष्ठ 224 · जुज़ 12

أَن لَّا تَعْبُدُوٓا۟ إِلَّا ٱللَّهَ ۖ إِنِّىٓ أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ أَلِيمٍ ۝٢٦

कि तुम केवल अल्लाह की इबादत करो। निःसंदेह मैं तुमपर एक दर्दनाक दिन की यातना से डरता हूँ।

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मेरा चिंतन
11:27पृष्ठ 224 · जुज़ 12

فَقَالَ ٱلْمَلَأُ ٱلَّذِينَ كَفَرُوا۟ مِن قَوْمِهِۦ مَا نَرَىٰكَ إِلَّا بَشَرًا مِّثْلَنَا وَمَا نَرَىٰكَ ٱتَّبَعَكَ إِلَّا ٱلَّذِينَ هُمْ أَرَاذِلُنَا بَادِىَ ٱلرَّأْىِ وَمَا نَرَىٰ لَكُمْ عَلَيْنَا مِن فَضْلٍۭ بَلْ نَظُنُّكُمْ كَـٰذِبِينَ ۝٢٧

तो उनकी जाति के उन प्रमुखों ने कहा, जिन्होंने कुफ्र किया था : हम तो तुम्हें अपने ही जैसा इनसान समझते हैं और हम देख रहे हैं कि तुम्हारा अनुसरण केवल वही लोग कर रहे हैं, जो हम में नीच हैं, जिन्होंने बिना सोचे-समझे तुम्हारी पैरवी की है।और हम अपने ऊपर तुम्हारी कोई श्रेष्ठता भी नहीं देखते। बल्कि हम तो तुम्हें झूठा समझते हैं।

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मेरा चिंतन
11:28पृष्ठ 224 · जुज़ 12

قَالَ يَـٰقَوْمِ أَرَءَيْتُمْ إِن كُنتُ عَلَىٰ بَيِّنَةٍ مِّن رَّبِّى وَءَاتَىٰنِى رَحْمَةً مِّنْ عِندِهِۦ فَعُمِّيَتْ عَلَيْكُمْ أَنُلْزِمُكُمُوهَا وَأَنتُمْ لَهَا كَـٰرِهُونَ ۝٢٨

नूह़ ने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! क्या तुमने इस बात पर विचार किया कि यदि मैं अपने पालनहार की ओर से एक स्पष्ट प्रमाण पर हूँ और उसने मुझे अपने पास से दया[8] प्रदान की हो, फिर वह तुम्हें सुझाई न दे, तो क्या हम तुम्हें उसको मानने पर मजबूर[9] कर सकते हैं, जबकि तुम उसे नापसंद करते हो?

अनुवाद टिप्पणियाँ
[8] अर्थात नुबुव्वत और मार्गदर्शन। [9] अर्थात मैं बलपूर्वक तुम्हें सत्य नहीं मनवा सकता।
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मेरा चिंतन
11:29पृष्ठ 225 · जुज़ 12

وَيَـٰقَوْمِ لَآ أَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ مَالًا ۖ إِنْ أَجْرِىَ إِلَّا عَلَى ٱللَّهِ ۚ وَمَآ أَنَا۠ بِطَارِدِ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ ۚ إِنَّهُم مُّلَـٰقُوا۟ رَبِّهِمْ وَلَـٰكِنِّىٓ أَرَىٰكُمْ قَوْمًا تَجْهَلُونَ ۝٢٩

और ऐ मेरी जाति के लोगो! मैं इस (संदेश के प्रचार) पर तुमसे कोई धन नहीं माँगता। मेरा बदला बस अल्लाह के ऊपर है। और मैं (अपने यहाँ से) उन लोगों को दूर नहीं हटा सकता, जो ईमान लाए हैं। निःसंदेह वे अपने पालनहार से मिलने वाले हैं। परन्तु मैं देख रहा हूँ कि तुम जाहिलों जैसी बातें कर रहे हो।

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मेरा चिंतन
11:30पृष्ठ 225 · जुज़ 12

وَيَـٰقَوْمِ مَن يَنصُرُنِى مِنَ ٱللَّهِ إِن طَرَدتُّهُمْ ۚ أَفَلَا تَذَكَّرُونَ ۝٣٠

और ऐ मेरी जाति के लोगो! अल्लाह के मुक़ाबले में कौन मेरी सहायता[10] करेगा, यदि मैं उन्हें अपने पास से निष्कासित कर दूँ? क्या तुम विचार नहीं करते?

अनुवाद टिप्पणियाँ
[10] अर्थात अल्लाह की पकड़ से कौन बचाएगा, जिसके पास ईमान और कर्म की प्रधानता है, धन-धान्य की नहीं।
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मेरा चिंतन
11:31पृष्ठ 225 · जुज़ 12

وَلَآ أَقُولُ لَكُمْ عِندِى خَزَآئِنُ ٱللَّهِ وَلَآ أَعْلَمُ ٱلْغَيْبَ وَلَآ أَقُولُ إِنِّى مَلَكٌ وَلَآ أَقُولُ لِلَّذِينَ تَزْدَرِىٓ أَعْيُنُكُمْ لَن يُؤْتِيَهُمُ ٱللَّهُ خَيْرًا ۖ ٱللَّهُ أَعْلَمُ بِمَا فِىٓ أَنفُسِهِمْ ۖ إِنِّىٓ إِذًا لَّمِنَ ٱلظَّـٰلِمِينَ ۝٣١

और मैं तुमसे यह नहीं कहता कि मेरे पास अल्लाह के ख़ज़ाने हैं और न मुझे परोक्ष का ज्ञान है और न मैं यह कहता हूँ कि निःसंदेह मैं एक फ़रिश्ता हूँ और न ही मैं उन लोगों के बारे में जिन्हें तुम्हारी आँखें तुच्छ समझती हैं, यह कहता हूँ कि अल्लाह उन्हें हरगिज़ कोई भलाई नहीं देगा। अल्लाह अधिक जानता है, जो कुछ उनके दिलों में है। (यदि मैं ऐसा कहूँ,) तो निश्चय ही मैं अत्याचारियों में से हो जाऊँगा।

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मेरा चिंतन
11:32पृष्ठ 225 · जुज़ 12

قَالُوا۟ يَـٰنُوحُ قَدْ جَـٰدَلْتَنَا فَأَكْثَرْتَ جِدَٰلَنَا فَأْتِنَا بِمَا تَعِدُنَآ إِن كُنتَ مِنَ ٱلصَّـٰدِقِينَ ۝٣٢

उन लोगों ने कहा : ऐ नूह़! तुमने हमसे झगड़ा किया और बहुत झगड़ लिया। अतः अब वह (यातना) हम पर ले आओ, जिसका तुम हमसे वादा करते हो, यदि तुम सच्चे हो।

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मेरा चिंतन
11:33पृष्ठ 225 · जुज़ 12

قَالَ إِنَّمَا يَأْتِيكُم بِهِ ٱللَّهُ إِن شَآءَ وَمَآ أَنتُم بِمُعْجِزِينَ ۝٣٣

उसने कहा : उसे तो तुम्हारे पास अल्लाह ही लाएगा, यदि वह चाहेगा और तुम (उसे) विवश करने वाले नहीं हो।

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मेरा चिंतन
11:34पृष्ठ 225 · जुज़ 12

وَلَا يَنفَعُكُمْ نُصْحِىٓ إِنْ أَرَدتُّ أَنْ أَنصَحَ لَكُمْ إِن كَانَ ٱللَّهُ يُرِيدُ أَن يُغْوِيَكُمْ ۚ هُوَ رَبُّكُمْ وَإِلَيْهِ تُرْجَعُونَ ۝٣٤

और मेरा उपदेश करना तुम्हें कोई लाभ नहीं देगा, अगर मैं तुम्हें उपदेश करना चाहूँ, जबकि अल्लाह तुम्हें गुमराह करना चाहता हो। वही तुम्हारा पालनहार है और तुम उसी की ओर लौटाए जाओगे।

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मेरा चिंतन
11:35पृष्ठ 225 · जुज़ 12

أَمْ يَقُولُونَ ٱفْتَرَىٰهُ ۖ قُلْ إِنِ ٱفْتَرَيْتُهُۥ فَعَلَىَّ إِجْرَامِى وَأَنَا۠ بَرِىٓءٌ مِّمَّا تُجْرِمُونَ ۝٣٥

क्या वे कहते हैं कि उसने इसे गढ़ लिया है? तुम कह दो कि यदि मैंने इसे गढ़ लिया है, तो मेरा अपराध मुझी पर है और मैं उससे निर्दोष हूँ, जो अपराध तुम कर रहे हो।

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मेरा चिंतन
11:36पृष्ठ 225 · जुज़ 12

وَأُوحِىَ إِلَىٰ نُوحٍ أَنَّهُۥ لَن يُؤْمِنَ مِن قَوْمِكَ إِلَّا مَن قَدْ ءَامَنَ فَلَا تَبْتَئِسْ بِمَا كَانُوا۟ يَفْعَلُونَ ۝٣٦

और नूह़ की ओर वह़्य (प्रकाशना) की गई कि तुम्हारी जाति में से जो लोग ईमान ला चुके हैं, अब उनके सिवा कोई ईमान नहीं लाएगा। अतः वे जो कुछ कर रहे हैं, उससे तुम दुःखी न हो।

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मेरा चिंतन
11:37पृष्ठ 225 · जुज़ 12

وَٱصْنَعِ ٱلْفُلْكَ بِأَعْيُنِنَا وَوَحْيِنَا وَلَا تُخَـٰطِبْنِى فِى ٱلَّذِينَ ظَلَمُوٓا۟ ۚ إِنَّهُم مُّغْرَقُونَ ۝٣٧

और हमारी आँखों के सामने और हमारी वह़्य के अनुसार एक नाव बनाओ और मुझसे उन लोगों के बारे में कुछ[11] न कहना, जिन्होंने अत्याचार किया है। निःसंदेह वे डुबाए जाने वाले हैं।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[11] अर्थात प्रार्थना और सिफ़ारिश न करना।
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मेरा चिंतन
11:38पृष्ठ 226 · जुज़ 12

وَيَصْنَعُ ٱلْفُلْكَ وَكُلَّمَا مَرَّ عَلَيْهِ مَلَأٌ مِّن قَوْمِهِۦ سَخِرُوا۟ مِنْهُ ۚ قَالَ إِن تَسْخَرُوا۟ مِنَّا فَإِنَّا نَسْخَرُ مِنكُمْ كَمَا تَسْخَرُونَ ۝٣٨

और वह नाव बनाने लगा। और जब भी उसकी जाति के प्रमुख लोग उसके पास से गुज़रते, तो उसकी हँसी उड़ाते। नूह़ ने कहा : यदि तुम हमारी हँसी उड़ाते हो, तो हम भी ऐसे ही (एक दिन) तुम्हारी हँसी उड़ाएँगे।

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मेरा चिंतन
11:39पृष्ठ 226 · जुज़ 12

فَسَوْفَ تَعْلَمُونَ مَن يَأْتِيهِ عَذَابٌ يُخْزِيهِ وَيَحِلُّ عَلَيْهِ عَذَابٌ مُّقِيمٌ ۝٣٩

फिर तुम्हें जल्द ही पता चल जाएगा कि किसपर अपमानकारी यातना आती है और किसपर स्थायी यातना उतरती है?

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मेरा चिंतन
11:40पृष्ठ 226 · जुज़ 12

حَتَّىٰٓ إِذَا جَآءَ أَمْرُنَا وَفَارَ ٱلتَّنُّورُ قُلْنَا ٱحْمِلْ فِيهَا مِن كُلٍّ زَوْجَيْنِ ٱثْنَيْنِ وَأَهْلَكَ إِلَّا مَن سَبَقَ عَلَيْهِ ٱلْقَوْلُ وَمَنْ ءَامَنَ ۚ وَمَآ ءَامَنَ مَعَهُۥٓ إِلَّا قَلِيلٌ ۝٤٠

यहाँ तक कि जब हमारा आदेश आ गया और तन्नूर उबलने लगा, तो हमने (नूह़ से) कहा : "उसमें प्रत्येक प्रकार के जीवों में से जोड़े-जोड़े चढ़ा लो और अपने परिजनों को (भी चढ़ा लो) सिवाय उसके जिसके बारे में पहले ही बता दिया गाय है और उन लोगों को (भी चढ़ा लो) जो ईमान लाए हैं।" और उसके साथ थोड़े लोग ही ईमान लाए थे।

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मेरा चिंतन
11:41पृष्ठ 226 · जुज़ 12

۞ وَقَالَ ٱرْكَبُوا۟ فِيهَا بِسْمِ ٱللَّهِ مَجْر۪ىٰهَا وَمُرْسَىٰهَآ ۚ إِنَّ رَبِّى لَغَفُورٌ رَّحِيمٌ ۝٤١

और नूह़ ने कहा : इसमें सवार हो जाओ। अल्लाह के नाम ही से इसका चलना तथा इसका ठहरना है। निःसंदेह मेरा पालनहार बड़ा क्षमाशील, दयावान् है।

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मेरा चिंतन
11:42पृष्ठ 226 · जुज़ 12

وَهِىَ تَجْرِى بِهِمْ فِى مَوْجٍ كَٱلْجِبَالِ وَنَادَىٰ نُوحٌ ٱبْنَهُۥ وَكَانَ فِى مَعْزِلٍ يَـٰبُنَىَّ ٱرْكَب مَّعَنَا وَلَا تَكُن مَّعَ ٱلْكَـٰفِرِينَ ۝٤٢

और वह उन्हें लिए पर्वतों जैसी ऊँची लहरों में चलती रही। और नूह़ ने अपने बेटे को, जो (उनसे) अलग-थलग था, पुकारा : ऐ मेरे बेटे! मेरे साथ सवार हो जा और काफ़िरों के साथ न रह।

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मेरा चिंतन
11:43पृष्ठ 226 · जुज़ 12

قَالَ سَـَٔاوِىٓ إِلَىٰ جَبَلٍ يَعْصِمُنِى مِنَ ٱلْمَآءِ ۚ قَالَ لَا عَاصِمَ ٱلْيَوْمَ مِنْ أَمْرِ ٱللَّهِ إِلَّا مَن رَّحِمَ ۚ وَحَالَ بَيْنَهُمَا ٱلْمَوْجُ فَكَانَ مِنَ ٱلْمُغْرَقِينَ ۝٤٣

उसने कहा : मैं किसी पर्वत की ओर शरण ले लूँगा, जो मुझे पानी से बचा लेगा। नूह़ ने कहा : आज अल्लाह के आदेश (यातना) से कोई बचाने वाला नहीं। यह और बात है कि किसी पर उसकी दया हो जाए। और (इतने ही में) दोनों के बीच एक लहर आ गई और वह डूबने वालों में से हो गया।

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मेरा चिंतन
11:44पृष्ठ 226 · जुज़ 12

وَقِيلَ يَـٰٓأَرْضُ ٱبْلَعِى مَآءَكِ وَيَـٰسَمَآءُ أَقْلِعِى وَغِيضَ ٱلْمَآءُ وَقُضِىَ ٱلْأَمْرُ وَٱسْتَوَتْ عَلَى ٱلْجُودِىِّ ۖ وَقِيلَ بُعْدًا لِّلْقَوْمِ ٱلظَّـٰلِمِينَ ۝٤٤

और कहा गया : ऐ धरती! अपना पानी निगल जा और ऐ आकाश! थम जा और पानी उतर गया और आदेश पूरा कर दिया गया और नाव 'जूदी'[12] पर ठहर गई और कहा गया कि अत्याचारियों के लिए (अल्लाह की दया से) दूरी है।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[12] "जूदी" एक पर्वत का नाम है, जो कुर्दिस्तान में "इब्ने उमर" द्वीप के उत्तर-पूर्व ओर स्थित है। और आज भी जूदी के नाम से ही प्रसिद्ध है।
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मेरा चिंतन
11:45पृष्ठ 226 · जुज़ 12

وَنَادَىٰ نُوحٌ رَّبَّهُۥ فَقَالَ رَبِّ إِنَّ ٱبْنِى مِنْ أَهْلِى وَإِنَّ وَعْدَكَ ٱلْحَقُّ وَأَنتَ أَحْكَمُ ٱلْحَـٰكِمِينَ ۝٤٥

तथा नूह़ ने अपने पालनहार को पुकारा और कहा : मेरे पालनहार! मेरा बेटा मेरे घर वालों में से है और निःसंदेह तेरा वचन सत्य है तथा तू ही सबसे अच्छा निर्णय करने वाला है।

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मेरा चिंतन
11:46पृष्ठ 227 · जुज़ 12

قَالَ يَـٰنُوحُ إِنَّهُۥ لَيْسَ مِنْ أَهْلِكَ ۖ إِنَّهُۥ عَمَلٌ غَيْرُ صَـٰلِحٍ ۖ فَلَا تَسْـَٔلْنِ مَا لَيْسَ لَكَ بِهِۦ عِلْمٌ ۖ إِنِّىٓ أَعِظُكَ أَن تَكُونَ مِنَ ٱلْجَـٰهِلِينَ ۝٤٦

(अल्लाह ने) कहा : ऐ नूह़! वह तेरे घर वालों में से नहीं है। यह माँग उचित नहीं है। अतः मुझसे उस चीज़ का प्रश्न न कर, जिसका तुझे कोई ज्ञान नहीं। मैं तुझे समझाता हूँ कि अज्ञानियों में से न हो जा।

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मेरा चिंतन
11:47पृष्ठ 227 · जुज़ 12

قَالَ رَبِّ إِنِّىٓ أَعُوذُ بِكَ أَنْ أَسْـَٔلَكَ مَا لَيْسَ لِى بِهِۦ عِلْمٌ ۖ وَإِلَّا تَغْفِرْ لِى وَتَرْحَمْنِىٓ أَكُن مِّنَ ٱلْخَـٰسِرِينَ ۝٤٧

नूह़ ने कहा : मेरे पालनहार! मैं तेरी शरण चाहता हूँ इस बात से कि मैं तुझसे ऐसी चीज़ का प्रश्न करूँ, जिस (की वास्तविक्ता) का मुझे कोई ज्ञान नहीं[13] और यदि तूने मुझे क्षमा नहीं किया और मुझपर दया नहीं की, तो मैं नुक़सान उठाने वालों में से हो जाऊँगा।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[13] अर्थात जब नूह़ (अलैहिस्सलाम) को बता दिया गया कि तुम्हारा पुत्र ईमान वालों में से नहीं है, इसलिए वह अल्लाह के अज़ाब से बच नहीं सकता, तो नूह़ अलैहिस्सलाम तुरंत अल्लाह से क्षमा माँगने लगे।
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मेरा चिंतन
11:48पृष्ठ 227 · जुज़ 12

قِيلَ يَـٰنُوحُ ٱهْبِطْ بِسَلَـٰمٍ مِّنَّا وَبَرَكَـٰتٍ عَلَيْكَ وَعَلَىٰٓ أُمَمٍ مِّمَّن مَّعَكَ ۚ وَأُمَمٌ سَنُمَتِّعُهُمْ ثُمَّ يَمَسُّهُم مِّنَّا عَذَابٌ أَلِيمٌ ۝٤٨

कहा गया : ऐ नूह़! हमारी ओर से सुरक्षा और बरकतों के साथ उतर जाओ, जो तुम पर और उन समूहो पर हैं जो तुम्हारे साथ हैं। तथा कुछ समूह ऐसे हैं, जिन्हें हम (दुनिया में) जीवन-यापन सामग्री प्रदान करेंगें, फिर उन्हें हमारी ओर से कष्टदायक यातना पहुँचेगी।

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मेरा चिंतन
11:49पृष्ठ 227 · जुज़ 12

تِلْكَ مِنْ أَنۢبَآءِ ٱلْغَيْبِ نُوحِيهَآ إِلَيْكَ ۖ مَا كُنتَ تَعْلَمُهَآ أَنتَ وَلَا قَوْمُكَ مِن قَبْلِ هَـٰذَا ۖ فَٱصْبِرْ ۖ إِنَّ ٱلْعَـٰقِبَةَ لِلْمُتَّقِينَ ۝٤٩

ये ग़ैब (परोक्ष) की कुछ बातें हैं, जिन्हें (ऐ नबी!) हम आपकी ओर वह़्य कर रहे हैं। इससे पूर्व न तो आप इन्हें जानते थे और न आपकी जाति के लोग। अतः आप सब्र करें। निःसंदेह अच्छा परिणाम तक़वा वालों के लिए है।

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मेरा चिंतन
11:50पृष्ठ 227 · जुज़ 12

وَإِلَىٰ عَادٍ أَخَاهُمْ هُودًا ۚ قَالَ يَـٰقَوْمِ ٱعْبُدُوا۟ ٱللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَـٰهٍ غَيْرُهُۥٓ ۖ إِنْ أَنتُمْ إِلَّا مُفْتَرُونَ ۝٥٠

और 'आद' (जाति) की ओर उनके भाई हूद को भेजा। उन्होंने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अल्लाह की इबादत (उपासना) करो। उसके अलावा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं। तुम तो केवल झूठी बातें गढ़ने वाले लोग हो।[14]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[14] अर्थात अल्लाह के सिवा तुमने जो पूज्य बना रखे हैं, वे तुम्हारे मनगढ़ंत पूज्य हैं।
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मेरा चिंतन
11:51पृष्ठ 227 · जुज़ 12

يَـٰقَوْمِ لَآ أَسْـَٔلُكُمْ عَلَيْهِ أَجْرًا ۖ إِنْ أَجْرِىَ إِلَّا عَلَى ٱلَّذِى فَطَرَنِىٓ ۚ أَفَلَا تَعْقِلُونَ ۝٥١

ऐ मेरी जाति के लोगो! मैं तुमसे इस (उपदेश) पर कोई बदला नहीं चाहता; मेरा पारिश्रमिक (बदला) उसी (अल्लाह) पर है, जिसने मुझे पैदा किया है। तो क्या तुम (इसे) नहीं समझते?[15]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[15] अर्थात यदि तुम समझ रखते, तो अवश्य सोचते कि एक व्यक्ति अपने किसी सांसारिक स्वार्थ के बिना क्यों हमें रात-दिन उपदेश दे रहा है और सारे दुःख झेल रहा है? उसके पास कोई ऐसी बात अवश्य होगी जिसके लिए अपनी जान जोखिम में डाल रहा है।
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मेरा चिंतन
11:52पृष्ठ 227 · जुज़ 12

وَيَـٰقَوْمِ ٱسْتَغْفِرُوا۟ رَبَّكُمْ ثُمَّ تُوبُوٓا۟ إِلَيْهِ يُرْسِلِ ٱلسَّمَآءَ عَلَيْكُم مِّدْرَارًا وَيَزِدْكُمْ قُوَّةً إِلَىٰ قُوَّتِكُمْ وَلَا تَتَوَلَّوْا۟ مُجْرِمِينَ ۝٥٢

ऐ मेरी जाति के लोगो! अपने पालनहार से क्षमा याचना करो। फिर उसकी ओर पलट आओ। वह आकाश से तुमपर खूब बारिश बरसाएगा और तुम्हारी शक्ति और अधिक बढ़ा देगा और विमुख हो कर अपराधी न बनो।

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मेरा चिंतन
11:53पृष्ठ 227 · जुज़ 12

قَالُوا۟ يَـٰهُودُ مَا جِئْتَنَا بِبَيِّنَةٍ وَمَا نَحْنُ بِتَارِكِىٓ ءَالِهَتِنَا عَن قَوْلِكَ وَمَا نَحْنُ لَكَ بِمُؤْمِنِينَ ۝٥٣

उन्होंने कहा : ऐ हूद! तुम हमारे पास कोई स्पष्ट प्रमाण लेकर नहीं आए तथा हम तुम्हारी बात के कारण अपने पूज्यों को छोड़ने वाले नहीं हैं और न हम तुम्हारा विश्वास करने वाले हैं।

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मेरा चिंतन
11:54पृष्ठ 228 · जुज़ 12

إِن نَّقُولُ إِلَّا ٱعْتَرَىٰكَ بَعْضُ ءَالِهَتِنَا بِسُوٓءٍ ۗ قَالَ إِنِّىٓ أُشْهِدُ ٱللَّهَ وَٱشْهَدُوٓا۟ أَنِّى بَرِىٓءٌ مِّمَّا تُشْرِكُونَ ۝٥٤

हम तो यही कहेंगे कि हमारे किसी देवता ने तुझे पागल बना दिया है। हूद ने कहा : मैं अल्लाह को (गवाह) बनाता हूँ और तुम भी गवाह रहो कि मैं उस शिर्क से बरी हूँ, जो तुम कर रहे हो।

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मेरा चिंतन
11:55पृष्ठ 228 · जुज़ 12

مِن دُونِهِۦ ۖ فَكِيدُونِى جَمِيعًا ثُمَّ لَا تُنظِرُونِ ۝٥٥

उस (अल्लाह) के सिवा। अतः तुम सब मिलकर मेरे विरुद्ध चाल चलो, फिर मुझे मोहलत न दो।[16]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[16] अर्थात तुम और तुम्हारे सब देवी-देवता मिलकर भी मेरा कुछ बिगाड़ नहीं सकते। क्योंकि मेरा भरोसा जिस अल्लाह पर है, पूरा संसार उसके नियंत्रण में है, उसके आगे किसी की शक्ति नहीं कि किसी का कुछ बिगाड़ सके।
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मेरा चिंतन
11:56पृष्ठ 228 · जुज़ 12

إِنِّى تَوَكَّلْتُ عَلَى ٱللَّهِ رَبِّى وَرَبِّكُم ۚ مَّا مِن دَآبَّةٍ إِلَّا هُوَ ءَاخِذٌۢ بِنَاصِيَتِهَآ ۚ إِنَّ رَبِّى عَلَىٰ صِرَٰطٍ مُّسْتَقِيمٍ ۝٥٦

निःसंदेह मैंने अपने पालनहार और तुम्हारे पालनहार, अल्लाह पर भरोसा किया है। कोई चलने वाला जीव नहीं, परंतु वह उसके माथे के बालों को पकड़े हुए है। निश्चय ही मेरा पालनहार सीधे रास्ते[17] पर है।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[17] अर्थात उसका रास्ता अत्याचार का रास्ता नहीं हो सकता कि तुम दुराचारी और कुपथ में रहकर सफल रहो और मैं सदाचारी रहकर हानि में पड़ूँ।
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मेरा चिंतन
11:57पृष्ठ 228 · जुज़ 12

فَإِن تَوَلَّوْا۟ فَقَدْ أَبْلَغْتُكُم مَّآ أُرْسِلْتُ بِهِۦٓ إِلَيْكُمْ ۚ وَيَسْتَخْلِفُ رَبِّى قَوْمًا غَيْرَكُمْ وَلَا تَضُرُّونَهُۥ شَيْـًٔا ۚ إِنَّ رَبِّى عَلَىٰ كُلِّ شَىْءٍ حَفِيظٌ ۝٥٧

फिर यदि तुम मुँह फेरो, तो मैं तुम्हें वह संदेश पहुँचा चुका, जिसे देकर मुझे तुम्हारी ओर भेजा गया था। और मेरा पालनहार तुम्हारे स्थान पर किसी अन्य जाति को ले आएगा[18] और तुम उसे कुछ भी हानि नहीं पहुँचा सकोगे। निःसंदेह मेरा पालनहार प्रत्येक चीज़ पर संरक्षक है।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[18] अर्थात तुम्हें ध्वस्त निरस्त कर देगा।
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मेरा चिंतन
11:58पृष्ठ 228 · जुज़ 12

وَلَمَّا جَآءَ أَمْرُنَا نَجَّيْنَا هُودًا وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ مَعَهُۥ بِرَحْمَةٍ مِّنَّا وَنَجَّيْنَـٰهُم مِّنْ عَذَابٍ غَلِيظٍ ۝٥٨

और जब हमारा आदेश आ पहुँचा, तो हमने हूद और उसके साथ ईमान लाने वालों को अपनी दया से बचा लिया। तथा हमने उन्हें एक कठोर यातना से छुटकारा दिया।

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मेरा चिंतन
11:59पृष्ठ 228 · जुज़ 12

وَتِلْكَ عَادٌ ۖ جَحَدُوا۟ بِـَٔايَـٰتِ رَبِّهِمْ وَعَصَوْا۟ رُسُلَهُۥ وَٱتَّبَعُوٓا۟ أَمْرَ كُلِّ جَبَّارٍ عَنِيدٍ ۝٥٩

ये वही 'आद' (जाति) के लोग हैं, जिन्होंने अपने पालनहार की आयतों (निशानियों) का इनकार किया और उसके रसूलों की बात नहीं मानी और हर ऐसे व्यक्ति के पीछे चलते रहे, जो अभिमानी, उद्दंड हो।

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मेरा चिंतन
11:60पृष्ठ 228 · जुज़ 12

وَأُتْبِعُوا۟ فِى هَـٰذِهِ ٱلدُّنْيَا لَعْنَةً وَيَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ ۗ أَلَآ إِنَّ عَادًا كَفَرُوا۟ رَبَّهُمْ ۗ أَلَا بُعْدًا لِّعَادٍ قَوْمِ هُودٍ ۝٦٠

और इस संसार में उनके साथ धिक्कार लगा दी गई तथा क़ियामत के दिन भी लगी रहेगी। सुनो! आद ने अपने पालनहार का इनकार किया। सुनो! हूद की जाति आद के लिए दूरी[19] हो!

अनुवाद टिप्पणियाँ
[19] अर्थात अल्लाह की दया से दूरी। इसका प्रयोग धिक्कार और विनाश के अर्थ में होता है।
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मेरा चिंतन
11:61पृष्ठ 228 · जुज़ 12

۞ وَإِلَىٰ ثَمُودَ أَخَاهُمْ صَـٰلِحًا ۚ قَالَ يَـٰقَوْمِ ٱعْبُدُوا۟ ٱللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَـٰهٍ غَيْرُهُۥ ۖ هُوَ أَنشَأَكُم مِّنَ ٱلْأَرْضِ وَٱسْتَعْمَرَكُمْ فِيهَا فَٱسْتَغْفِرُوهُ ثُمَّ تُوبُوٓا۟ إِلَيْهِ ۚ إِنَّ رَبِّى قَرِيبٌ مُّجِيبٌ ۝٦١

और समूद[20] की ओर उनके भाई सालेह़ को भेजा। उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अल्लाह की इबादत (पूजा) करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई पूज्य नहीं है। उसी ने तुम्हें धरती से पैदा किया और तुम्हें उसमें बसाया। अतः उससे क्षमा माँगो; फिर उसकी ओर पलट आओ। निःसंदेह मेरा पालनहार निकट है (और प्रार्थनाओं को) स्वीकार करने वाला है।[21]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[20] यह जाति तबूक और मदीना के बीच "अल-ह़िज्र" में आबाद थी। [21] देखिए : सूरतुल-बक़रह, आयत : 186.
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मेरा चिंतन
11:62पृष्ठ 228 · जुज़ 12

قَالُوا۟ يَـٰصَـٰلِحُ قَدْ كُنتَ فِينَا مَرْجُوًّا قَبْلَ هَـٰذَآ ۖ أَتَنْهَىٰنَآ أَن نَّعْبُدَ مَا يَعْبُدُ ءَابَآؤُنَا وَإِنَّنَا لَفِى شَكٍّ مِّمَّا تَدْعُونَآ إِلَيْهِ مُرِيبٍ ۝٦٢

उन्होंने कहा : ऐ सालेह! हमें इससे पहले तुझसे बड़ी आशाएँ थीं। क्या तू हमें उन (बुतों) की पूजा करने से रोक रहा है, जिनकी पूजा हमारे बाप-दादा करते आए हैं? तू जिस चीज़ की ओर हमें बुला रहा है, निःसंदेह उसके बारे में हमें (ऐसा) संदेह है, जो हमें दुविधा में डाले हुए है।

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मेरा चिंतन
11:63पृष्ठ 229 · जुज़ 12

قَالَ يَـٰقَوْمِ أَرَءَيْتُمْ إِن كُنتُ عَلَىٰ بَيِّنَةٍ مِّن رَّبِّى وَءَاتَىٰنِى مِنْهُ رَحْمَةً فَمَن يَنصُرُنِى مِنَ ٱللَّهِ إِنْ عَصَيْتُهُۥ ۖ فَمَا تَزِيدُونَنِى غَيْرَ تَخْسِيرٍ ۝٦٣

उस (सालेह़) ने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! क्या तुमने विचार किया कि यदि मैं अपने पालनहार की ओर से एक स्पष्ट प्रमाण पर हूँ और उसने मुझे अपनी दया प्रदान की हो, फिर मैं उसकी अवज्ञा करूँ, तो कौन है, जो अल्लाह के मुक़ाबले में मेरी सहायता करेगा? तुम मुझे घाटे में डालने के सिवा कुछ नहीं करोगे।

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मेरा चिंतन
11:64पृष्ठ 229 · जुज़ 12

وَيَـٰقَوْمِ هَـٰذِهِۦ نَاقَةُ ٱللَّهِ لَكُمْ ءَايَةً فَذَرُوهَا تَأْكُلْ فِىٓ أَرْضِ ٱللَّهِ وَلَا تَمَسُّوهَا بِسُوٓءٍ فَيَأْخُذَكُمْ عَذَابٌ قَرِيبٌ ۝٦٤

और ऐ मेरी जाति के लोगो! यह अल्लाह की ऊँटनी[22] तुम्हारे लिए एक निशानी है। अतः इसे छोड़ दो, अल्लाह की धरती में चरती फिरे और इसे कोई कष्ट न पहुँचाओ, अन्यथा तुम्हें अति शीघ्र यातना पकड़ लेगी।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[22] उसे अल्लाह की ऊँटनी इसलिए कहा गया है कि उसे अल्लाह ने उनके लिए एक पर्वत से निकाला था। क्योंकि उन्होंने उसकी माँग की थी कि यदि पर्वत से ऊँटनी निकलेगी, तो हम ईमान ले आएँगे। (तफ़्सीर क़ुर्तुबी)
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मेरा चिंतन
11:65पृष्ठ 229 · जुज़ 12

فَعَقَرُوهَا فَقَالَ تَمَتَّعُوا۟ فِى دَارِكُمْ ثَلَـٰثَةَ أَيَّامٍ ۖ ذَٰلِكَ وَعْدٌ غَيْرُ مَكْذُوبٍ ۝٦٥

तो उन्होंने उसे मार डाला। तब सालेह़ ने कहा : तुम अपने नगर में तीन दिन अपने जीवन का आनंद लो! यह वचन झूठा सिद्ध होने वाला नहीं है।

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मेरा चिंतन
11:66पृष्ठ 229 · जुज़ 12

فَلَمَّا جَآءَ أَمْرُنَا نَجَّيْنَا صَـٰلِحًا وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ مَعَهُۥ بِرَحْمَةٍ مِّنَّا وَمِنْ خِزْىِ يَوْمِئِذٍ ۗ إِنَّ رَبَّكَ هُوَ ٱلْقَوِىُّ ٱلْعَزِيزُ ۝٦٦

फिर जब हमारा आदेश आ गया, तो हमने सालेह़ को और उन लोगों को जो उसके साथ ईमान लाए थे, अपनी दया से बचा लिया और उस दिन के अपमान से भी (उन्हें सुरक्षित रखा)। निःसंदेह आपका पालनहार ही शक्तिशाली, प्रभुत्वशाली है।

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मेरा चिंतन
11:67पृष्ठ 229 · जुज़ 12

وَأَخَذَ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ ٱلصَّيْحَةُ فَأَصْبَحُوا۟ فِى دِيَـٰرِهِمْ جَـٰثِمِينَ ۝٦٧

और अत्याचारियों को भयंकर आवाज़ (चीत्कार) ने पकड़ लिया और वे अपने घरों में औंधे पड़े रह गए।

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मेरा चिंतन
11:68पृष्ठ 229 · जुज़ 12

كَأَن لَّمْ يَغْنَوْا۟ فِيهَآ ۗ أَلَآ إِنَّ ثَمُودَا۟ كَفَرُوا۟ رَبَّهُمْ ۗ أَلَا بُعْدًا لِّثَمُودَ ۝٦٨

जैसै वे वहाँ कभी बसे ही नहीं थे। सावधान! समूद ने अपने पालनहार का इनकार किया। सुन लो! समूद के लिए (अल्लाह की दया से) दूरी हो।

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मेरा चिंतन
11:69पृष्ठ 229 · जुज़ 12

وَلَقَدْ جَآءَتْ رُسُلُنَآ إِبْرَٰهِيمَ بِٱلْبُشْرَىٰ قَالُوا۟ سَلَـٰمًا ۖ قَالَ سَلَـٰمٌ ۖ فَمَا لَبِثَ أَن جَآءَ بِعِجْلٍ حَنِيذٍ ۝٦٩

और हमारे फ़रिश्ते इबराहीम के पास शुभ सूचना लेकर आए। उन्होंने सलाम कहा, तो इबराहीम ने सलाम का जवाब दिया। फिर देर न हुई कि वह एक भुना हुआ वछड़ा[23] ले आया।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[23] अर्थात अतिथि सत्कार के लिए।
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मेरा चिंतन
11:70पृष्ठ 229 · जुज़ 12

فَلَمَّا رَءَآ أَيْدِيَهُمْ لَا تَصِلُ إِلَيْهِ نَكِرَهُمْ وَأَوْجَسَ مِنْهُمْ خِيفَةً ۚ قَالُوا۟ لَا تَخَفْ إِنَّآ أُرْسِلْنَآ إِلَىٰ قَوْمِ لُوطٍ ۝٧٠

फिर जब देखा कि उनके हाथ खाने की ओर नहीं बढ़ रहे हैं, तो उनके प्रति अचंभे में पड़ गए और दिल में उनसे भय महसूस किया। उन्होंने कहा : भय न करो। दरअसल हम लूत[24] की जाति की ओर भेजे गए हैं।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[24] लूत अलैहिस्सलाम को भाष्यकारों ने इबराहीम अलैहिस्सलाम का भतीजा बताया है, जिनको अल्लाह ने सदूम की ओर नबी बना कर भेजा।
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मेरा चिंतन
11:71पृष्ठ 229 · जुज़ 12

وَٱمْرَأَتُهُۥ قَآئِمَةٌ فَضَحِكَتْ فَبَشَّرْنَـٰهَا بِإِسْحَـٰقَ وَمِن وَرَآءِ إِسْحَـٰقَ يَعْقُوبَ ۝٧١

और उस (इबराहीम) की पत्नी खड़ी थी। चुनाँचे वह हँस पड़ी[25], तो हमने उसे इसह़ाक़ की और इसह़ाक़ के बाद याक़ूब की शुभ सूचना[26] दी।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[25] कि भय की कोई बात नहीं है। [26] फ़रिश्तों द्वारा।
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मेरा चिंतन
11:72पृष्ठ 230 · जुज़ 12

قَالَتْ يَـٰوَيْلَتَىٰٓ ءَأَلِدُ وَأَنَا۠ عَجُوزٌ وَهَـٰذَا بَعْلِى شَيْخًا ۖ إِنَّ هَـٰذَا لَشَىْءٌ عَجِيبٌ ۝٧٢

वह बोली : हाय मेरा दुर्भाग्य! क्या मेरी संतान होगी, जबकि मैं बूढ़ी हो चुकी हूँ और मेरा यह पति भी बूढ़ा है? वास्तव में, यह बड़े आश्चर्य की बात है।

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मेरा चिंतन
11:73पृष्ठ 230 · जुज़ 12

قَالُوٓا۟ أَتَعْجَبِينَ مِنْ أَمْرِ ٱللَّهِ ۖ رَحْمَتُ ٱللَّهِ وَبَرَكَـٰتُهُۥ عَلَيْكُمْ أَهْلَ ٱلْبَيْتِ ۚ إِنَّهُۥ حَمِيدٌ مَّجِيدٌ ۝٧٣

फ़रिश्तों ने कहा : क्या तू अल्लाह के आदेश पर आश्चर्य करती है? ऐ घर वालो! तुम सब पर अल्लाह की दया तथा बरकतों की वर्षा हो। निःसंदेह वह अति प्रशंसित, गौरवशाली है।

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मेरा चिंतन
11:74पृष्ठ 230 · जुज़ 12

فَلَمَّا ذَهَبَ عَنْ إِبْرَٰهِيمَ ٱلرَّوْعُ وَجَآءَتْهُ ٱلْبُشْرَىٰ يُجَـٰدِلُنَا فِى قَوْمِ لُوطٍ ۝٧٤

फिर जब इबराहीम का भय दूर हो गया और उसे शुभ सूचना मिल गई, तो वह हमसे लूत की जाति के बारे में झगड़ने लगा।[27]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[27] अर्थात प्रार्थना करने लगा कि लूत की जाति को और संभलने का अवसर दिया जाए। हो सकता है कि वे ईमान ले आएँ।
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मेरा चिंतन
11:75पृष्ठ 230 · जुज़ 12

إِنَّ إِبْرَٰهِيمَ لَحَلِيمٌ أَوَّٰهٌ مُّنِيبٌ ۝٧٥

निःसंदेह इबराहीम बड़ा सहनशील, बहुत विलाप करने वाला और हर मामले में अल्लाह की ओर पलटने वाला था।

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मेरा चिंतन
11:76पृष्ठ 230 · जुज़ 12

يَـٰٓإِبْرَٰهِيمُ أَعْرِضْ عَنْ هَـٰذَآ ۖ إِنَّهُۥ قَدْ جَآءَ أَمْرُ رَبِّكَ ۖ وَإِنَّهُمْ ءَاتِيهِمْ عَذَابٌ غَيْرُ مَرْدُودٍ ۝٧٦

(फ़रिश्तों ने कहा :) ऐ इबराहीम! इस बात को रहने दो। निःसंदेह तुम्हारे पालनहार का आदेश[28] आ चुका तथा उनपर ऐसी यातना आने वाली है, जो हटाई जाने वाली नहीं।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[28] आर्थात यातना का आदेश।
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मेरा चिंतन
11:77पृष्ठ 230 · जुज़ 12

وَلَمَّا جَآءَتْ رُسُلُنَا لُوطًا سِىٓءَ بِهِمْ وَضَاقَ بِهِمْ ذَرْعًا وَقَالَ هَـٰذَا يَوْمٌ عَصِيبٌ ۝٧٧

और जब हमारे फ़रिश्ते लूत के पास आए, तो उनका आना उसे बुरा लगा और उनके कारण व्याकुल[29] हो गया और कहा : यह तो बड़ा कठोर दिन है।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[29] फ़रिश्ते सुंदर किशोरों के रूप में आए थे। और लूत अलैहिस्सलाम की जाति का आचरण यह था कि वे बालमैथुन में रूचि रखती थे। इसलिए उन्होंने उनको पकड़ने की कोशिश की। इसीलिए इन अतिथियों के आने पर लूत अलैहिस्सलाम व्याकुल हो गए थे।
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मेरा चिंतन
11:78पृष्ठ 230 · जुज़ 12

وَجَآءَهُۥ قَوْمُهُۥ يُهْرَعُونَ إِلَيْهِ وَمِن قَبْلُ كَانُوا۟ يَعْمَلُونَ ٱلسَّيِّـَٔاتِ ۚ قَالَ يَـٰقَوْمِ هَـٰٓؤُلَآءِ بَنَاتِى هُنَّ أَطْهَرُ لَكُمْ ۖ فَٱتَّقُوا۟ ٱللَّهَ وَلَا تُخْزُونِ فِى ضَيْفِىٓ ۖ أَلَيْسَ مِنكُمْ رَجُلٌ رَّشِيدٌ ۝٧٨

और उसकी जाति के लोग दौड़ते हुए उसके पास आ गए और वे पहले से कुकर्म[30] किया करते थे। उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! ये मेरी[31] बेटियाँ हैं, ये तुम्हारे लिए अधिक पवित्र हैं। अतः अल्लाह से डरो और मुझे मेरे अतिथियों में अपमानित न करो। क्या तुममें कोई भला आदमी नहीं?

अनुवाद टिप्पणियाँ
[30] अर्थात बालमैथुन। (तफ़्सीर क़ुर्तुबी) [31] अर्थात बस्ती की स्त्रियाँ। क्योंकि जाति का नबी उनके पिता के समान होता है। (तफ़्सीर क़ुर्तुबी)
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मेरा चिंतन
11:79पृष्ठ 230 · जुज़ 12

قَالُوا۟ لَقَدْ عَلِمْتَ مَا لَنَا فِى بَنَاتِكَ مِنْ حَقٍّ وَإِنَّكَ لَتَعْلَمُ مَا نُرِيدُ ۝٧٩

उन लोगों ने कहा : निश्चय तुम तो जानते हो कि हमें तुम्हारी बेटियों से कोई मतलब नहीं।[32] तथा निःसंदेह तुम भली-भाँति जानते हो कि हम क्या चाहते हैं।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[32] अर्थात हमें स्त्रियों में कोई रूचि नहीं है।
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मेरा चिंतन
11:80पृष्ठ 230 · जुज़ 12

قَالَ لَوْ أَنَّ لِى بِكُمْ قُوَّةً أَوْ ءَاوِىٓ إِلَىٰ رُكْنٍ شَدِيدٍ ۝٨٠

लूत ने कहा : काश, मेरे पास तुमसे मुक़ाबले की शक्ति होती या मैं किसी मज़बूत सहारे की शरण लेता!

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मेरा चिंतन
11:81पृष्ठ 230 · जुज़ 12

قَالُوا۟ يَـٰلُوطُ إِنَّا رُسُلُ رَبِّكَ لَن يَصِلُوٓا۟ إِلَيْكَ ۖ فَأَسْرِ بِأَهْلِكَ بِقِطْعٍ مِّنَ ٱلَّيْلِ وَلَا يَلْتَفِتْ مِنكُمْ أَحَدٌ إِلَّا ٱمْرَأَتَكَ ۖ إِنَّهُۥ مُصِيبُهَا مَآ أَصَابَهُمْ ۚ إِنَّ مَوْعِدَهُمُ ٱلصُّبْحُ ۚ أَلَيْسَ ٱلصُّبْحُ بِقَرِيبٍ ۝٨١

फ़रिश्तों ने कहा : ऐ लूत! हम तेरे पालनहार के भेजे हुए (फ़रिश्ते) हैं। वे कदापि तेरे पास नहीं पहुँच सकेंगे। अतः तू रात के किसी हिस्से में अपने घरवालों को लेकर निकल जा और तुममें से कोई पीछे मुड़कर न देखे, सिवाय तेरी पत्नी के। उसपर भी वही बीतने वाला है, जो उनपर बीतेगा। उनकी यातना का निर्धारित समय प्रातः काल है। क्या प्रातः काल निकट नहीं है?

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मेरा चिंतन
11:82पृष्ठ 231 · जुज़ 12

فَلَمَّا جَآءَ أَمْرُنَا جَعَلْنَا عَـٰلِيَهَا سَافِلَهَا وَأَمْطَرْنَا عَلَيْهَا حِجَارَةً مِّن سِجِّيلٍ مَّنضُودٍ ۝٨٢

फिर जब हमारा आदेश आ गया, तो हमने उस बस्ती को तहस-नहस कर दिया और उनपर कंकरियों की ताबड़-तोड़ बारिश कर दी।

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मेरा चिंतन
11:83पृष्ठ 231 · जुज़ 12

مُّسَوَّمَةً عِندَ رَبِّكَ ۖ وَمَا هِىَ مِنَ ٱلظَّـٰلِمِينَ بِبَعِيدٍ ۝٨٣

जो तेरे पालनहार के यहाँ चिह्न लगाई हुई थीं और वह[33] अत्याचारियों[34] से कुछ दूर नहीं।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[33] अर्थात सदूम, जो समूद की बस्ती थी। [34] अर्थात आज भी जो उनकी नीति पर चल रहे हैं, उनपर ऐसी ही यातना आ सकती है।
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मेरा चिंतन
11:84पृष्ठ 231 · जुज़ 12

۞ وَإِلَىٰ مَدْيَنَ أَخَاهُمْ شُعَيْبًا ۚ قَالَ يَـٰقَوْمِ ٱعْبُدُوا۟ ٱللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَـٰهٍ غَيْرُهُۥ ۖ وَلَا تَنقُصُوا۟ ٱلْمِكْيَالَ وَٱلْمِيزَانَ ۚ إِنِّىٓ أَرَىٰكُم بِخَيْرٍ وَإِنِّىٓ أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ مُّحِيطٍ ۝٨٤

और मदयन की ओर उनके भाई शुऐब को भेजा। उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! अल्लाह की इबादत (उपासना) करो, उसके सिवा कोई तुम्हारा पूज्य नहीं और नाप-तौल में कमी न करो।[35] निःसंदेह मैं तुम्हें अच्छी स्थिति में देख रहा हूँ। और निःसंदेह मैं तुमपर एक घेर लेने वाले दिन की यातना से डरता हूँ।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[35] शुऐब की जाति में शिर्क (मिश्रणवाद) के सिवा नाप-तौल में कमी करने का रोग भी था।
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मेरा चिंतन
11:85पृष्ठ 231 · जुज़ 12

وَيَـٰقَوْمِ أَوْفُوا۟ ٱلْمِكْيَالَ وَٱلْمِيزَانَ بِٱلْقِسْطِ ۖ وَلَا تَبْخَسُوا۟ ٱلنَّاسَ أَشْيَآءَهُمْ وَلَا تَعْثَوْا۟ فِى ٱلْأَرْضِ مُفْسِدِينَ ۝٨٥

ऐ मेरी जाति के लोगो! न्याय के साथ नाप और तौल को पूरा रखो और लोगों को उनकी चीज़ें कम न दो तथा धरती में उपद्रव फैलाते न फिरो।

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मेरा चिंतन
11:86पृष्ठ 231 · जुज़ 12

بَقِيَّتُ ٱللَّهِ خَيْرٌ لَّكُمْ إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ ۚ وَمَآ أَنَا۠ عَلَيْكُم بِحَفِيظٍ ۝٨٦

अल्लाह की दी हुई बचत, तुम्हारे लिए अच्छी है, यदि तुम ईमान वाले हो और मैं तुमपर कोई संरक्षक नहीं हूँ।

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मेरा चिंतन
11:87पृष्ठ 231 · जुज़ 12

قَالُوا۟ يَـٰشُعَيْبُ أَصَلَوٰتُكَ تَأْمُرُكَ أَن نَّتْرُكَ مَا يَعْبُدُ ءَابَآؤُنَآ أَوْ أَن نَّفْعَلَ فِىٓ أَمْوَٰلِنَا مَا نَشَـٰٓؤُا۟ ۖ إِنَّكَ لَأَنتَ ٱلْحَلِيمُ ٱلرَّشِيدُ ۝٨٧

उन्होंने कहा : ऐ शुऐब! क्या तेरी नमाज़ (इबादत) तुझे आदेश दे रही है कि हम उसे त्याग दें, जिसकी पूजा हमारे बाप-दादा करते आए हैं? अथवा अपने धन में वह न करें जो करना चाहें? वास्तव में, तू बड़ा ही सहनशील तथा भला व्यक्ति है!

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मेरा चिंतन
11:88पृष्ठ 231 · जुज़ 12

قَالَ يَـٰقَوْمِ أَرَءَيْتُمْ إِن كُنتُ عَلَىٰ بَيِّنَةٍ مِّن رَّبِّى وَرَزَقَنِى مِنْهُ رِزْقًا حَسَنًا ۚ وَمَآ أُرِيدُ أَنْ أُخَالِفَكُمْ إِلَىٰ مَآ أَنْهَىٰكُمْ عَنْهُ ۚ إِنْ أُرِيدُ إِلَّا ٱلْإِصْلَـٰحَ مَا ٱسْتَطَعْتُ ۚ وَمَا تَوْفِيقِىٓ إِلَّا بِٱللَّهِ ۚ عَلَيْهِ تَوَكَّلْتُ وَإِلَيْهِ أُنِيبُ ۝٨٨

शुऐब ने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! तुम बताओ, यदि मैं अपने पालनहार की ओर से स्पष्ट प्रमाण पर हूँ और उसने मुझे अच्छी जीविका प्रदान की हो, (तो कैसे तुम्हारा साथ दूँ?) मैं नहीं चाहता कि तुम्हारा विरोध करते हुए वह कार्य करूँ, जिससे तुम्हें रोक रहा हूँ। मैं जहाँ तक हो सके, सुधार ही चाहता हूँ और यह जो कुछ करना चाहता हूँ, मुझे इसका सामर्थ्य अल्लाह ही से मिलेगा। मैंने उसी पर भरोसा किया है और उसी की ओर लौटता हूँ।

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मेरा चिंतन
11:89पृष्ठ 232 · जुज़ 12

وَيَـٰقَوْمِ لَا يَجْرِمَنَّكُمْ شِقَاقِىٓ أَن يُصِيبَكُم مِّثْلُ مَآ أَصَابَ قَوْمَ نُوحٍ أَوْ قَوْمَ هُودٍ أَوْ قَوْمَ صَـٰلِحٍ ۚ وَمَا قَوْمُ لُوطٍ مِّنكُم بِبَعِيدٍ ۝٨٩

ऐ मेरी जाति के लोगो! तुम्हें मेरा विरोध इस बात पर न उभारे कि तुमपर वैसी ही यातना आ पड़े, जो नूह़ की जाति, या हूद की जाति, या सालेह़ की जाति पर आई। और लूत की जाति तुमसे कुछ दूर नहीं है।

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मेरा चिंतन
11:90पृष्ठ 232 · जुज़ 12

وَٱسْتَغْفِرُوا۟ رَبَّكُمْ ثُمَّ تُوبُوٓا۟ إِلَيْهِ ۚ إِنَّ رَبِّى رَحِيمٌ وَدُودٌ ۝٩٠

और अपने पालनहार से क्षमा माँगो, फिर उसी की ओर पलट आओ। निःसंदेह मेरा पालनहार अति दयालु तथा प्रेम करने वाला है।

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मेरा चिंतन
11:91पृष्ठ 232 · जुज़ 12

قَالُوا۟ يَـٰشُعَيْبُ مَا نَفْقَهُ كَثِيرًا مِّمَّا تَقُولُ وَإِنَّا لَنَرَىٰكَ فِينَا ضَعِيفًا ۖ وَلَوْلَا رَهْطُكَ لَرَجَمْنَـٰكَ ۖ وَمَآ أَنتَ عَلَيْنَا بِعَزِيزٍ ۝٩١

उन्होंने कहा : ऐ शुऐब! तुम्हारी बहुत-सी बातें हम नहीं समझते और हम तुम्हें अपने बीच निर्बल देख रहे हैं। और यदि तुम्हारा क़बीला (हमारे धर्म पर) न होता, तो हम तुम्हें पथराव करके मार डालते और तुम हमारी नज़र में प्रतिष्ठित भी नहीं हो।

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मेरा चिंतन
11:92पृष्ठ 232 · जुज़ 12

قَالَ يَـٰقَوْمِ أَرَهْطِىٓ أَعَزُّ عَلَيْكُم مِّنَ ٱللَّهِ وَٱتَّخَذْتُمُوهُ وَرَآءَكُمْ ظِهْرِيًّا ۖ إِنَّ رَبِّى بِمَا تَعْمَلُونَ مُحِيطٌ ۝٩٢

उसने कहा : ऐ मेरी जाति के लोगो! क्या मेरा क़बीला तुम्हारे निकट अल्लाह से अधिक प्रभावशाली है?! और तुमने उस (अल्लाह) को पीठ पीछे डाल दिया है।[36] निःसंदेह मेरा पालनहार उसे घेरे में लिए हुए है, जो कुछ तुम कर रहे हो।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[36] अर्थात तुम मेरे भाई बंधु के भय से मेरे विरुद्ध कुछ करने से रुक गए, तो क्या वे तुम्हारे विचार में अल्लाह से अधिक प्रभाव रखते हैं?
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मेरा चिंतन
11:93पृष्ठ 232 · जुज़ 12

وَيَـٰقَوْمِ ٱعْمَلُوا۟ عَلَىٰ مَكَانَتِكُمْ إِنِّى عَـٰمِلٌ ۖ سَوْفَ تَعْلَمُونَ مَن يَأْتِيهِ عَذَابٌ يُخْزِيهِ وَمَنْ هُوَ كَـٰذِبٌ ۖ وَٱرْتَقِبُوٓا۟ إِنِّى مَعَكُمْ رَقِيبٌ ۝٩٣

और ऐ मेरी जाति के लोगो! तुम अपने तरीक़े पर काम करो, मैं (भी अपने तरीक़े पर) काम कर रहा हूँ। तुम्हें बहुत जल्द पता चल जाएगा कि किसपर अपमानित कर देने वाली यातना आती है और कौन झूठा है? तथा तुम प्रतीक्षा करो, मैं (भी) तुम्हारे साथ प्रतीक्षा करने वाला हूँ।

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मेरा चिंतन
11:94पृष्ठ 232 · जुज़ 12

وَلَمَّا جَآءَ أَمْرُنَا نَجَّيْنَا شُعَيْبًا وَٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ مَعَهُۥ بِرَحْمَةٍ مِّنَّا وَأَخَذَتِ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ ٱلصَّيْحَةُ فَأَصْبَحُوا۟ فِى دِيَـٰرِهِمْ جَـٰثِمِينَ ۝٩٤

और जब हमारा आदेश आ गया, तो हमने शुऐब को और उसके साथ ईमान लाने वालों को अपनी दया से बचा लिया और अत्याचारियों को भयंकर आवाज़ (चीत्कार) ने पकड़ लिया। फिर वे अपने घरों में औंधे मुँह पड़े रह गए।

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मेरा चिंतन
11:95पृष्ठ 232 · जुज़ 12

كَأَن لَّمْ يَغْنَوْا۟ فِيهَآ ۗ أَلَا بُعْدًا لِّمَدْيَنَ كَمَا بَعِدَتْ ثَمُودُ ۝٩٥

जैसै वे वहाँ कभी बसे ही नहीं थे। सुन लो! मदयन वाले भी वैसे ही (अल्लाह की दया से) दूर कर दिए गए, जैसे समूद जाति के लोग दूर कर दिए गए।

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मेरा चिंतन
11:96पृष्ठ 232 · जुज़ 12

وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ بِـَٔايَـٰتِنَا وَسُلْطَـٰنٍ مُّبِينٍ ۝٩٦

और हमने मूसा को अपनी निशानियों (चमत्कार) तथा स्पष्ट प्रमाण के साथ भेजा।

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मेरा चिंतन
11:97पृष्ठ 232 · जुज़ 12

إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَمَلَإِي۟هِۦ فَٱتَّبَعُوٓا۟ أَمْرَ فِرْعَوْنَ ۖ وَمَآ أَمْرُ فِرْعَوْنَ بِرَشِيدٍ ۝٩٧

फ़िरऔन और उसके प्रमुखों की ओर। तो उन्होंने फ़िरऔन के आदेश का पालन किया। जबकि फ़िरऔन का आदेश सटीक नहीं था।

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मेरा चिंतन
11:98पृष्ठ 233 · जुज़ 12

يَقْدُمُ قَوْمَهُۥ يَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ فَأَوْرَدَهُمُ ٱلنَّارَ ۖ وَبِئْسَ ٱلْوِرْدُ ٱلْمَوْرُودُ ۝٩٨

वह क़ियामत के दिन अपनी जाति के आगे-आगे चलेगा और उनको नरक में उतारेगा और वह क्या ही बुरा उतरने का स्थान है!

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मेरा चिंतन
11:99पृष्ठ 233 · जुज़ 12

وَأُتْبِعُوا۟ فِى هَـٰذِهِۦ لَعْنَةً وَيَوْمَ ٱلْقِيَـٰمَةِ ۚ بِئْسَ ٱلرِّفْدُ ٱلْمَرْفُودُ ۝٩٩

और इस दुनिया में उनके पीछे लानत (धिक्कार) लगा दी गई और क़ियामत के दिन भी। कैसा बुरा पुरस्कार है, जो उन्हें दिया जाएगा!

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मेरा चिंतन
11:100पृष्ठ 233 · जुज़ 12

ذَٰلِكَ مِنْ أَنۢبَآءِ ٱلْقُرَىٰ نَقُصُّهُۥ عَلَيْكَ ۖ مِنْهَا قَآئِمٌ وَحَصِيدٌ ۝١٠٠

(ऐ नबी!) ये बस्तियों के समाचार हैं, जिनका वर्णन हम आपके सामने कर रहे हैं। उनमें से कुछ खड़ी हैं और कुछ उजड़ चुकी हैं।

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मेरा चिंतन
11:101पृष्ठ 233 · जुज़ 12

وَمَا ظَلَمْنَـٰهُمْ وَلَـٰكِن ظَلَمُوٓا۟ أَنفُسَهُمْ ۖ فَمَآ أَغْنَتْ عَنْهُمْ ءَالِهَتُهُمُ ٱلَّتِى يَدْعُونَ مِن دُونِ ٱللَّهِ مِن شَىْءٍ لَّمَّا جَآءَ أَمْرُ رَبِّكَ ۖ وَمَا زَادُوهُمْ غَيْرَ تَتْبِيبٍ ۝١٠١

और हमने उनपर अत्याचार नहीं किया, परंतु उन्होंने स्वयं अपने ऊपर अत्याचार किया। जब आपके पालनहार का आदेश आ गया, तो उनके वे पूज्य, जिन्हें वे अल्लाह के सिवा पुकारा करते थे, उनके कुछ भी काम न आए और उन्होंने केवल उन्हें हानि ही पहुँचाया।[37]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[37] अर्थात ये जातियाँ अपने देवी-देवता की पूजा इसलिए करती थीं कि वे उन्हें लाभ पहुँचाएँगे। किंतु उनकी पूजा ही उनपर अधिक यातना का कारण बन गई।
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मेरा चिंतन
11:102पृष्ठ 233 · जुज़ 12

وَكَذَٰلِكَ أَخْذُ رَبِّكَ إِذَآ أَخَذَ ٱلْقُرَىٰ وَهِىَ ظَـٰلِمَةٌ ۚ إِنَّ أَخْذَهُۥٓ أَلِيمٌ شَدِيدٌ ۝١٠٢

और तेरे पालनहार की पकड़ ऐसी ही होती है, जब वह अत्याचार करने वाली बस्तियों को पकड़ता है। निःसंदेह उसकी पकड़ बहुत दर्दनाक, बहुत कठोर होती है।[38]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[38] नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम का कथन है कि अल्लाह अत्याचारी को अवसर देता है, यहाँ तक कि जब उसे पकड़ता है तो उससे बचता नहीं, और आपने फिर यही आयत पढ़ी। (सह़ीह़ बुख़ारी, ह़दीस संख्या : 4686)
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मेरा चिंतन
11:103पृष्ठ 233 · जुज़ 12

إِنَّ فِى ذَٰلِكَ لَـَٔايَةً لِّمَنْ خَافَ عَذَابَ ٱلْـَٔاخِرَةِ ۚ ذَٰلِكَ يَوْمٌ مَّجْمُوعٌ لَّهُ ٱلنَّاسُ وَذَٰلِكَ يَوْمٌ مَّشْهُودٌ ۝١٠٣

निश्चय ही इसमें उसके लिए एक निशानी है, जो आख़िरत की यातना से डरे। वह ऐसा दिन होगा, जिसके लिए सभी लोग एकत्रित किए जाएँगे तथा उस दिन सभी लोग उपस्थित होंगे।

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मेरा चिंतन
11:104पृष्ठ 233 · जुज़ 12

وَمَا نُؤَخِّرُهُۥٓ إِلَّا لِأَجَلٍ مَّعْدُودٍ ۝١٠٤

और हम उसे केवल एक निर्धारित अवधि के लिए पीछे कर रहे हैं।

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मेरा चिंतन
11:105पृष्ठ 233 · जुज़ 12

يَوْمَ يَأْتِ لَا تَكَلَّمُ نَفْسٌ إِلَّا بِإِذْنِهِۦ ۚ فَمِنْهُمْ شَقِىٌّ وَسَعِيدٌ ۝١٠٥

जिस दिन वह आ जाएगा, तो अल्लाह की अनुमति के बिना कोई प्राणी बात नहीं कर सकेगा, फिर उनमें से कुछ अभागे होंगे और कुछ भाग्यशाली होंगे।

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मेरा चिंतन
11:106पृष्ठ 233 · जुज़ 12

فَأَمَّا ٱلَّذِينَ شَقُوا۟ فَفِى ٱلنَّارِ لَهُمْ فِيهَا زَفِيرٌ وَشَهِيقٌ ۝١٠٦

चुनाँचे जो लोग अभागे होंगे, वे नरक में होंगे, उसमें उन्हें चीखना और चिल्लाना होगा।

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मेरा चिंतन
11:107पृष्ठ 233 · जुज़ 12

خَـٰلِدِينَ فِيهَا مَا دَامَتِ ٱلسَّمَـٰوَٰتُ وَٱلْأَرْضُ إِلَّا مَا شَآءَ رَبُّكَ ۚ إِنَّ رَبَّكَ فَعَّالٌ لِّمَا يُرِيدُ ۝١٠٧

वे उसमें हमेशा रहेंगे, जब तक आकाश तथा धरती अवस्थित हैं। परन्तु यह कि आपका पालनहार कुछ और चाहे। निःसंदेह आपका पालनहार जो चाहे, करने वाला है।

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मेरा चिंतन
11:108पृष्ठ 233 · जुज़ 12

۞ وَأَمَّا ٱلَّذِينَ سُعِدُوا۟ فَفِى ٱلْجَنَّةِ خَـٰلِدِينَ فِيهَا مَا دَامَتِ ٱلسَّمَـٰوَٰتُ وَٱلْأَرْضُ إِلَّا مَا شَآءَ رَبُّكَ ۖ عَطَآءً غَيْرَ مَجْذُوذٍ ۝١٠٨

लेकिन जो भाग्यशाली हैं, तो (वे) स्वर्ग में होंगे, वे उसमें सदैव रहेंगे जब तक आकाश तथा धरती विद्यमान् हैं। परन्तु यह कि आपका पालनहार कुछ और चाहे। यह एक अनंत प्रदान है।

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मेरा चिंतन
11:109पृष्ठ 234 · जुज़ 12

فَلَا تَكُ فِى مِرْيَةٍ مِّمَّا يَعْبُدُ هَـٰٓؤُلَآءِ ۚ مَا يَعْبُدُونَ إِلَّا كَمَا يَعْبُدُ ءَابَآؤُهُم مِّن قَبْلُ ۚ وَإِنَّا لَمُوَفُّوهُمْ نَصِيبَهُمْ غَيْرَ مَنقُوصٍ ۝١٠٩

अतः (ऐ नबी!) आप उसके बारे में किसी संदेह में न रहें, जिसे ये पूजते हैं। ये उसी प्रकार पूजते हैं, जैसे इनसे पहले इनके बाप-दादा पूजते[39] थे। निःसंदेह हम इन्हें इनका हिस्सा बिना किसी कमी के पूरा-पूरा देने वाले हैं।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[39] अर्थात इनकी पूजा निर्मूल और बाप-दादा की परंपरा पर आधारित है, जिसका सत्य से कोई संबंध नहीं है।
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मेरा चिंतन
11:110पृष्ठ 234 · जुज़ 12

وَلَقَدْ ءَاتَيْنَا مُوسَى ٱلْكِتَـٰبَ فَٱخْتُلِفَ فِيهِ ۚ وَلَوْلَا كَلِمَةٌ سَبَقَتْ مِن رَّبِّكَ لَقُضِىَ بَيْنَهُمْ ۚ وَإِنَّهُمْ لَفِى شَكٍّ مِّنْهُ مُرِيبٍ ۝١١٠

और हमने मूसा को पुस्तक (तौरात) प्रदान की। तो उसमें विभेद किया गया। और यदि आपके पालनहार ने पहले से एक बात[40] निश्चित न की होती, तो उनके बीच निर्णय कर दिया गया होता। और निःसंदेह वे[41] उस (क़ुरआन) के बारे में असमंजस में डाल देनेवाले संदेह में पड़े हुए हैं।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[40] अर्थात यह कि संसार में प्रत्येक को अपनी इच्छानुसार कर्म करने का अवसर दिया जाएगा। [41] अर्थात मिश्रणवादी क़ुरआन के विषय में।
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मेरा चिंतन
11:111पृष्ठ 234 · जुज़ 12

وَإِنَّ كُلًّا لَّمَّا لَيُوَفِّيَنَّهُمْ رَبُّكَ أَعْمَـٰلَهُمْ ۚ إِنَّهُۥ بِمَا يَعْمَلُونَ خَبِيرٌ ۝١١١

और निःसंदेह आपका पालनहार अवश्य प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों का पूरा बदला देगा। निश्चित रूप से वह उनके कर्मों से सूचित है।

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मेरा चिंतन
11:112पृष्ठ 234 · जुज़ 12

فَٱسْتَقِمْ كَمَآ أُمِرْتَ وَمَن تَابَ مَعَكَ وَلَا تَطْغَوْا۟ ۚ إِنَّهُۥ بِمَا تَعْمَلُونَ بَصِيرٌ ۝١١٢

अतः (ऐ नबी!) आप सुदृढ़ रहें जैसा आपको आदेश दिया गया है और वे लोग भी जिन्होंने आपके साथ तौबा की। तथा तुम सीमा का उल्लंघन[42] न करो, निःसंदेह वह (अल्लाह) जो कुछ तुम कर रहे हो, उसे ख़ूब देखने वाला है।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[42] अर्थात धर्मादेश की सीमा का।
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मेरा चिंतन
11:113पृष्ठ 234 · जुज़ 12

وَلَا تَرْكَنُوٓا۟ إِلَى ٱلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ فَتَمَسَّكُمُ ٱلنَّارُ وَمَا لَكُم مِّن دُونِ ٱللَّهِ مِنْ أَوْلِيَآءَ ثُمَّ لَا تُنصَرُونَ ۝١١٣

और अत्याचारियों की ओर न झुक पड़ो। अन्यथा तुम्हें भी आग पकड़ लेगी और अल्लाह के सिवा तुम्हारा कोई सहायक नहीं होगा (जो तुम्हें बचा सके)। फिर तुम्हारी सहायता नहीं की जाएगी।

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मेरा चिंतन
11:114पृष्ठ 234 · जुज़ 12

وَأَقِمِ ٱلصَّلَوٰةَ طَرَفَىِ ٱلنَّهَارِ وَزُلَفًا مِّنَ ٱلَّيْلِ ۚ إِنَّ ٱلْحَسَنَـٰتِ يُذْهِبْنَ ٱلسَّيِّـَٔاتِ ۚ ذَٰلِكَ ذِكْرَىٰ لِلذَّٰكِرِينَ ۝١١٤

तथा आप दिन के दोनों सिरों में और रात के कुछ क्षणों[43] में नमाज़ क़ायम करें। निःसंदेह नेकियाँ बुराइयों को दूर कर देती[44] हैं। यह एक शिक्षा है, शिक्षा ग्रहण करने वालों के लिए।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[43] नमाज़ के समय के सविस्तार विवरण के लिए देखिए सूरत बनी इसराईल, आयत : 78, सूरत ताहा, आयत : 130, तथा सूरतुर्-रूम, आयत : 17-18. [44] ह़दीस में आता है कि आप (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमाया : यदि किसी के द्वार पर एक नहर जारी हो, जिसमें वह पाँच बार स्नान करता हो, तो क्या उसके शरीर पर कुछ मैल रह जाएगी? इसी प्रकार पाँचों नमाज़ों से अल्लाह पापों को मिटा देता है। (बुख़ारी : 528, मुस्लिम : 667) किंतु बड़े-बड़े पाप जैसे शिर्क, हत्या इत्यादि बिना तौबा के क्षमा नहीं किए जाते।
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मेरा चिंतन
11:115पृष्ठ 234 · जुज़ 12

وَٱصْبِرْ فَإِنَّ ٱللَّهَ لَا يُضِيعُ أَجْرَ ٱلْمُحْسِنِينَ ۝١١٥

तथा आप धैर्य से काम लें, क्योंकि अल्लाह सदाचारियों का प्रतिफल नष्ट नहीं करता।

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मेरा चिंतन
11:116पृष्ठ 234 · जुज़ 12

فَلَوْلَا كَانَ مِنَ ٱلْقُرُونِ مِن قَبْلِكُمْ أُو۟لُوا۟ بَقِيَّةٍ يَنْهَوْنَ عَنِ ٱلْفَسَادِ فِى ٱلْأَرْضِ إِلَّا قَلِيلًا مِّمَّنْ أَنجَيْنَا مِنْهُمْ ۗ وَٱتَّبَعَ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ مَآ أُتْرِفُوا۟ فِيهِ وَكَانُوا۟ مُجْرِمِينَ ۝١١٦

फिर तुमसे पहले गुज़रे हुए समुदायों में ऐसे बचे खुचे भले-समझदार लोग क्यों न हुए, जो धरती में बिगाड़ से रोकते? सिवाय उन थोड़े-से लोगों के, जिन्हें हमने उनमें से बचा लिया। और अत्याचारी लोग तो उसी सुख-सामग्री के पीछे पड़े रहे, जिसमें वे रखे गए थे और वे तो थे ही अपराधी।

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मेरा चिंतन
11:117पृष्ठ 234 · जुज़ 12

وَمَا كَانَ رَبُّكَ لِيُهْلِكَ ٱلْقُرَىٰ بِظُلْمٍ وَأَهْلُهَا مُصْلِحُونَ ۝١١٧

और आपका पालनहार ऐसा नहीं है कि वह बस्तियों को अन्यायपूर्वक विनष्ट कर दे, जबकि उनके निवासी सुधार करने वाले हों।

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मेरा चिंतन
11:118पृष्ठ 235 · जुज़ 12

وَلَوْ شَآءَ رَبُّكَ لَجَعَلَ ٱلنَّاسَ أُمَّةً وَٰحِدَةً ۖ وَلَا يَزَالُونَ مُخْتَلِفِينَ ۝١١٨

और यदि आपका पालनहार चाहता, तो सब लोगों को एक ही समुदाय बना देता और वे सदैव विभेद करते ही रहेंगे।

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मेरा चिंतन
11:119पृष्ठ 235 · जुज़ 12

إِلَّا مَن رَّحِمَ رَبُّكَ ۚ وَلِذَٰلِكَ خَلَقَهُمْ ۗ وَتَمَّتْ كَلِمَةُ رَبِّكَ لَأَمْلَأَنَّ جَهَنَّمَ مِنَ ٱلْجِنَّةِ وَٱلنَّاسِ أَجْمَعِينَ ۝١١٩

सिवाय उसके, जिसपर आपका पालनहार दया करे और इसी के लिए उसने उन्हें पैदा किया।[45] और आपके पालनहार की बात पूरी हो गई कि मैं नरक को सब जिन्नों तथा इनसानों से अवश्य भर दूँगा।[46]

अनुवाद टिप्पणियाँ
[45] अर्थात एक ही सत्धर्म पर सबको कर देता। परंतु उसने प्रत्येक को अपने विचार की स्वतंत्रता दी है कि जिस धर्म या विचार को चाहे अपनाए ताकि प्रलय के दिन सत्धर्म को ग्रहण न करने पर उन्हें यातना का स्वाद चखाया जाए। [46] क्योंकि इस स्वतंत्रता का ग़लत प्रयोग करके अधिकतर लोग सत्धर्म को छोड़ बैठे।
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मेरा चिंतन
11:120पृष्ठ 235 · जुज़ 12

وَكُلًّا نَّقُصُّ عَلَيْكَ مِنْ أَنۢبَآءِ ٱلرُّسُلِ مَا نُثَبِّتُ بِهِۦ فُؤَادَكَ ۚ وَجَآءَكَ فِى هَـٰذِهِ ٱلْحَقُّ وَمَوْعِظَةٌ وَذِكْرَىٰ لِلْمُؤْمِنِينَ ۝١٢٠

और हम रसूलों की खबरों में से आपको हर वह खबर सुनाते हैं, जिसके द्वारा हम आपके दिल को सुदृढ़ रखते हैं। और इसमें आपके पास सत्य आ गया है और ईमान वालों के लिए उपदेश और अनुस्मरण भी।

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मेरा चिंतन
11:121पृष्ठ 235 · जुज़ 12

وَقُل لِّلَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ ٱعْمَلُوا۟ عَلَىٰ مَكَانَتِكُمْ إِنَّا عَـٰمِلُونَ ۝١٢١

और (ऐ नबी!) आप उनसे कह दें, जो ईमान नहीं लाते कि तुम अपने रास्ते पर काम करते रहो। निःसंदेह हम (भी) काम करने वाले हैं।

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मेरा चिंतन
11:122पृष्ठ 235 · जुज़ 12

وَٱنتَظِرُوٓا۟ إِنَّا مُنتَظِرُونَ ۝١٢٢

तथा तुम प्रतीक्षा[47] करो, निःसंदेह हम भी प्रतीक्षा करने वाले हैं।

अनुवाद टिप्पणियाँ
[47] अर्थात अपने परिणाम की।
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मेरा चिंतन
11:123पृष्ठ 235 · जुज़ 12

وَلِلَّهِ غَيْبُ ٱلسَّمَـٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَإِلَيْهِ يُرْجَعُ ٱلْأَمْرُ كُلُّهُۥ فَٱعْبُدْهُ وَتَوَكَّلْ عَلَيْهِ ۚ وَمَا رَبُّكَ بِغَـٰفِلٍ عَمَّا تَعْمَلُونَ ۝١٢٣

अल्लाह ही के पास आकाशों तथा धरती की छिपी हुई चीज़ों का ज्ञान है और सभी मामले उसी की ओर लौटाए जाते हैं। अतः आप उसी की इबादत (उपासना) करें और उसी पर भरोसा करें। और आपका पालनहार उससे अनभिज्ञ नहीं है, जो तुम कर रहे हो।

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मेरा चिंतन

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मूल अरबी: Tanzil Uthmani v1.1. अर्थों का अनुवाद: Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari · QuranEnc.com · v1.1.5.

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Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omari
Translated by Azizul Haq Al-Omari.
स्रोत संस्करण: 1.1.5 · 2025-08-05

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